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Bilaspur News: फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी से ऋण लेने के मामले में आरोपी को जमानत
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29 जुलाई को पुलिस ने किया था गिरफ्तार, अब शर्तों के साथ मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ऋण लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में गिरफ्तार घुमारवीं निवासी आरोपी को जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर से जमानत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बुधवार को आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश दिए। आरोपी के खिलाफ एसवीएसीबी बिलासपुर थाने में दो अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने आरोपी पर ऋण लेने के दौरान कथित रूप से धोखाधड़ी करने, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने, जालसाजी के आरोप लगाए थे। आरोपी को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। राज्य पक्ष ने अदालत में दायर जवाब में आरोप लगाया था कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कई करोड़ रुपये के ऋण लेने के लिए एक ही संपत्ति को अलग-अलग समय पर बंधक बनाया। जांच के दौरान बैंकों, वित्तीय संस्थानों, राजस्व विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य विभागों से रिकॉर्ड जुटाए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से ऋण लेते समय आरोपी ने पहले से चल रहे ऋण और देनदारियों की जानकारी छिपाई। आरोप है कि गलत जानकारी देकर ऋण स्वीकृत करवाया गया। जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि आरोपी ने ऋण सुविधा हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया। अभियोजन के अनुसार आरोपी राजा भुट्टो ने स्कूल रिकॉर्ड में फारूक भुट्टो नाम से पढ़ाई की थी, जबकि ऋण के लिए जमा किए गए दसवीं के प्रमाण पत्र में नाम राजा दर्ज है। जांच के दौरान यह सामने आया कि हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से ऋण लेते समय आरोपी ने किसी और बैंक में पहले से चल रहे ऋण और उन खातों से संबंधित ऋण वसूली में लंबित कार्यवाही की जानकारी छिपाई।
राज्य पक्ष ने कहा कि संबंधित शिक्षण संस्थानों और सीबीएसई से सत्यापन में प्रमाणपत्र की पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस ने यह भी तर्क दिया था कि मूल प्रमाणपत्र अभी बरामद नहीं हुआ है। वहीं, आरोपी की ओर से अदालत में कहा गया कि उसने अपनी संपत्ति को वैध तरीके से बंधक रखकर ऋण लिया था। वित्तीय संस्थानों ने दस्तावेजों की जांच के बाद ही ऋण उपलब्ध करवाया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि ऋण वापसी से जुड़ा विवाद सिविल प्रकृति का है, जिसे आपराधिक मामला बनाया गया है। अदालत ने जमानत आदेश में कहा कि मामले में मुख्य साक्ष्य दस्तावेजी हैं, जिन्हें जांच एजेंसी संबंधित बैंकों, विभागों और संस्थानों से जुटा चुकी हैं। आरोपी से पुलिस हिरासत में पर्याप्त पूछताछ हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय मामले के गुण-दोष पर विस्तृत चर्चा नहीं की जा सकती। आरोपी को लगातार हिरासत में रखने के बजाय शर्तों के साथ जमानत देना उचित है। अदालत ने आरोपी को निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी होने तक वह रोजाना एसवीएसीबी बिलासपुर के जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा। इसके अलावा वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएगा और हर पेशी पर अदालत में उपस्थित रहेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी भविष्य में इसी तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है और नया मामला दर्ज होता है तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ऋण लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में गिरफ्तार घुमारवीं निवासी आरोपी को जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर से जमानत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बुधवार को आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश दिए। आरोपी के खिलाफ एसवीएसीबी बिलासपुर थाने में दो अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने आरोपी पर ऋण लेने के दौरान कथित रूप से धोखाधड़ी करने, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने, जालसाजी के आरोप लगाए थे। आरोपी को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। राज्य पक्ष ने अदालत में दायर जवाब में आरोप लगाया था कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कई करोड़ रुपये के ऋण लेने के लिए एक ही संपत्ति को अलग-अलग समय पर बंधक बनाया। जांच के दौरान बैंकों, वित्तीय संस्थानों, राजस्व विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य विभागों से रिकॉर्ड जुटाए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से ऋण लेते समय आरोपी ने पहले से चल रहे ऋण और देनदारियों की जानकारी छिपाई। आरोप है कि गलत जानकारी देकर ऋण स्वीकृत करवाया गया। जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि आरोपी ने ऋण सुविधा हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया। अभियोजन के अनुसार आरोपी राजा भुट्टो ने स्कूल रिकॉर्ड में फारूक भुट्टो नाम से पढ़ाई की थी, जबकि ऋण के लिए जमा किए गए दसवीं के प्रमाण पत्र में नाम राजा दर्ज है। जांच के दौरान यह सामने आया कि हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से ऋण लेते समय आरोपी ने किसी और बैंक में पहले से चल रहे ऋण और उन खातों से संबंधित ऋण वसूली में लंबित कार्यवाही की जानकारी छिपाई।
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राज्य पक्ष ने कहा कि संबंधित शिक्षण संस्थानों और सीबीएसई से सत्यापन में प्रमाणपत्र की पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस ने यह भी तर्क दिया था कि मूल प्रमाणपत्र अभी बरामद नहीं हुआ है। वहीं, आरोपी की ओर से अदालत में कहा गया कि उसने अपनी संपत्ति को वैध तरीके से बंधक रखकर ऋण लिया था। वित्तीय संस्थानों ने दस्तावेजों की जांच के बाद ही ऋण उपलब्ध करवाया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि ऋण वापसी से जुड़ा विवाद सिविल प्रकृति का है, जिसे आपराधिक मामला बनाया गया है। अदालत ने जमानत आदेश में कहा कि मामले में मुख्य साक्ष्य दस्तावेजी हैं, जिन्हें जांच एजेंसी संबंधित बैंकों, विभागों और संस्थानों से जुटा चुकी हैं। आरोपी से पुलिस हिरासत में पर्याप्त पूछताछ हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय मामले के गुण-दोष पर विस्तृत चर्चा नहीं की जा सकती। आरोपी को लगातार हिरासत में रखने के बजाय शर्तों के साथ जमानत देना उचित है। अदालत ने आरोपी को निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी होने तक वह रोजाना एसवीएसीबी बिलासपुर के जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा। इसके अलावा वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएगा और हर पेशी पर अदालत में उपस्थित रहेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी भविष्य में इसी तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है और नया मामला दर्ज होता है तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।
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