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ड्राइंग मास्टर भर्ती पेपर लीक: आरोपी का रिजल्ट घोषित करने से हिमाचल हाईकोर्ट का इन्कार

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की ओर से वर्ष 2022 में आयोजित ड्राइंग मास्टर (पोस्ट कोड-980) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में कड़ा रुख बरकरार रखा है। 

Drawing Master Recruitment Paper Leak: Himachal High Court refuses to declare result of accused
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की ओर से वर्ष 2022 में आयोजित ड्राइंग मास्टर (पोस्ट कोड-980) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में कड़ा रुख बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपी उम्मीदवार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपना परीक्षा परिणाम घोषित करने और सफल होने पर नियुक्ति देने की मांग की थी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की जांच चल रही है, तब तक परिणाम घोषित करने के आदेश नहीं दिए जा सकते। याचिकाकर्ता ने अदालत से ड्राइंग मास्टर की भर्ती परीक्षा में रोका गया परिणाम घोषित करने की मांग की थी। 

याचिकाकर्ता ने अदालत को ये बताया

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि यदि वह परीक्षा में सफल पाई जाती हैं, तो उन्हें इस पद पर नियुक्ति दी जाए। जब तक अदालत द्वारा उन्हें दोषी करार नहीं दिया जाता, तब तक कानून के तहत उन्हें निर्दोष माना जाना चाहिए। उनका दावा था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर झूठी है और परीक्षा में प्राप्त मेरिट उनकी अपनी कड़ी मेहनत का नतीजा है। वहीं राज्य सरकार और विजिलेंस की ओर से अदालत में पेश किए गए तथ्यों के तहत बताया गया कि यह मामला सीधे तौर पर पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

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क्या है पूरा मामला

3 मार्च 2023 को राज्य विजिलेंस पुलिस स्टेशन हमीरपुर में आईपीसी की धारा 420, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उमा आजाद, उनके बेटे निखिल आजाद और उम्मीदवार सुनीता देवी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। एसआईटी की जांच में कॉल डिटेल्स से पता चला कि परीक्षा 8 अक्तूबर 2022 से पहले ये तीनों लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। विजिलेंस जांच के अनुसार याचिकाकर्ता ने 3 अक्तूबर 2022 को अपने एसबीआई खाते से 50,000 रुपये निकाले और 5 अक्तूबर को यह रकम निखिल आजाद के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की।आरोप है कि इस रकम के बदले एचपीएसएससी में तैनात उमा आजाद ने परीक्षा से पहले ही याचिकाकर्ता को प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया था।

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टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को किया खारिज

इसी वजह से याचिकाकर्ता सामान्य वर्ग के 400 उम्मीदवारों की मेरिट सूची में 28वां स्थान हासिल करने में सफल रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पर लगे आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने कहा कि एफआईआर का सीधा संबंध उसी भर्ती प्रक्रिया (ड्राइंग मास्टर) से है, जिसमें याचिकाकर्ता ने भाग लिया था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच और अदालती कार्रवाई का अंतिम फैसला आने तक ड्राइंग मास्टर का एक पद पहले ही खाली रखा गया है। इन परिस्थितियों में अदालत अधिकारियों को परिणाम घोषित करने या नियुक्ति देने का परमादेश जारी नहीं कर सकती। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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