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Bilaspur News: बिना मुआवजा जमीन पर कब्जे का विरोध, प्रभावितों ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
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निष्पक्ष जांच और अवार्ड के बावजूद मुआवजा जारी करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पडगल क्षेत्र के प्रभावित लोगों ने शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिए बिना कब्जा लेने के प्रयास का विरोध करते हुए बुधवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। राजपुरा पंचायत के पूर्व प्रधान सतदेव शर्मा और अधिवक्ता यशपाल शर्मा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में निष्पक्ष जांच करवाने की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में बताया गया कि नौणी से भराड़ीघाट तक बनाए जा रहे फोरलेन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 सितंबर, 2025 को अवार्ड संख्या-7 एडी पारित किया गया था। इसके बावजूद आज तक प्रभावित भूमि मालिकों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया। आरोप लगाया गया कि मुआवजा दिए बिना ही प्रशासन भूमि का कब्जा लेने की कार्रवाई कर रहा है। प्रभावितों का कहना है कि उन्होंने कई बार एसडीएम सदर से मुआवजा जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मामला वर्तमान में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
ज्ञापन में कहा गया कि मुआवजा दिए बिना पुलिस की सहायता से भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के विपरीत है। मुआवजे के भुगतान में हो रही देरी प्रशासनिक लापरवाही, अधिकारों के दुरुपयोग और संभावित अनियमितताओं की ओर संकेत करती है। प्रभावित लोगों ने उपायुक्त से मांग की कि तत्काल निष्पक्ष जांच करवाई जाए, अवार्ड के बावजूद मुआवजा रोके जाने के कारणों का पता लगाया जाए तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3एच(2) के प्रावधानों का निर्धारित समय के भीतर पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस दौरान सेव माउंट संस्था के अध्यक्ष पवन ठाकुर, हिमकोफेड के निदेशक आशीष ठाकुर, नौणी पंचायत की पूर्व प्रधान निर्मला राजपूत सहित अन्य प्रभावित भी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पडगल क्षेत्र के प्रभावित लोगों ने शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिए बिना कब्जा लेने के प्रयास का विरोध करते हुए बुधवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। राजपुरा पंचायत के पूर्व प्रधान सतदेव शर्मा और अधिवक्ता यशपाल शर्मा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में निष्पक्ष जांच करवाने की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में बताया गया कि नौणी से भराड़ीघाट तक बनाए जा रहे फोरलेन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 सितंबर, 2025 को अवार्ड संख्या-7 एडी पारित किया गया था। इसके बावजूद आज तक प्रभावित भूमि मालिकों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया। आरोप लगाया गया कि मुआवजा दिए बिना ही प्रशासन भूमि का कब्जा लेने की कार्रवाई कर रहा है। प्रभावितों का कहना है कि उन्होंने कई बार एसडीएम सदर से मुआवजा जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मामला वर्तमान में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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ज्ञापन में कहा गया कि मुआवजा दिए बिना पुलिस की सहायता से भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के विपरीत है। मुआवजे के भुगतान में हो रही देरी प्रशासनिक लापरवाही, अधिकारों के दुरुपयोग और संभावित अनियमितताओं की ओर संकेत करती है। प्रभावित लोगों ने उपायुक्त से मांग की कि तत्काल निष्पक्ष जांच करवाई जाए, अवार्ड के बावजूद मुआवजा रोके जाने के कारणों का पता लगाया जाए तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3एच(2) के प्रावधानों का निर्धारित समय के भीतर पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस दौरान सेव माउंट संस्था के अध्यक्ष पवन ठाकुर, हिमकोफेड के निदेशक आशीष ठाकुर, नौणी पंचायत की पूर्व प्रधान निर्मला राजपूत सहित अन्य प्रभावित भी मौजूद रहे।
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