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Bilaspur News: बहुमत के बाद भाजपा में जिप अध्यक्ष पद को लेकर शुरू हुआ मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Tue, 02 Jun 2026 11:46 PM IST
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सदर, घुमारवीं और नयना देवी क्षेत्र में शुरू हुई लॉबिंग
14 में से 9 सीटें जीतकर भाजपा ने बनाई मजबूत स्थिति
चार सीटें जीतने के बाद सदर की सबसे मजबूत दावेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला परिषद चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब जिले की राजनीति का केंद्र जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव बन गया है। 14 सदस्यीय जिला परिषद में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 9 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा लगभग तय है। अब पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है कि जिला परिषद की कमान किस क्षेत्र और किस चेहरे को सौंपी जाए।
चुनाव परिणामों के बाद सदर, घुमारवीं और श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्रों में अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक लॉबिंग तेज हो गई है। समर्थक अपने-अपने क्षेत्र के निर्वाचित सदस्यों को अध्यक्ष पद का सबसे मजबूत दावेदार बताने में जुट गए हैं। अगले कुछ दिनों में संगठन स्तर पर बैठकों और नेताओं के बीच लगातार संपर्क का दौर चलने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से सदर विधानसभा क्षेत्र सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। सदर से भाजपा समर्थित चार सदस्य जिला परिषद में पहुंचे हैं। जिला परिषद के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि सदर क्षेत्र से एक साथ चार भाजपा समर्थित सदस्य जीतकर आए हैं। इसी आधार पर सदर क्षेत्र के नेता और कार्यकर्ता अध्यक्ष पद पर अपना दावा मजबूत मान रहे हैं। उनका तर्क है कि जिस क्षेत्र ने पार्टी को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है, उसे नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि मुकाबला केवल सदर तक सीमित नहीं है। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र भी अपनी मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण दावेदारी जता रहा है। घुमारवीं क्षेत्र से दो सदस्य जीतकर आए हैं और भाजपा संगठन में इस क्षेत्र का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में घुमारवीं से जुड़े नेताओं की नजर भी अध्यक्ष पद पर टिकी हुई है। श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। यहां से भी भाजपा समर्थित दो सदस्य जिला परिषद में पहुंचे हैं। क्षेत्रीय संतुलन के नजरिए से देखा जाए तो पार्टी नयना देवी क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर सकती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में भी अध्यक्ष पद को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के नौ विजयी सदस्यों में पांच महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए महिला चेहरे की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। यदि संगठन महिला नेतृत्व को प्राथमिकता देता है तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय दावेदारी के साथ व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठन में पकड़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस चुनाव में पांच निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतकर जिला परिषद पहुंचे हैं। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिन्हें भाजपा का बागी माना जा रहा है। लेकिन भाजपा के पास अपने दम पर बहुमत होने के कारण अध्यक्ष पद के चुनाव में उसे किसी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। इससे पार्टी नेतृत्व को फैसला लेने में पूरी स्वतंत्रता मिल गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केवल वर्तमान समीकरणों को देखकर फैसला नहीं करेगी। संगठन आगामी विधानसभा चुनावों, क्षेत्रीय संतुलन, जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ पार्टी के प्रति निष्ठा जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रख सकता है। यही वजह है कि अध्यक्ष पद को लेकर अभी किसी एक नाम पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही। फिलहाल जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सदर, घुमारवीं और श्री नयना देवी क्षेत्रों में दावेदारी और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है। बहुमत भाजपा के पास है, इसलिए फैसला भी पूरी तरह पार्टी संगठन के हाथ में है। अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि जिले की सबसे बड़ी पंचायत की कमान किसे सौंपी जाती है और किस क्षेत्र की राजनीतिक ताकत को प्राथमिकता मिलती है।
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14 में से 9 सीटें जीतकर भाजपा ने बनाई मजबूत स्थिति
चार सीटें जीतने के बाद सदर की सबसे मजबूत दावेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला परिषद चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब जिले की राजनीति का केंद्र जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव बन गया है। 14 सदस्यीय जिला परिषद में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 9 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा लगभग तय है। अब पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है कि जिला परिषद की कमान किस क्षेत्र और किस चेहरे को सौंपी जाए।
चुनाव परिणामों के बाद सदर, घुमारवीं और श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्रों में अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक लॉबिंग तेज हो गई है। समर्थक अपने-अपने क्षेत्र के निर्वाचित सदस्यों को अध्यक्ष पद का सबसे मजबूत दावेदार बताने में जुट गए हैं। अगले कुछ दिनों में संगठन स्तर पर बैठकों और नेताओं के बीच लगातार संपर्क का दौर चलने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से सदर विधानसभा क्षेत्र सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। सदर से भाजपा समर्थित चार सदस्य जिला परिषद में पहुंचे हैं। जिला परिषद के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि सदर क्षेत्र से एक साथ चार भाजपा समर्थित सदस्य जीतकर आए हैं। इसी आधार पर सदर क्षेत्र के नेता और कार्यकर्ता अध्यक्ष पद पर अपना दावा मजबूत मान रहे हैं। उनका तर्क है कि जिस क्षेत्र ने पार्टी को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है, उसे नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि मुकाबला केवल सदर तक सीमित नहीं है। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र भी अपनी मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण दावेदारी जता रहा है। घुमारवीं क्षेत्र से दो सदस्य जीतकर आए हैं और भाजपा संगठन में इस क्षेत्र का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में घुमारवीं से जुड़े नेताओं की नजर भी अध्यक्ष पद पर टिकी हुई है। श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। यहां से भी भाजपा समर्थित दो सदस्य जिला परिषद में पहुंचे हैं। क्षेत्रीय संतुलन के नजरिए से देखा जाए तो पार्टी नयना देवी क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर सकती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में भी अध्यक्ष पद को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के नौ विजयी सदस्यों में पांच महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए महिला चेहरे की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। यदि संगठन महिला नेतृत्व को प्राथमिकता देता है तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय दावेदारी के साथ व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठन में पकड़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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इस चुनाव में पांच निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतकर जिला परिषद पहुंचे हैं। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिन्हें भाजपा का बागी माना जा रहा है। लेकिन भाजपा के पास अपने दम पर बहुमत होने के कारण अध्यक्ष पद के चुनाव में उसे किसी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। इससे पार्टी नेतृत्व को फैसला लेने में पूरी स्वतंत्रता मिल गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केवल वर्तमान समीकरणों को देखकर फैसला नहीं करेगी। संगठन आगामी विधानसभा चुनावों, क्षेत्रीय संतुलन, जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ पार्टी के प्रति निष्ठा जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रख सकता है। यही वजह है कि अध्यक्ष पद को लेकर अभी किसी एक नाम पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही। फिलहाल जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सदर, घुमारवीं और श्री नयना देवी क्षेत्रों में दावेदारी और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है। बहुमत भाजपा के पास है, इसलिए फैसला भी पूरी तरह पार्टी संगठन के हाथ में है। अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि जिले की सबसे बड़ी पंचायत की कमान किसे सौंपी जाती है और किस क्षेत्र की राजनीतिक ताकत को प्राथमिकता मिलती है।