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Chamba News: मौसम के उतार-चढ़ाव में उलझे बागवानों के सपने
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 20 Mar 2026 10:44 PM IST
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मार्च में शुरुआती गर्मी ने जगाई पिंक बड की उम्मीद, अब बारिश से मंडराए संकट के बादल
तेज बारिश से फूल और फल गिरने का खतरा, बागवानों की मेहनत पर फिर सकता है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले के भरमौर, चुराह, सलूणी और साहो क्षेत्रों में बागवानों के सपने इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव में उलझ गए हैं।
मार्च की शुरुआती गर्मी ने सेब के पौधों में पिंक बड के रूप में उम्मीद जगाई लेकिन अचानक बदले मौसम, लगातार बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से इन उम्मीदों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। फूल और फल झड़ने की आशंका के बीच युवा बागवानों की मेहनत पर पानी फिरने के आसार बन गए हैं। युवा पीढ़ी रोजगार और आत्मनिर्भरता की उम्मीद लेकर बागवानी की ओर आई थी, उसे अब मौसम ने चुनौती दी है।
लगातार भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी से तापमान गिर गया। इससे पिंक बड स्टेज पर फूल और फल गिरने का खतरा पैदा हो गया है। निचले क्षेत्रों में पानी जम गया है। युवा बागवानों की मेहनत और उम्मीद अब सीधे मौसम की मार का सामना कर रही है।
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चार महीने की मेहनत, रात-रात की निगरानी, सब पर पानी फिरने का डर है। मार्च की तेज बारिश सेब के पौधों के लिए सही नहीं है। -राम सिंह, बागवान
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हमने बागवानी में भविष्य देखा, लेकिन मौसम की मार ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। दिल टूट जाता है जब पौधे कमजोर पड़ते हैं।
-सुनील कुमार, बागवान
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ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ और निचले क्षेत्रों में बारिश ने हमारी मेहनत को चुनौती दी है। हर बागवान की चिंता यही है कि फूल और फल गिर न जाएं।
-बली राज, बागवान
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हमने बागवानी को सपनों की राह माना, लेकिन मौसम ने सिखाया कि प्रकृति के सामने इंसान की ताकत सीमित है। उम्मीदें जीवित हैं, लेकिन डर भी है। -हेम राज, बागवान
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पिंक बड स्टेज पर तापमान में गिरावट बागवानों के लिए सबसे संवेदनशील समय है। वर्तमान में तापमान काफी गिर चुका है। इस कारण सेब के पौधों में निकलने वाले फूलों को नुकसान पहुंच सकता है। -डॉ. प्रमोद शाह, उपनिदेशक, उद्यान विभाग
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तेज बारिश से फूल और फल गिरने का खतरा, बागवानों की मेहनत पर फिर सकता है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले के भरमौर, चुराह, सलूणी और साहो क्षेत्रों में बागवानों के सपने इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव में उलझ गए हैं।
मार्च की शुरुआती गर्मी ने सेब के पौधों में पिंक बड के रूप में उम्मीद जगाई लेकिन अचानक बदले मौसम, लगातार बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से इन उम्मीदों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। फूल और फल झड़ने की आशंका के बीच युवा बागवानों की मेहनत पर पानी फिरने के आसार बन गए हैं। युवा पीढ़ी रोजगार और आत्मनिर्भरता की उम्मीद लेकर बागवानी की ओर आई थी, उसे अब मौसम ने चुनौती दी है।
लगातार भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी से तापमान गिर गया। इससे पिंक बड स्टेज पर फूल और फल गिरने का खतरा पैदा हो गया है। निचले क्षेत्रों में पानी जम गया है। युवा बागवानों की मेहनत और उम्मीद अब सीधे मौसम की मार का सामना कर रही है।
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चार महीने की मेहनत, रात-रात की निगरानी, सब पर पानी फिरने का डर है। मार्च की तेज बारिश सेब के पौधों के लिए सही नहीं है। -राम सिंह, बागवान
हमने बागवानी में भविष्य देखा, लेकिन मौसम की मार ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। दिल टूट जाता है जब पौधे कमजोर पड़ते हैं।
-सुनील कुमार, बागवान
ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ और निचले क्षेत्रों में बारिश ने हमारी मेहनत को चुनौती दी है। हर बागवान की चिंता यही है कि फूल और फल गिर न जाएं।
-बली राज, बागवान
हमने बागवानी को सपनों की राह माना, लेकिन मौसम ने सिखाया कि प्रकृति के सामने इंसान की ताकत सीमित है। उम्मीदें जीवित हैं, लेकिन डर भी है। -हेम राज, बागवान
पिंक बड स्टेज पर तापमान में गिरावट बागवानों के लिए सबसे संवेदनशील समय है। वर्तमान में तापमान काफी गिर चुका है। इस कारण सेब के पौधों में निकलने वाले फूलों को नुकसान पहुंच सकता है। -डॉ. प्रमोद शाह, उपनिदेशक, उद्यान विभाग