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Bilaspur News: फाइलों में दफन बिलासपुर के विकास की बड़ी घोषणाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 19 Mar 2026 05:35 PM IST
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हटवाड़ स्कूल।
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तीन साल से बजट दर बजट टूट रही हैं जनता की उम्मीदें
चौथे बजट की तैयारी, लेकिन धरातल से नदारद पिछले बड़े प्रोजेक्ट्स
राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल से लेकर डिजिटल यूनिवर्सिटी तक सब कागजों में सीमित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/घुमारवीं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक के बजटों में जिले के शिक्षा, पर्यावरण, पर्यटन और तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की थीं। इनमें राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल हटवाड़, ग्रीन कॉरिडोर के तहत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, औहर में हेलीपोर्ट और घुमारवीं कसारू में डिजिटल यूनिवर्सिटी शामिल हैं। तीन साल बीत जाने के बावजूद अधिकांश योजनाओं का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। कुछ परियोजनाओं के लिए फंड जारी हुए और नियम बने, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस प्रगति सीमित रही। इस बीच प्रदेश सरकार चौथा बजट 2026-27 पेश करने जा रही है।
जिले में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित करने की घोषणा मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार के 2023-24 के बजट में की गई थी। जिले के हटवाड़ स्थित राजीव गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल को डे-बोर्डिंग स्कूल में बदला जा रहा है। इस परियोजना के लिए 25 बीघा जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है और निर्माण कार्यों के लिए फंड जारी कर दिया गया है। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी स्कूल धरातल पर नहीं उतरा और न ही यहां के बच्चों को डे बोर्डिंग की सुविधा अब तक मिल सकी है। शासन, प्रशासन सिर्फ कवायद की बात तक ही सीमित है। घोषणा के तीन साल बाद भी हटवाड़ में इस स्कूल का नींव का पत्थर तक नहीं रखा जा सका है। जिस परियोजना को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वह अब तक केवल घोषणाओं और कागजी प्रक्रियाओं तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस बार प्रदेश सरकार का यह चौथा बजट पेश होने जा रहा है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि इससे पहले इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो जाएगा, लेकिन हटवाड़ में प्रस्तावित इस डे बोर्डिंग स्कूल के मामले में अभी तक कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आई है। डे बोर्डिंग स्कूल शुरू होने के बाद अभिभावकों को अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने की मजबूरी कम होगी और कम फीस में बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी हटवाड़ में प्रस्तावित यह स्कूल केवल घोषणा बनकर रह गया है।
इसके अलावा जिले में हेलीपोर्ट बनाने की घोषणा सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने 2024-25 के बजट में की थी। सबसे पहले बंदला, उसके बाद औहर में इसे बनाने की कवायद शुरू की गई। इसे पर्यटन विकास और क्षेत्र में एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया जाना था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाना है। इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यह हेलीपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। धार्मिक और साहसिक पर्यटन विशेषकर गोबिंद सागर झील के पास को बढ़ावा देना और क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए इसका बनना जरूरी है। इसके बनने से पर्यटकों के लिए सीधी कनेक्टिविटी,आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, और स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी। लेकिन इसको भी अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। इससे पर्यटन से जुड़े विकास पर भी ब्रेक लग गई है। वहीं, जिले के घुमारवीं (कसारू) में पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा मुख्यमंत्री बजट 2025-26 में की गई है। इस महत्वकांक्षी परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह घोषणा अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से क्षेत्र के लोगों, खासकर युवाओं में काफी उत्साह देखा गया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में निराशा भी बढ़ने लगी है। अभी तक भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रारंभिक औपचारिकताओं की प्रक्रिया ही चल रही है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों और छात्रों में इस परियोजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि यह विश्वविद्यालय समय पर स्थापित होता है तो उन्हें उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इनसेट
नहीं पूरी हुई ग्रीन कॉरिडोर की घोषणा
बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों को ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट, वित्तीय वर्ष 2023-24 में की थी। लेकिन इसे अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। कारण यह है कि एक मानक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में बड़ी लागत और तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। हर स्थान पर उपयुक्त क्षमता के ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं हैं। एक नया ट्रांसफार्मर लगाने पर ही लगभग 35 से 50 लाख रुपये का खर्च आता है। चार्जिंग स्टेशन के आंतरिक उपकरणों और तकनीक पर लगभग 80 लाख रुपये तक का व्यय संभावित है। यही कारण है कि विभाग के प्रयासों के बाद भी कोई इस परियोजना में रुचि नहीं दिखा रहा है। कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर भी कारों के लिए चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इनसेट
यह घोषणाएं पूरी हुई
वाटर स्पोर्ट्स : सुक्खू सरकार ने 2024-25 के बजट में गोबिंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू कराने की घोषणा की थी,इसे पूरा कर लिया गया है।
एम टेक : सरकार ने अपने 2024-25 के बजट में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बंदला में इलेक्ट्रिक व्हीकल में एमटेक शुरू कराने की घोषणा की थी, उसे भी शुरू करा दिया गया है।
इनसेट
तीन साल में शिक्षा, पर्यावरण, पर्यटन और तकनीकी क्षेत्र की ये महत्वाकांक्षी घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी हैं। राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल, घुमारवीं डिजिटल यूनिवर्सिटी और औहर हेलीपोर्ट, ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में देरी स्पष्ट रूप से दिखाती है कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। जनता के पैसे और उम्मीदों का सही उपयोग होना चाहिए,लेकिन अब तक सिर्फ कागजी प्रक्रिया ही चल रही हैं। आने वाले बजट में जनता यह उम्मीद कर रही है कि सरकार इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को जल्द लागू करें, न कि केवल घोषणाओं तक सीमित रखे।
कृष्ण लाल चंदेल, भाजपा जिलाध्यक्ष
कोट
हमारी सरकार ने बिलासपुर जिले के लिए शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन और पर्यावरण के क्षेत्र में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की हैं। कुछ योजनाओं में प्रगति के लिए औपचारिकताएं और प्रक्रिया चल रही हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि बड़ी परियोजनाओं में समय लगता है। आगामी बजट में इन योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू करने के लिए पर्याप्त फंड और संसाधन आवंटित किए जाएंगे। हम जनता को भरोसा दिलाते हैं कि डे-बोर्डिंग स्कूल, डिजिटल यूनिवर्सिटी, हेलीपोर्ट और ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शीघ्र ही पूरे होने की प्रक्रिया में हैं।
अंजना धीमान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
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चौथे बजट की तैयारी, लेकिन धरातल से नदारद पिछले बड़े प्रोजेक्ट्स
राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल से लेकर डिजिटल यूनिवर्सिटी तक सब कागजों में सीमित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/घुमारवीं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक के बजटों में जिले के शिक्षा, पर्यावरण, पर्यटन और तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की थीं। इनमें राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल हटवाड़, ग्रीन कॉरिडोर के तहत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, औहर में हेलीपोर्ट और घुमारवीं कसारू में डिजिटल यूनिवर्सिटी शामिल हैं। तीन साल बीत जाने के बावजूद अधिकांश योजनाओं का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। कुछ परियोजनाओं के लिए फंड जारी हुए और नियम बने, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस प्रगति सीमित रही। इस बीच प्रदेश सरकार चौथा बजट 2026-27 पेश करने जा रही है।
जिले में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित करने की घोषणा मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार के 2023-24 के बजट में की गई थी। जिले के हटवाड़ स्थित राजीव गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल को डे-बोर्डिंग स्कूल में बदला जा रहा है। इस परियोजना के लिए 25 बीघा जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है और निर्माण कार्यों के लिए फंड जारी कर दिया गया है। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी स्कूल धरातल पर नहीं उतरा और न ही यहां के बच्चों को डे बोर्डिंग की सुविधा अब तक मिल सकी है। शासन, प्रशासन सिर्फ कवायद की बात तक ही सीमित है। घोषणा के तीन साल बाद भी हटवाड़ में इस स्कूल का नींव का पत्थर तक नहीं रखा जा सका है। जिस परियोजना को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वह अब तक केवल घोषणाओं और कागजी प्रक्रियाओं तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस बार प्रदेश सरकार का यह चौथा बजट पेश होने जा रहा है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि इससे पहले इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो जाएगा, लेकिन हटवाड़ में प्रस्तावित इस डे बोर्डिंग स्कूल के मामले में अभी तक कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आई है। डे बोर्डिंग स्कूल शुरू होने के बाद अभिभावकों को अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने की मजबूरी कम होगी और कम फीस में बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी हटवाड़ में प्रस्तावित यह स्कूल केवल घोषणा बनकर रह गया है।
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इसके अलावा जिले में हेलीपोर्ट बनाने की घोषणा सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने 2024-25 के बजट में की थी। सबसे पहले बंदला, उसके बाद औहर में इसे बनाने की कवायद शुरू की गई। इसे पर्यटन विकास और क्षेत्र में एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया जाना था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाना है। इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यह हेलीपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। धार्मिक और साहसिक पर्यटन विशेषकर गोबिंद सागर झील के पास को बढ़ावा देना और क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए इसका बनना जरूरी है। इसके बनने से पर्यटकों के लिए सीधी कनेक्टिविटी,आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, और स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी। लेकिन इसको भी अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। इससे पर्यटन से जुड़े विकास पर भी ब्रेक लग गई है। वहीं, जिले के घुमारवीं (कसारू) में पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा मुख्यमंत्री बजट 2025-26 में की गई है। इस महत्वकांक्षी परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह घोषणा अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से क्षेत्र के लोगों, खासकर युवाओं में काफी उत्साह देखा गया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में निराशा भी बढ़ने लगी है। अभी तक भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रारंभिक औपचारिकताओं की प्रक्रिया ही चल रही है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों और छात्रों में इस परियोजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि यह विश्वविद्यालय समय पर स्थापित होता है तो उन्हें उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इनसेट
नहीं पूरी हुई ग्रीन कॉरिडोर की घोषणा
बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों को ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट, वित्तीय वर्ष 2023-24 में की थी। लेकिन इसे अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। कारण यह है कि एक मानक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में बड़ी लागत और तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। हर स्थान पर उपयुक्त क्षमता के ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं हैं। एक नया ट्रांसफार्मर लगाने पर ही लगभग 35 से 50 लाख रुपये का खर्च आता है। चार्जिंग स्टेशन के आंतरिक उपकरणों और तकनीक पर लगभग 80 लाख रुपये तक का व्यय संभावित है। यही कारण है कि विभाग के प्रयासों के बाद भी कोई इस परियोजना में रुचि नहीं दिखा रहा है। कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर भी कारों के लिए चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इनसेट
यह घोषणाएं पूरी हुई
वाटर स्पोर्ट्स : सुक्खू सरकार ने 2024-25 के बजट में गोबिंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू कराने की घोषणा की थी,इसे पूरा कर लिया गया है।
एम टेक : सरकार ने अपने 2024-25 के बजट में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बंदला में इलेक्ट्रिक व्हीकल में एमटेक शुरू कराने की घोषणा की थी, उसे भी शुरू करा दिया गया है।
इनसेट
तीन साल में शिक्षा, पर्यावरण, पर्यटन और तकनीकी क्षेत्र की ये महत्वाकांक्षी घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी हैं। राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल, घुमारवीं डिजिटल यूनिवर्सिटी और औहर हेलीपोर्ट, ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में देरी स्पष्ट रूप से दिखाती है कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। जनता के पैसे और उम्मीदों का सही उपयोग होना चाहिए,लेकिन अब तक सिर्फ कागजी प्रक्रिया ही चल रही हैं। आने वाले बजट में जनता यह उम्मीद कर रही है कि सरकार इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को जल्द लागू करें, न कि केवल घोषणाओं तक सीमित रखे।
कृष्ण लाल चंदेल, भाजपा जिलाध्यक्ष
कोट
हमारी सरकार ने बिलासपुर जिले के लिए शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन और पर्यावरण के क्षेत्र में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की हैं। कुछ योजनाओं में प्रगति के लिए औपचारिकताएं और प्रक्रिया चल रही हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि बड़ी परियोजनाओं में समय लगता है। आगामी बजट में इन योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू करने के लिए पर्याप्त फंड और संसाधन आवंटित किए जाएंगे। हम जनता को भरोसा दिलाते हैं कि डे-बोर्डिंग स्कूल, डिजिटल यूनिवर्सिटी, हेलीपोर्ट और ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शीघ्र ही पूरे होने की प्रक्रिया में हैं।
अंजना धीमान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष

हटवाड़ स्कूल।