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Chamba News: 200 दवाओं का दावा, 35 पर थमा इलाज
Sat, 01 Aug 2026 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:50 PM IST
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मेडिकल कॉलेज चंबा की डिस्पेंसरी में मरीजों को नहीं मिल रहीं सभी दवाइयां
पर्ची लेकर डिस्पेंसरी में जाने वाले मरीजों को दस में से तीन दवाइयां ही मिल रही
जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में दवाइयों की कमी पड़ रही मरीजों पर भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की दवा डिस्पेंसरी में मरीजों को सभी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। मरीज जब पर्ची लेकर वहां जाता है तो उसे दस दवाइयों में से तीन दवाइयां ही दी जाती हैं।
अन्य दवाइयां उन्हें निजी दवा स्टोर से ही लेनी पड़ती हैं। कहने के लिए 200 प्रकार की दवाइयां देने का प्रावधान है लेकिन मौजूदा समय में मरीजों को सिर्फ 35 प्रकार की दवाइयां ही मिल रही हैं। इस वजह से मरीज परेशान हैं। जिले की पौने छह लाख आबादी बीमारी का इलाज करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज पर निर्भर है। यही वजह है कि रोजाना 1000 की ओपीडी रहती है। दवाइयों का स्टॉक खत्म होने से मरीज परेशान हैं।
तीमारदारों में अशोक कुमार, जय सिंह, रवि कुमार, पवन कुमार, जितेंद्र सिंह, योगराज, कमल कुमार, विनोद कुमार और अरविंद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान हैं। मरीजों को दवाइयों से संबंधित जो समस्या झेलनी पड़ रही है, उसका समाधान करवाने में कोई भी अधिकारी और नेता ध्यान नहीं दे रहा है। जो भी बड़ा अधिकारी या नेता चंबा आता है तो वह सीधे सरोल में बन रहे नए भवन का निरीक्षण करने चला जाता है। अस्पताल में मरीजों को पेश आ रही समस्या के बारे में जानने का प्रयास नहीं किया जाता। 10 रुपये पर्ची शुल्क देने के बाद भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि डिस्पेंसरी में दवाइयों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया है। जल्द ही दवाइयों का स्टॉक पहुंच सकता है।
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पर्ची लेकर डिस्पेंसरी में जाने वाले मरीजों को दस में से तीन दवाइयां ही मिल रही
जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में दवाइयों की कमी पड़ रही मरीजों पर भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की दवा डिस्पेंसरी में मरीजों को सभी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। मरीज जब पर्ची लेकर वहां जाता है तो उसे दस दवाइयों में से तीन दवाइयां ही दी जाती हैं।
अन्य दवाइयां उन्हें निजी दवा स्टोर से ही लेनी पड़ती हैं। कहने के लिए 200 प्रकार की दवाइयां देने का प्रावधान है लेकिन मौजूदा समय में मरीजों को सिर्फ 35 प्रकार की दवाइयां ही मिल रही हैं। इस वजह से मरीज परेशान हैं। जिले की पौने छह लाख आबादी बीमारी का इलाज करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज पर निर्भर है। यही वजह है कि रोजाना 1000 की ओपीडी रहती है। दवाइयों का स्टॉक खत्म होने से मरीज परेशान हैं।
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तीमारदारों में अशोक कुमार, जय सिंह, रवि कुमार, पवन कुमार, जितेंद्र सिंह, योगराज, कमल कुमार, विनोद कुमार और अरविंद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान हैं। मरीजों को दवाइयों से संबंधित जो समस्या झेलनी पड़ रही है, उसका समाधान करवाने में कोई भी अधिकारी और नेता ध्यान नहीं दे रहा है। जो भी बड़ा अधिकारी या नेता चंबा आता है तो वह सीधे सरोल में बन रहे नए भवन का निरीक्षण करने चला जाता है। अस्पताल में मरीजों को पेश आ रही समस्या के बारे में जानने का प्रयास नहीं किया जाता। 10 रुपये पर्ची शुल्क देने के बाद भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि डिस्पेंसरी में दवाइयों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया है। जल्द ही दवाइयों का स्टॉक पहुंच सकता है।