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हिमाचल प्रदेश: घर बहे, जमीन गई... दो साल बाद भी अधूरी है राहत की कहानी; तीसरे मानसून से पहले बढ़ी चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन/बद्दी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 23 Jun 2026 10:51 AM IST
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सार
जुलाई 2023 की आपदा के दो साल बाद भी सोलन और बद्दी के कई प्रभावित परिवार स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवार आज भी किराये के मकानों में रह रहे हैं। सरकार की ओर से मिले तीन लाख रुपये किराये और शुरुआती निर्माण में खर्च हो गए, जबकि जमीन और पूरा मुआवजा अब तक नहीं मिला। पढ़ें पूरी खबर...
आपदा के बाद तीसरा मानसून, लेकिन प्रभावितों की जिंदगी अब भी पटरी पर नहीं
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
आपदा के बाद तीसरी मानसून आने को तैयार है। लेकिन जुलाई 2023 में आई आपदा के प्रभावितों की मुश्किलें बरकरार हैं। कुछ परिवारों के हालात ऐसे हैं कि सरकार ने मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये दिए, लेकिन वे किराया देने में खर्च हो गए। अब मकान बनाना तो दूर, दिहाड़ी लगाकर परिवार को पाल रहे हैं।
सोलन शहर के शामती और दून के सौड़ी में आपदा से दर्जनों घर तबाह हो गए थे। कई घरों में दरारें आई थीं, तो कई पूरी तरह से टूट गए थे। सरकार ने उस समय मुआवजा और जमीन देने का वादा किया था। मगर आज तक कुछ प्रभावितों को न तो जमीन मिल पाई है और मुआवजा भी केवल तीन लाख रुपये ही दिया गया। इससे न तो घर की छतें लग पाईं और न ही दीवारों पर प्लास्टर हो पाया।
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सोलन के शामती और दून के सौड़ी पंचायत के नवांनगर माजरू जुलाई 2023 में जमीन धंसने से पूरी तरह से तबाह हो गया था। शामती में करीब 20 घरों में दरारें आई थीं, इसमें 2025 में सरकार ने 2-3 बिस्वा जमीन तो दे दी, मगर घर बनाने के लिए पूरा पैसा नहीं दिया। कई लोग आज भी किराए के मकानों में गुजर-बसर कर रहे हैं। जिनके पास अपनी जमीनें थीं, उन्हें केवल तीन लाख रुपये दिए, जिससे उनकी छतें तक नहीं बन पाईं।
दूसरी ओर दून के सौड़ी गांव के सात परिवार आज भी किराए के मकान में रह कर मजदूरी कर रहे हैं। इन लोगों की उपजाऊ जमीन भूमि कटाव से खड्ड में समा गई है। जहां पर जमीन थी, वह जगह पहाड़ में तब्दील हो गई है। गांव में संजय, रमेश, सुखराम, चेपूराम, मान सिंह, चमन व यशोदा के परिवार रहते थे। वर्तमान में ये किराए पर रह रहे हैं। सरकार की ओर से इन लोगों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई, लेकिन अभी तक इन्हें जमीन नहीं मिल पाई है।
नवांनगर निवासी संजय कुमार ने कहा कि किराए के मकान में रह रहे हैं। सुखराम बद्दी साई मार्ग पर भूपनगर के साथ पुल के समीप कमरे में रहते हैं। चेपू राम व मान सिंह दसोरा माजरा व यशोदा भटोली खुर्द में रह रही हैं। शामती निवासी मनीष ने कहा कि उनके घर के तीन कमरे टूट गए थे। सरकार ने सात लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन तीन लाख रुपये ही मिल पाए। इसमें डेढ़ लाख रुपये घर के पीछे डंगा लगाने के लिए खर्च हो गए और बचे हुए पैसों से केवल दो कमरे ही बन पाए। रसोईघर पर छत नहीं लग पाई।
शामती निवासी सोहन लाल ने कहा कि पहले साईं मंदिर से होने से आने-जाने का रास्ता बना हुआ था, लेकिन आपदा के बाद से अब तक कोई रास्ता नहीं है। उधर, बद्दी के तहसीलदार सतेंद्र जीत ने बताया कि प्रशासन ने प्रभावितों के लिए तीन स्थानों पर जमीन देखी। वर्तमान में झाड़माजरी में जमीन देखी है। कुछ लोग यहां पर आने को तैयार हो गए हैं लेकिन कुछ भटोली कलां में जमीन देने की मांग पर अड़े हैं। यहां जमीन नहीं मिल रही।
शामती निवासी सोहन लाल ने कहा कि पहले साईं मंदिर से होने से आने-जाने का रास्ता बना हुआ था, लेकिन आपदा के बाद से अब तक कोई रास्ता नहीं है। उधर, बद्दी के तहसीलदार सतेंद्र जीत ने बताया कि प्रशासन ने प्रभावितों के लिए तीन स्थानों पर जमीन देखी। वर्तमान में झाड़माजरी में जमीन देखी है। कुछ लोग यहां पर आने को तैयार हो गए हैं लेकिन कुछ भटोली कलां में जमीन देने की मांग पर अड़े हैं। यहां जमीन नहीं मिल रही।