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LPG Crisis: कभी कीमतें बढ़ीं, कभी बुकिंग की समयसीमा; युद्ध के दौर में कैसे बदल रहे सिलिंडर से जुड़े नियम?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Mon, 23 Mar 2026 04:56 PM IST
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सार
इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है और देश में एलपीजी गैस का संकट जारी है, जिससे निपटने के लिए सरकार लगातार नए नियम ला रही है। इनमें सत्यापन के आधार पर डिलीवरी से लेकर पीएनजी गैस कनेक्शन्स के आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने से जुड़ी कोशिशें जारी हैं।
एलपीजी संकट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ही पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट शुरू हो गया। हालांकि, यह पूरी स्थिति इस महीने की शुरुआत में तब और बिगड़ गई, जब अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान कर दिया। इसके चलते भारत समेत दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल से लेकर गैस तक की कमी हो गई। भारत ने बीते कुछ वर्षों में कच्चे तेल को लेकर अपने आपूर्ति स्रोतों को बढ़ाया है, लेकिन एलपीजी के मामले में देश की सप्लाई का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों पर ही निर्भर है। खासकर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के मामले में यह निर्भरता काफी ज्यादा है।
ऐसे में जैसे ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया, भारत में एलपीजी संकट मुंह बाये खड़ा हो गया। आलम यह हो गया कि देश के अलग-अलग शहरों में वाणिज्यिक गैस आपूर्ति ठप पड़ने की शिकायतें सामने आने लगीं। इसके साथ ही घरेलू गैस सिलिंडरों की कमी की भी बातें सामने आने लगीं। इन स्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने लगातार संकट का प्रबंधन करने के लिए कुछ नियमों में बदलाव किए हैं।
आइये जानते हैं कि सरकार ने 28 फरवरी के बाद से एलपीजी सप्लाई के संकट को सुलझाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं?
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ऐसे में जैसे ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया, भारत में एलपीजी संकट मुंह बाये खड़ा हो गया। आलम यह हो गया कि देश के अलग-अलग शहरों में वाणिज्यिक गैस आपूर्ति ठप पड़ने की शिकायतें सामने आने लगीं। इसके साथ ही घरेलू गैस सिलिंडरों की कमी की भी बातें सामने आने लगीं। इन स्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने लगातार संकट का प्रबंधन करने के लिए कुछ नियमों में बदलाव किए हैं।
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आइये जानते हैं कि सरकार ने 28 फरवरी के बाद से एलपीजी सप्लाई के संकट को सुलझाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं?
पश्चिम एशिया में युद्ध से भारत क्यों प्रभावित
- भारत मौजूदा समय में अपनी एलपीजी जरूरत का 60 फीसदी आयात करता है। इसमें से 90 फीसदी पश्चिम एशियाई देशों से ही आता है।
- भारत इस वक्त कतर से सबसे ज्यादा एलपीजी आयात करता है। यहां से भारत का एलपीजी आयात 34 फीसदी है। इसके बाद सऊदी अरब, यूएई और कुवैत हैं।
- इन सभी देशों से एलपीजी आयात का रास्ता ईरान द्वारा बंद किए गए होर्मुज जलडमरूमध्य से ही होकर गुजरता है।
इन समस्याओं से निपटने के लिए भारत में अब तक क्या क्या हुआ?
7 मार्च 2026: एस्मा लागू, घरेलू-वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में 7 मार्च से बढ़ोतरी कर दी गई है। देश भर में 14.2 किलोग्राम के घरेलू खाना पकाने वाले गैस सिलिंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की कीमत में भी 115 रुपये की वृद्धि की गई, जिससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर महंगाई का असर पड़ा।इसके चलते दिल्ली में 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 1768.50 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गई। मुंबई में यह कीमत 1720.50 रुपये से बढ़कर 1835 रुपये हो गई है। इसी तरह, कोलकाता में यह कीमत 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गई।
केंद्र सरकार ने भविष्य में एलपीजी की कमी की आशंका जताते हुए 7 मार्च को ही आवश्यक सेवा प्रबंधन कानून, 1955 (एस्मा) लागू कर दिया। इसके तहत एक आदेश जारी किया गया, जिसमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) समेत कई कंपनियों को अपना एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे दिया। इसमें यह भी कहागया कि यह कंपनियां जिस एलपीजी का उत्पादन करेंगी, वह सिर्फ घरेलू सप्लाई के लिए ही निश्चित किया जाएगा।
9 मार्च 2026: एलपीजी सिलिंडर बुकिंग की समयसीमा बढ़ाई गई
केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलिंडर धारकों के लिए बुकिंग की समयसीमा में भी बदलाव किया। जहां पहले एक एलपीजी सिलिंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलिंडर 21 दिन बाद ही बुक करने का नियम था, वहीं 9 मार्च से इस समयसीमा को शहरी क्षेत्रों के लिए बढ़ाकर न्यूनतम 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन कर दिया गया। यानी दो सिलिंडर की बुकिंग में कम से कम 25 दिन का अंतर अनिवार्य रखा गया। सरकार ने इसके जरिए गैस की जमाखोरी रोकने का प्रयास किया।10 मार्च 2026: आवश्यक वस्तु अधिनियम भी लागू
होर्मुज बंद होने और एलपीजी की सप्लाई में कमी आने के बाद केंद्र सरकार ने सिलिंडर की जमाखोरी रोकने और घरेलू गैस संकट को टालने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काला बाजारी की गतिविधियों पर रोक लगाना था।इसके लागू होने के बाद प्राथमिक सेक्टर्स को एलपीजी और अन्य ईंधन की सप्लाई में विशेष प्राथमिकता दी गई। इसका मतलब है कि घरेलू, अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, उद्योग और गैर-महत्वपूर्ण क्षेत्रों की एलपीजी सप्लाई को कुछ प्रतिशत तक काटा गया, ताकि प्राथमिक जरूरतें पूरी की जा सकें।
सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता देने के लिए कुछ औद्योगिक उपयोगों पर प्रतिबंध लगाए हैं। उद्योगों को गैस आपूर्ति में 50 फीसदी की कटौती की गई है। उर्वरक और दूध प्रसंस्करण के लिए गैस आपूर्ति में करीब 40 फीसदी की कटौती की।
सरकार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई थी। ऐसे में ईसीए का लागू होना संकट से निपटने और आम जनता को राहत देने के लिए उठाया गया कदम है। सरकारी तंत्र ने इस कानून के जरिए सिलिंडर की जमाखोरी को भी पकड़ा है।
14 मार्च 2026: पीएनजी कनेक्शन वालों को घरेलू एलपीजी सिलिंडरों पर रोक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी कनेक्शन रखने पर कड़ाई से रोक लगा दी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिसके पास पहले से पीएनजी कनेक्शन है, वह अब किसी भी सरकारी तेल कंपनी से घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं ले सकता। इसके अलावा वे न तो अपना मौजूदा एलपीजी कनेक्शन बरकरार रख सकते हैं और न ही सिलेंडर रीफिल करा सकते हैं। इस नियम के तहत जिन लोगों के पास वर्तमान में पीएनजी और घरेलू एलपीजी दोनों कनेक्शन मौजूद हैं, उन्हें अब अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।15 मार्च 2026: एलपीजी के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन को बनाया गया जरूरी
15 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी घरेलू एलपीजी (एलपीजी) उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (ई-केवाईसी) पूरा करना जरूरी कर दिया। हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 मार्च को स्पष्ट किया कि यह कोई नया निर्देश नहीं है, बल्कि ग्राहकों को ई-केवाईसी पूरी करवाने के प्रयासों का हिस्सा है। सरकार ने साफ किया कि जिनकी ई-केवाईसी पूरी नहीं है, उन्हें भी सिलिंडर की सप्लाई होती रहेगी।विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार का यह कदम इसलिए अहम था, क्योंकि इससे सिलिंडर की सप्लाई सही ग्राहकों के ही की जा सकती थी। यानी जो उपभोक्ता अपने अंगूठे या चेहरे का सत्यापन कराकर गैस बुक कराएंगे, उनके उपभोक्ता होने की बात सुनिश्चित होगी और उनकी जगह सिलिंडर किसी और को सप्लाई यानी डायवर्ट नहीं हो पाएगा, जिससे कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने में मदद मिलेगी।
16 मार्च 2026: सरकार का जोर- एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट हों उपभोक्ता
केंद्र सरकार ने एलपीजी की समस्या से निपटने के लिए राज्य-केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से सीजीडी (सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन) नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक आवेदनों की मंजूरी में तेजी लाने का अनुरोध किया। इसके जरिए सरकार एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड गैस कनेक्शन (पीएनजी) और बायो सीएनजी गैस नेटवर्क पर शिफ्ट करने पर जोर दिया है।दूसरी ओर केंद्र सरकार ने पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सभी लंबित कामों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को मंजूरी प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है। साथ ही सरकारी दफ्तरों, कॉलोनियों और कैंटीनों को भी पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि एलपीजी की खपत कम हो सके।
इसी कड़ी में वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं से एलपीजी के स्थान पर पीएनजी का उपयोग करने का अनुरोध किया गया।
18 मार्च 2026: वाणिज्यिक एलपीजी सप्लाई बढ़ी, पीएनजी कनेक्शन जोड़ने की शर्त
केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति की कमी के मद्देनजर मुश्किल में पड़े होटल-रेस्तरां मालिकों को बड़ी राहत दी। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमर्शियल एलपीजी के आवंटन में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी की पेशकश की, जिससे उनका कुल आवंटन पहले के 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया।20 मार्च 2026: डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड को किया गया अनिवार्य
एलपीजी सिलिंडरों की डिलीवरी को लेकर सरकार ने ओटीपी-आधारित 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (डीएसी) सिस्टम को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया। इस नियम के तहत जब उपभोक्ता एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग करते हैं, तो उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम कोड भेजा जाता है। सिलिंडर की डिलीवरी लेते समय उपभोक्ता यह कोड डिलीवरी कर्मी को बताना होगा, तभी सिलिंडर उन्हें देने का नियम बना दिया गया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि कम से कम 80% एलपीजी डिलीवरी में इस ओटीपी सिस्टम के जरिए की जाएं। कई एजेंसियों ने इस व्यवस्था को पहले से ही शुरू कर दिया था और इसके जरिए सिलिंडर की डिलीवरी 15 मार्च 2026 के 72% से बढ़कर 17 मार्च तक 81% हो गई।
सरकार ने नियम बनाया कि अगर किसी वजह से ग्राहक के मोबाइल पर ओटीपी नहीं आता है, तो ग्राहक अपनी पहचान के रूप में अपना आधार कार्ड दिखाकर भी अपना सिलिंडर ले सकते हैं। इसके साथ ही नियम बनाया गया कि अगर डिस्ट्रीब्यूटर इस सिस्टम का पालन नहीं करते हैं और बिना कोड के सिलेंडर दे देते हैं, तो डिजिटल सिस्टम में वे सिलिंडर एजेंसी के स्टॉक में ही पड़े हुए दिखाई देंगे। इससे घरेलू गैस के कमर्शियल या ब्लैक मार्केट में जाने की तुरंत पहचान हो सकेगी।
21 मार्च 2026: कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बढ़ाने के राज्यों को दी गई अतिरिक्त एलपीजी
सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को निर्देश दिया कि वे होटल, रेस्तरां और कैंटीन जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पीएनजी कनेक्शन देने को प्राथमिकता दें। इसका मकसद कमर्शियल एलपीजी पर दबाव कम करना है, ताकि गैस की उपलब्धता बनी रहे और बाजार में संतुलन कायम रहे। कमर्शियल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एलपीजी सिलिंडर का आवंटन बढ़ा दिया है। राज्यों को अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी दिया गया है। इससे कुल आवंटन 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस अतिरिक्त गैस को होटल, ढाबा, इंडस्ट्रियल कैंटीन और सामुदायिक रसोई जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता से दिया जाएगा।22 मार्च 2026: बीपीसीएल ने दिया नया नियम
एलपीजी सिलिंडरों की किल्लत के बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने एक नई प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन उपभोक्ताओं ने सालाना कोटे के 12 सिलिंडर रिफिल करा लिए हैं, उन्हें नई बुकिंग के लिए हेलो बीपीसीएल एप पर जाकर सवालों के जवाब देने होंगे। बताया गया कि परिवार के सदस्यों की संख्या, आने वाले मेहमानों का विवरण, घर में शादी, भंडारा या कोई अन्य आयोजन है तो उसकी भी जानकारी देनी होगी। तभी सिलिंडर बुक होगा।नियमों के मुताबिक, एक वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच उपभोक्ता सब्सिडी वाले कुल 12 एलपीजी सिलिंडर बुक कर सकते हैं। हालांकि, बिना सब्सिडी वाले तीन सिलिंडरों को जोड़ा जाए तो आप एक साल के भीतर कुल 15 एलपीजी सिलिंडर बुक कर सकते हैं।
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