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Himachal News: नगर निगम चुनाव की घोषणा, पर मेयर का आरक्षण रोस्टर जारी नहीं; शेड्यूल जारी हुए दो दिन बीते

अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 23 Apr 2026 09:57 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनाव का शेड्यूल जारी हुए दो दिन बीत चुके हैं, मगर सरकार की ओर से तस्वीर साफ न होने के कारण शहर की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक असमंजस की स्थिति है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Municipal Corporation Elections Announced, But Mayor Reservation Roster Not Yet Released
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनाव का शंखनाद तो हो चुका है, लेकिन सियासी बिसात पर सबसे अहम यानी मेयर पद का आरक्षण रोस्टर अब तक गायब है। चुनाव का शेड्यूल जारी हुए दो दिन बीत चुके हैं, मगर सरकार की ओर से तस्वीर साफ न होने के कारण शहर की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक असमंजस की स्थिति है। संभावित प्रत्याशी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह चुनावी मैदान में उतरें या नहीं।

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नगर निगम में मेयर की कुर्सी प्रतिष्ठा का प्रतीक है। कई दिग्गज नेता इसी रोस्टर को ध्यान में रखकर वर्षों से अपने राजनीतिक भविष्य की बिसात बिछा रहे हैं। स्थिति यह है कि यदि मतदान के करीब रोस्टर जारी होता है तो कई दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बिना मेयर रोस्टर के यह चुनाव उस फिल्म की तरह है, जिसका क्लाइमेक्स ही गायब हो। जब तक यह साफ नहीं होता कि शहर का मुखिया किस वर्ग से होगा, तब तक चुनावी जंग में तीखापन नजर नहीं आएगा। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश में अभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का शेड्यूल तक जारी नहीं हुआ है, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति के अध्यक्षों का रोस्टर पहले ही घोषित कर दिया गया है। नगर परिषदों और नगर पंचायतों की स्थिति भी स्पष्ट है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर धर्मशाला, पालमपुर, सोलन और मंडी जैसे महत्वपूर्ण नगर निगमों के लिए ही देरी क्यों की जा रही है?

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निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, 29-30 अप्रैल और 2 मई को नामांकन पत्र भरे जाएंगे, जबकि 17 मई को मतदान होना है। भाजपा ने तो मंगलवार शाम को ही चुनाव कमेटियों का गठन कर विधायकों और पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। लेकिन रोस्टर न होने से प्रत्याशियों के चयन में भी पेच फंसा है। उधर, डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि मेयर पद का आरक्षण रोस्टर अभी तक जारी नहीं हुआ है। इस संबंध में शहरी विकास विभाग के आला अधिकारियों से बात हो चुकी है। 

विभाग का दावा: 10 दिन में जारी होगा रोस्टर
शहरी विकास विभाग ने चार नगर निगमों में महापौर और उपमहापौर के आरक्षण रोस्टर को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग का दावा है कि महापौर (मेयर) पद के लिए रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। आगामी 10 दिनों के भीतर इसे जारी किया जाएगा। मेयर का कार्यकाल पांच साल के लिए निर्धारित किया जाएगा, जिससे नगर निगमों में स्थिरता और दीर्घकालिक योजना निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिन चार नगर निगमों में चुनाव होने हैं, उनमें शिमला, धर्मशाला, पालमपुर और सोलन शामिल हैं। इन निकायों में मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा, जिसे लेकर विभाग स्तर पर मंथन जारी है। रोस्टर के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

नगर निगम सहित निकायों में हटने लगे सरकारी होर्डिंग
हिमाचल के शहरी निकायों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसी के साथ नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में सरकारी होर्डिंग हटने शुरू हो गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगमों और निकायों में लगे सरकारी होर्डिंग, बैनर और प्रचार सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं। चुनाव आचार संहिता लागू होने की संभावना के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है, जिससे किसी भी प्रकार का सरकारी प्रचार चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं, उपलब्धियों या प्रचार से जुड़े होर्डिंग सार्वजनिक स्थानों से हटाए जाएं। एमसी और नगर परिषदों को अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। 
 

बैजनाथ और जवाली के पूर्व पार्षद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
नगर परिषद बैजनाथ-पपरोला और जवाली के चुनाव की घोषणा न होने पर पूर्व पार्षद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को तैयार हैं। बैजनाथ नगर परिषद (नप) के पूर्व पार्षद अमित कपूर और जवाली नप के पूर्व पार्षद रवि कुमार व अमित महाजन ने इसकी पुष्टि की है। नगर पंचायत से नगर परिषद में पदोन्नत किए जाने के बाद इन क्षेत्रों का भौगोलिक दायरा यथावत रखा गया है और केवल प्रशासनिक टाइटल ही बदला गया है। उनका कहना है कि नगर निकाय के हाउस में ही अनापत्ति (एनओसी) को लेकर निर्णय लेने का प्रावधान होता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में आम जनता परेशान हो रही है। पूर्व पार्षदों ने सवाल उठाया है कि इसमें मतदाताओं का क्या कसूर है और उन्हें मतदान की प्रक्रिया से क्यों वंचित रखा जा रहा है। 
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