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Chamba News: नियमों की रोशनी बुझी तो बे-राह हो गईं सड़कें
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 18 May 2026 10:53 PM IST
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चंबा में जुलाहकड़ी के पास खराब पड़ी ट्रैफिक लाइट।संवाद
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झाड़ियों में गुमनाम हो चुकी हैं चंबा शहर में वाहनों को दिशा दिखाने वाली स्ट्रीट लाइटें
वाहन चालक और राहगीर प्रशासन से कर रहे हैं स्ट्रीट लाइटों को चालू करवाने की मांग
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वाहनों को दिशा दिखाने वाली ट्रैफिक लाइटें खुद झाड़ियों में गुमनाम हो चुकी हैं। सड़क के किनारे खड़े खंभे जो कभी शहर की धड़कनों को संकेतों में बदलते थे, आज समय की परतों में ऐसे दब गए हैं जैसे किसी व्यस्त व्यवस्था की अधूरी याद हों। लाल-हरी रोशनी की जगह अब सिर्फ धूल, झाड़ियां और खामोशी ने कब्जा कर लिया है। यही खामोशी बताती है कि व्यवस्था कभी कितनी जीवंत थी और अब कितनी उपेक्षित हो चुकी है। ऐसे लगता है कि नियमों की रोशनी बुझी तो सड़कें फिर बे-राह हो गई हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दिन : सोमवार, समय : सुबह 10 बजे, स्थान : पुराना बस स्टैंड से लेकर जुलाहकड़ी तक मार्ग। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सड़क के किनारे कोई भी ट्रैफिक लाइट नहीं है। सुबह 10:15 बजे पुराने बस स्टैंड के पास ट्रैफिक लाइटें गायब मिलीं। जिस खंभे पर लाइटें लगी थीं, वहां सिर्फ वही खंभा ही दिख रहा था। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने वाला कक्ष भी ताले में बंद पड़ा है। 10:30 बजे भरमौर चौक से थोड़ा आगे ट्रैफिक लाइटें तो दिखाई दीं लेकिन उनमें लाल, हरी और संतरी रंग की लाइट नहीं दिखी। मकड़ी के जाले और धूल ने लाइटों को अपने आगोश में ले लिया है। न तो उससे कोई ट्रैफिक नियंत्रित हो रही है और न ही काई वाहन चालक इन लाइटों की तरफ देख रहा है। उन्हें पता है कि यहां ट्रैफिक लाइट का सिस्टम खराब हो चुका है। 11 बजे जुलाहकड़ी में ट्रैफिक लाइटें झाड़ियों में लिपटी हुईं दिखाई दीं। बीएसएनएल के तार ट्रैफिक लाइट के खंभे पर बंधे थे। वाहन चालक संजय शर्मा ने बताया कि यह लाइटें कई सालों से खराब पड़ी हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। इस कारण रोजाना जाम लग रहा है। इसी बीच, पैदल गुजर रहे करण महाजन ने बताया कि शहर में ट्रैफिक लाइट सिस्टम फिर से लागू होना चाहिए ताकि वाहन चालकों और राहगीरों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उधर, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि इस सिस्टम को पुन: लागू करने के लिए पुलिस अधीक्षक से बात की जाएगी।
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वाहन चालक और राहगीर प्रशासन से कर रहे हैं स्ट्रीट लाइटों को चालू करवाने की मांग
वाहनों को दिशा दिखाने वाली ट्रैफिक लाइटें खुद झाड़ियों में गुमनाम हो चुकी हैं। सड़क के किनारे खड़े खंभे जो कभी शहर की धड़कनों को संकेतों में बदलते थे, आज समय की परतों में ऐसे दब गए हैं जैसे किसी व्यस्त व्यवस्था की अधूरी याद हों। लाल-हरी रोशनी की जगह अब सिर्फ धूल, झाड़ियां और खामोशी ने कब्जा कर लिया है। यही खामोशी बताती है कि व्यवस्था कभी कितनी जीवंत थी और अब कितनी उपेक्षित हो चुकी है। ऐसे लगता है कि नियमों की रोशनी बुझी तो सड़कें फिर बे-राह हो गई हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दिन : सोमवार, समय : सुबह 10 बजे, स्थान : पुराना बस स्टैंड से लेकर जुलाहकड़ी तक मार्ग। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सड़क के किनारे कोई भी ट्रैफिक लाइट नहीं है। सुबह 10:15 बजे पुराने बस स्टैंड के पास ट्रैफिक लाइटें गायब मिलीं। जिस खंभे पर लाइटें लगी थीं, वहां सिर्फ वही खंभा ही दिख रहा था। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने वाला कक्ष भी ताले में बंद पड़ा है। 10:30 बजे भरमौर चौक से थोड़ा आगे ट्रैफिक लाइटें तो दिखाई दीं लेकिन उनमें लाल, हरी और संतरी रंग की लाइट नहीं दिखी। मकड़ी के जाले और धूल ने लाइटों को अपने आगोश में ले लिया है। न तो उससे कोई ट्रैफिक नियंत्रित हो रही है और न ही काई वाहन चालक इन लाइटों की तरफ देख रहा है। उन्हें पता है कि यहां ट्रैफिक लाइट का सिस्टम खराब हो चुका है। 11 बजे जुलाहकड़ी में ट्रैफिक लाइटें झाड़ियों में लिपटी हुईं दिखाई दीं। बीएसएनएल के तार ट्रैफिक लाइट के खंभे पर बंधे थे। वाहन चालक संजय शर्मा ने बताया कि यह लाइटें कई सालों से खराब पड़ी हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। इस कारण रोजाना जाम लग रहा है। इसी बीच, पैदल गुजर रहे करण महाजन ने बताया कि शहर में ट्रैफिक लाइट सिस्टम फिर से लागू होना चाहिए ताकि वाहन चालकों और राहगीरों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उधर, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि इस सिस्टम को पुन: लागू करने के लिए पुलिस अधीक्षक से बात की जाएगी।
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