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Bilaspur News: बिलासपुर कोर्ट ने चिट्टा मामले में आरोपी को दी जमानत

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 24 May 2026 11:58 PM IST
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Bilaspur court granted bail to the accused in the Chitta case.
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होटल के कमरे से 15.85 ग्राम हेरोइन बरामद होने का मामला
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अदालत ने कहा- जांच पूरी, आरोपी पहली बार अपराध में शामिल, ट्रायल में लगेगा समय

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष अदालत बिलासपुर ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चिट्टा तस्करी के एक मामले में आरोपी को जमानत दे दी है। स्पेशल जज-II बिलासपुर की अदालत ने यह आदेश 23 मई को पारित किया। आरोपी जिला ऊना के रायपुर सहोड़ा क्षेत्र का निवासी है और वह पिछले कई दिनों से न्यायिक हिरासत में चल रहा था।
मामला थाना सदर बिलासपुर में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। पुलिस के अनुसार 3 मई 2026 को पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि लखनपुर स्थित होटल बालाजी के कमरा नंबर 205 में कुछ युवक और युवतियां भारी मात्रा में चिट्टा बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए होटल में छापा मारा। पुलिस कार्रवाई के दौरान कमरे में वीरभान, धीरज कुमार, अनुज संधू और दो नाबालिग मौजूद पाए गए। तलाशी के दौरान कमरे में डबल बेड के तकिए के नीचे से 15.85 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद किया गया। इसके अलावा मौके से इलेक्ट्रॉनिक वजन मापने वाली मशीन भी कब्जे में ली गई। इसके बाद पुलिस ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जमानत याचिका में आरोपी की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और अब मामले की जांच पूरी हो चुकी है। आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि उससे कोई और बरामदगी बाकी नहीं है तथा उसे अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जमानत देना कानून का सामान्य सिद्धांत है जबकि जमानत से इनकार अपवाद की स्थिति होती है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर अपराध में शामिल है और युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या दोबारा नशे के कारोबार में शामिल हो सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। आरोपी के खिलाफ कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बरामद की गई मात्रा व्यावसायिक मात्रा नहीं बल्कि इंटरमीडिएट क्वांटिटी है, इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें इस मामले में लागू नहीं होतीं। अदालत ने कहा कि आरोपी पहली बार अपराध में शामिल पाया गया है और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा।
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