बिलासपुर: सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर तहसीलदार, पटवारी समेत छह पर केस
कथित अवैध कब्जे को बचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में कोर्ट के आदेश के बाद झंडूता पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे को बचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में कोर्ट के आदेश के बाद झंडूता पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी झंडूता के 31 अगस्त 2026 के आदेश के बाद हुई है। पुलिस ने एक सितंबर को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में गांव खेड़ी निवासी तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा वर्ष 2016-17 के तत्कालीन तहसीलदार और तत्कालीन रिकॉर्ड कीपर भी आरोपी हैं।
वर्ष 2021 में पटवार हलका जेजवीं में तैनात पटवारी को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता धनी राम निवासी गांव खेड़ी के अनुसार उनके दिवंगत भाई ने 9 सितंबर 2008 को उपायुक्त को दी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव खेड़ी में खसरा नंबर 146/98 की करीब एक बीघा दस बिस्वा सरकारी भूमि पर आरोपियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इस शिकायत के बाद पटवारी और कानूनगो ने मौके पर जांच की। अतिक्रमण पाए जाने पर सरकारी भूमि के कब्जे को चिह्नित किया गया। आरोपियों को बेदखल करने के लिए कार्रवाई शुरू हुई।
यह मामला एसी प्रथम श्रेणी झंडूता की अदालत में हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम के तहत पहुंचा। बेदखली की इस कार्रवाई की मिसल नंबर 31/13 थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मामले की मूल फाइल बाद में तहसील कार्यालय से गायब कर दी गई। आरोपी जो जेजवीं पटवार हलका का लंबरदार भी है, उसने तत्कालीन तहसीलदार और रिकॉर्ड कीपर के साथ कथित मिलीभगत की। पुरानी मिसल को गायब अथवा नष्ट करवाया। उसने मिसल नंबर 31/13 के बारे में जानकारी लेने के लिए कई बार तहसील कार्यालय का रुख किया। उसे हर बार बताया गया कि फाइल नहीं मिल रही है।
आश्वासन दिया गया कि फाइल मिलने पर उसे सूचित किया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2019 में शिकायतकर्ता ने उपायुक्त बिलासपुर के समक्ष दोबारा यह मामला उठाया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसके बाद 13 अगस्त 2021 को मिसल नंबर 19/21 तैयार की गई। इस नई मिसल में पहले की कार्रवाई में दर्ज करीब एक बीघा दस बिस्वा सरकारी भूमि के अतिक्रमण को घटाकर केवल दस बिस्वा दर्शाया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि नई मिसल तैयार करने में तत्कालीन पटवारी की भी भूमिका रही।
पुराने रिकॉर्ड को हटाकर आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर आरोपियों का कब्जा केवल दस बिस्वा तक सीमित नहीं है। बल्कि यह कब्जा दो बीघा से अधिक सरकारी भूमि पर है। पुरानी मिसल में दर्ज अतिक्रमण और मौके की वास्तविक स्थिति के विपरीत नई मिसल में कब्जे का क्षेत्रफल कम दिखाया गया। धनी राम के अनुसार उसने 28 जनवरी 2026 को पुलिस और अफसरों को लिखित शिकायत दी थी। कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी झंडूता ने 31 अगस्त 2026 को मामले में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद झंडूता पुलिस ने मामला दर्ज किया।