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Bilaspur News: उपायुक्त कार्यालय के बाहर 10 को सांकेतिक धरना देंगे भाखड़ा विस्थापित
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छह दशक बाद भी नहीं सुलझीं विस्थापितों की समस्याएं
भूमि का स्वामित्व, मुफ्त बिजली-पानी, रोजगार, रॉयल्टी और पुल निर्माण समेत कई मांगें अधूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक बल्ह-बलवाणा में पंचायत प्रधान इंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। समिति के प्रधान देशराज शर्मा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। भाखड़ा बांध के कारण विस्थापित हुए हजारों परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं और मांगों पर चर्चा की गई।
प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए सदस्यों ने कहा कि कई बार प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई गईं, लेकिन आज तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भाखड़ा विस्थापितों की मांगों को लेकर 10 अगस्त को उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया जाएगा। धरना सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को मांगों का ज्ञापन भेजा जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज करने के लिए अगली रणनीति बनाई जाएगी। समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने कहा कि 9 अगस्त 1960 को पहली बार भाखड़ा बांध में पानी भरना शुरू हुआ था। उसी दिन से हजारों परिवार अपने घर-बार और जमीनों से बेदखल होकर विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार आज भी भूमि, पुनर्वास, मूलभूत सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों ने समय-समय पर आश्वासन तो दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
बैठक में समिति ने मांग की कि भाखड़ा विस्थापित बहुल क्षेत्रों का शीघ्र बंदोबस्त कर कब्जे वाली भूमि का स्वामित्व विस्थापित परिवारों को दिया जाए। जिन विस्थापितों और प्रभावितों के बिजली एवं पानी के कनेक्शन काटे गए हैं, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए तथा बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाई जाए। गोविंद सागर झील से पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए तथा विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी और अन्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। समिति ने यह भी मांग उठाई कि भाखड़ा परियोजना से उत्पादित बिजली की रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाए। जिन विस्थापित परिवारों को अब तक प्लॉट और भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें शीघ्र भूमि उपलब्ध करवाई जाए। गोविंद सागर क्षेत्र के समग्र विकास और बेहतर आवागमन के लिए बैरी दड़ोला-लूहणु, ज्योरीपत्तन, बवखाल, बुखर-कोसरियां, गाह-चलैला तथा डेहण-नारल पुलों का निर्माण कराया जाए। इसके अलावा मछुआरों के हितों की रक्षा करते हुए उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने, गोविंद सागर झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत पात्र परिवारों को आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए अधिकार पट्टे शीघ्र प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
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बैठक में पंचायत उपप्रधान सतीश, समिति के उपाध्यक्ष बलदेव ठाकुर, महासचिव श्रीराम चौहान, सचिव चिरंजी लाल शर्मा, प्रेम सिंह राणा, बालक राम, नानक चंद, नंदलाल, लेखराम, हरि राम, इंद्र सिंह चौहान, नंद लाल चौहान, मीरा देवी, लीला देवी आदि उपस्थित रहे।
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भूमि का स्वामित्व, मुफ्त बिजली-पानी, रोजगार, रॉयल्टी और पुल निर्माण समेत कई मांगें अधूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक बल्ह-बलवाणा में पंचायत प्रधान इंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। समिति के प्रधान देशराज शर्मा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। भाखड़ा बांध के कारण विस्थापित हुए हजारों परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं और मांगों पर चर्चा की गई।
प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए सदस्यों ने कहा कि कई बार प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई गईं, लेकिन आज तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भाखड़ा विस्थापितों की मांगों को लेकर 10 अगस्त को उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया जाएगा। धरना सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को मांगों का ज्ञापन भेजा जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज करने के लिए अगली रणनीति बनाई जाएगी। समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने कहा कि 9 अगस्त 1960 को पहली बार भाखड़ा बांध में पानी भरना शुरू हुआ था। उसी दिन से हजारों परिवार अपने घर-बार और जमीनों से बेदखल होकर विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार आज भी भूमि, पुनर्वास, मूलभूत सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों ने समय-समय पर आश्वासन तो दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
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बैठक में समिति ने मांग की कि भाखड़ा विस्थापित बहुल क्षेत्रों का शीघ्र बंदोबस्त कर कब्जे वाली भूमि का स्वामित्व विस्थापित परिवारों को दिया जाए। जिन विस्थापितों और प्रभावितों के बिजली एवं पानी के कनेक्शन काटे गए हैं, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए तथा बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाई जाए। गोविंद सागर झील से पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए तथा विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी और अन्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। समिति ने यह भी मांग उठाई कि भाखड़ा परियोजना से उत्पादित बिजली की रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाए। जिन विस्थापित परिवारों को अब तक प्लॉट और भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें शीघ्र भूमि उपलब्ध करवाई जाए। गोविंद सागर क्षेत्र के समग्र विकास और बेहतर आवागमन के लिए बैरी दड़ोला-लूहणु, ज्योरीपत्तन, बवखाल, बुखर-कोसरियां, गाह-चलैला तथा डेहण-नारल पुलों का निर्माण कराया जाए। इसके अलावा मछुआरों के हितों की रक्षा करते हुए उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने, गोविंद सागर झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत पात्र परिवारों को आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए अधिकार पट्टे शीघ्र प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
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बैठक में पंचायत उपप्रधान सतीश, समिति के उपाध्यक्ष बलदेव ठाकुर, महासचिव श्रीराम चौहान, सचिव चिरंजी लाल शर्मा, प्रेम सिंह राणा, बालक राम, नानक चंद, नंदलाल, लेखराम, हरि राम, इंद्र सिंह चौहान, नंद लाल चौहान, मीरा देवी, लीला देवी आदि उपस्थित रहे।