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Bilaspur News: डेढ़ माह बाद जिले में झमाझम बारिश व ओलावृष्टि, दिन में छाया अंधेरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:34 PM IST
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गेहूं व लहसुन की फसलों को मिली राहत, लंबे समय से बारिश न होने से किसान थे चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में करीब डेढ़ माह के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर के समय आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में दिन में ही अंधेरा सा छा गया। इसके बाद तेज बारिश के साथ कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे बड़ी राहत मिली है।
इससे पहले जिले में 23 जनवरी को अच्छी बारिश हुई थी। इसके बाद से मौसम शुष्क बना हुआ था, जिससे रबी फसलों पर असर पड़ने लगा था। कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी थी, जबकि नकदी फसल लहसुन की बढ़त भी धीमी हो गई थी। सोमवार को हुई बारिश से खेतों में नमी लौटी है, जिससे फसलों में सुधार की उम्मीद जगी है। जिले में खेती मुख्य आजीविका का साधन है और लगभग 57,822 किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। जिले में करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें से लगभग 6,500 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जबकि शेष 20,500 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह वर्षा आधारित है। ऐसे में लंबे समय तक बारिश न होने का सबसे अधिक असर इन्हीं गैर-सिंचित क्षेत्रों में देखने को मिल रहा था। जुखाला सहित दयोथ, रानीकोटला, नम्होल और आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लहसुन की खेती की जाती है। बारिश न होने के कारण लहसुन की गांठ बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी और उत्पादन घटने की आशंका बनी हुई थी। अब बारिश और ओलावृष्टि के बाद मिट्टी में नमी आने से किसानों को फसल संभलने की उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं और लहसुन दोनों ही फसलों के लिए इस समय नमी बेहद जरूरी होती है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो फसल को और फायदा मिल सकता है।
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बिलासपुर। जिले में करीब डेढ़ माह के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर के समय आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में दिन में ही अंधेरा सा छा गया। इसके बाद तेज बारिश के साथ कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे बड़ी राहत मिली है।
इससे पहले जिले में 23 जनवरी को अच्छी बारिश हुई थी। इसके बाद से मौसम शुष्क बना हुआ था, जिससे रबी फसलों पर असर पड़ने लगा था। कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी थी, जबकि नकदी फसल लहसुन की बढ़त भी धीमी हो गई थी। सोमवार को हुई बारिश से खेतों में नमी लौटी है, जिससे फसलों में सुधार की उम्मीद जगी है। जिले में खेती मुख्य आजीविका का साधन है और लगभग 57,822 किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। जिले में करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें से लगभग 6,500 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जबकि शेष 20,500 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह वर्षा आधारित है। ऐसे में लंबे समय तक बारिश न होने का सबसे अधिक असर इन्हीं गैर-सिंचित क्षेत्रों में देखने को मिल रहा था। जुखाला सहित दयोथ, रानीकोटला, नम्होल और आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लहसुन की खेती की जाती है। बारिश न होने के कारण लहसुन की गांठ बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी और उत्पादन घटने की आशंका बनी हुई थी। अब बारिश और ओलावृष्टि के बाद मिट्टी में नमी आने से किसानों को फसल संभलने की उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं और लहसुन दोनों ही फसलों के लिए इस समय नमी बेहद जरूरी होती है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो फसल को और फायदा मिल सकता है।
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