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Bilaspur News: जहां बसे हैं वहीं किया जाए भाखड़ा विस्थापित परिवारों का सेटलमेंट
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:29 PM IST
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मंडी मानवा में हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही भूमि सेटलमेंट प्रक्रिया
रिकॉर्ड और कब्जों में अंतर से बढ़ी चिंता, 50 साल से उठा रहे भूमि सेटलमेंट की मांग
भाखड़ा बांध बनने के बाद 1954-55 में कई गांवों के परिवारों को बसाया गया था मंडी मानवा
हाईकोर्ट में जनहित याचिका के बाद शुरू हुई थी भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत नौणी के गांव मंडी मानवा में इन दिनों हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेशानुसार भूमि सेटलमेंट का कार्य तेजी से चल रहा है। इस बीच भाखड़ा विस्थापित सभा मंडी मानवा के अध्यक्ष रमेश चंद कौंडल ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जिन स्थानों पर विस्थापित परिवार पिछले कई दशकों से बसे हुए हैं, वहीं उन्हें स्थायी रूप से सेटल किया जाए।
कौंडल ने कहा कि करीब 50 साल से गांव के लोग भूमि सेटलमेंट की मांग सरकार और प्रशासन के समक्ष उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। मंडी मानवा में बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों ने कई बार हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मुख्यमंत्रियों से मिलकर भी अपनी मांग रखी, लेकिन इसके बावजूद यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। कहा कि उस समय की ग्राम पंचायत लखनपुर, ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा और ग्राम पंचायत नौणी की ग्राम सभाओं में भी कई दर्जन प्रस्ताव पारित किए थे, लेकिन इन पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। बिलासपुर से राजनीति में उभरे कई नेता राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे, फिर भी विस्थापित परिवार अपनी समस्या लेकर उनके पास गुहार लगाते रहे, लेकिन गांव को न्याय नहीं मिल पाया। ग्रामीणों के अनुसार समय के साथ गांव की स्थिति ऐसी हो गई कि यहां भूमि का रिकॉर्ड भी बिखर गया और कई परिवारों के जमीन से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हो गए। इसी संदर्भ में ग्राम पंचायत नौणी की निवर्तमान प्रधान निर्मला राजपूत, पूर्व पंचायत सदस्य रीता देवी, संजू चौहान और पूर्व उप प्रधान शुभम कुमार ने पूर्व सरकार के जनमंच कार्यक्रमों में अलग-अलग आवेदन देकर गांव में भूमि बंदोबस्त की मांग उठाई थी, लेकिन इसके बावजूद विस्थापित परिवार इस सुविधा से वंचित रहे। बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण चंदेल के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्याय के लिए याचिका दायर की। न्यायालय ने इस याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सरकार से जवाब मांगा और बाद में न्यायालय के आदेशानुसार गांव मंडी मानवा में भूमि सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई।
उन्होंने बताया कि 1954-55 में भाखड़ा बांध बनने के कारण बिलासपुर शहर तथा आसपास के कई गांवों पुड, दिनदूयुटी, कशनियूर, तबतन, बलोटा, नदोआ, कुरी घाट, ज्यूरी और ठठली से उजड़े परिवारों को आपात स्थिति में मंडी मानवा में बसाया गया था। उस समय जिला प्रशासन ने इन परिवारों को मकान बनाने के लिए भूमि आवंटित कर कब्जे भी दिए थे। विस्थापित परिवारों ने कर्ज लेकर अपने घर बनाए और वर्षों से वहीं रह रहे हैं। उस समय भूमि के तरतीमे मौके पर न बनाकर कार्यालय में बैठकर तैयार किए गए थे, जिसके कारण अब सेटलमेंट के दौरान कई परिवारों के कब्जे एक स्थान पर हैं, जबकि रिकॉर्ड में जमीन किसी अन्य स्थान पर दर्शाई जा रही है। इससे विस्थापित परिवारों में चिंता का माहौल है। सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि उक्त समय जिन स्थानों पर प्रशासन ने स्वयं विस्थापित परिवारों को बसाया और कब्जे दिए थे, उन्हीं स्थानों पर उन्हें सेटल किया जाए। विभागीय लापरवाही का खामियाजा विस्थापित परिवारों को नहीं भुगतना चाहिए। जहां लोगों ने अपने घर बनाए हैं, वहीं उन्हें स्थायी रूप से बसाया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को दोबारा परेशान न होना पड़े।
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रिकॉर्ड और कब्जों में अंतर से बढ़ी चिंता, 50 साल से उठा रहे भूमि सेटलमेंट की मांग
भाखड़ा बांध बनने के बाद 1954-55 में कई गांवों के परिवारों को बसाया गया था मंडी मानवा
हाईकोर्ट में जनहित याचिका के बाद शुरू हुई थी भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत नौणी के गांव मंडी मानवा में इन दिनों हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेशानुसार भूमि सेटलमेंट का कार्य तेजी से चल रहा है। इस बीच भाखड़ा विस्थापित सभा मंडी मानवा के अध्यक्ष रमेश चंद कौंडल ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जिन स्थानों पर विस्थापित परिवार पिछले कई दशकों से बसे हुए हैं, वहीं उन्हें स्थायी रूप से सेटल किया जाए।
कौंडल ने कहा कि करीब 50 साल से गांव के लोग भूमि सेटलमेंट की मांग सरकार और प्रशासन के समक्ष उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। मंडी मानवा में बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों ने कई बार हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मुख्यमंत्रियों से मिलकर भी अपनी मांग रखी, लेकिन इसके बावजूद यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। कहा कि उस समय की ग्राम पंचायत लखनपुर, ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा और ग्राम पंचायत नौणी की ग्राम सभाओं में भी कई दर्जन प्रस्ताव पारित किए थे, लेकिन इन पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। बिलासपुर से राजनीति में उभरे कई नेता राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे, फिर भी विस्थापित परिवार अपनी समस्या लेकर उनके पास गुहार लगाते रहे, लेकिन गांव को न्याय नहीं मिल पाया। ग्रामीणों के अनुसार समय के साथ गांव की स्थिति ऐसी हो गई कि यहां भूमि का रिकॉर्ड भी बिखर गया और कई परिवारों के जमीन से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हो गए। इसी संदर्भ में ग्राम पंचायत नौणी की निवर्तमान प्रधान निर्मला राजपूत, पूर्व पंचायत सदस्य रीता देवी, संजू चौहान और पूर्व उप प्रधान शुभम कुमार ने पूर्व सरकार के जनमंच कार्यक्रमों में अलग-अलग आवेदन देकर गांव में भूमि बंदोबस्त की मांग उठाई थी, लेकिन इसके बावजूद विस्थापित परिवार इस सुविधा से वंचित रहे। बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण चंदेल के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्याय के लिए याचिका दायर की। न्यायालय ने इस याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सरकार से जवाब मांगा और बाद में न्यायालय के आदेशानुसार गांव मंडी मानवा में भूमि सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई।
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उन्होंने बताया कि 1954-55 में भाखड़ा बांध बनने के कारण बिलासपुर शहर तथा आसपास के कई गांवों पुड, दिनदूयुटी, कशनियूर, तबतन, बलोटा, नदोआ, कुरी घाट, ज्यूरी और ठठली से उजड़े परिवारों को आपात स्थिति में मंडी मानवा में बसाया गया था। उस समय जिला प्रशासन ने इन परिवारों को मकान बनाने के लिए भूमि आवंटित कर कब्जे भी दिए थे। विस्थापित परिवारों ने कर्ज लेकर अपने घर बनाए और वर्षों से वहीं रह रहे हैं। उस समय भूमि के तरतीमे मौके पर न बनाकर कार्यालय में बैठकर तैयार किए गए थे, जिसके कारण अब सेटलमेंट के दौरान कई परिवारों के कब्जे एक स्थान पर हैं, जबकि रिकॉर्ड में जमीन किसी अन्य स्थान पर दर्शाई जा रही है। इससे विस्थापित परिवारों में चिंता का माहौल है। सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि उक्त समय जिन स्थानों पर प्रशासन ने स्वयं विस्थापित परिवारों को बसाया और कब्जे दिए थे, उन्हीं स्थानों पर उन्हें सेटल किया जाए। विभागीय लापरवाही का खामियाजा विस्थापित परिवारों को नहीं भुगतना चाहिए। जहां लोगों ने अपने घर बनाए हैं, वहीं उन्हें स्थायी रूप से बसाया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को दोबारा परेशान न होना पड़े।