{"_id":"6a3986b9aa5f34a3b6076acf","slug":"kunihar-hospital-reduced-to-a-mere-referral-center-patients-forced-to-rush-to-shimla-for-orthopedic-treatment-solan-news-c-176-1-ssml1040-172240-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: रेफरल सेंटर बनकर रह गया कुनिहार अस्पताल, हड्डी रोग के इलाज के लिए शिमला की दौड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: रेफरल सेंटर बनकर रह गया कुनिहार अस्पताल, हड्डी रोग के इलाज के लिए शिमला की दौड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
15 हजार की आबादी के लिए न स्त्री और न ही शिशु रोग विशेषज्ञ का पद सृजित, चार डॉक्टर पद खाली
अस्पताल में तीन विधानसभा क्षेत्रों की दर्जनों पंचायतों के लोग आते हैं इलाज के लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। अर्की, कसौली और सोलन विधानसभा क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों के लिए प्रमुख कुनिहार सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य आवश्यक स्टाफ की भारी कमी है। इससे मरीजों को उपचार के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 15 हजार की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर हैं, मगर चिकित्सकों व उपकरणों के अभाव से यह अस्पताल रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। अस्पताल में डॉक्टरों के सात पद स्वीकृत हैं। इनमें से चार पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्त्री रोग, शिशु रोग, त्वचा रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञ का कोई पद ही आज तक सृजित नहीं किए गए हैं। वर्तमान में केवल एक सर्जन ही अपनी सेवाएं दे रहा है। एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी मरीजों को सबसे अधिक खल रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त चल रहा है। प्रतिदिन 100 से 150 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ न होने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है।
डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी
फार्मासिस्ट के तीन स्वीकृत पदों में से एक रिक्त है, जबकि एक फार्मासिस्ट लंबे अवकाश पर है। उपलब्ध स्टाफ को भी कई बार अन्य अस्पतालों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है, जिससे दूसरे अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी लंबे समय से बंद पड़ी है और मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने सोलन या निजी क्लीनिकों में जाना पड़ता है।
मरीजों को भटकना पड़ रहा दूर
लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। अकसर इलाज के लिए मरीजों को करीब 40 किलोमीटर दूर सोलन और 42 किलोमीटर दूर शिमला जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें समय और धन दोनों की अतिरिक्त मार झेलनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से भी मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। अस्पताल में स्थायी सफाई कर्मचारियों का अभाव भी स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
विज्ञापन
केस स्टडी-1
15 जून को मीना के सिर में चोट लगने के कारण परिजन उन्हें कुनिहार अस्पताल में उपचार के लिए लेकर पहुंचे। उनका एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाना था, लेकिन अस्पताल में उन्हें दोनों ही सुविधाएं नहीं मिल पाई। अस्पताल से केवल प्राथमिक उपचार देकर उन्हें शिमला आईजीएमसी रेफर करना पड़ा।
केस स्टडी-2
20 जून को निकी कुमारी को छाती में तेज दर्द हुई, ऐसे में परिजन उन्हें उपचार के लिए कुनिहार अस्पताल में लेकर आए। डॉक्टरों ने जांच के बाद हार्ट अटैक बताया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें भी उपचार के लिए शिमला भेजना पड़ा।
कोट
रिक्त पदों का मामला सरकार व विभाग के समक्ष उठाया जाता रहा है। जैसे ही चिकित्सकों के पद भरे जाएंगे यहां पर कमी दूर कर दी जाएगी। फार्मासिस्ट के पद भरने के लिए भी सरकार को लिखा गया है।
डॉ. अजय पाठक,मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन
अस्पताल में तीन विधानसभा क्षेत्रों की दर्जनों पंचायतों के लोग आते हैं इलाज के लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। अर्की, कसौली और सोलन विधानसभा क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों के लिए प्रमुख कुनिहार सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य आवश्यक स्टाफ की भारी कमी है। इससे मरीजों को उपचार के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 15 हजार की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर हैं, मगर चिकित्सकों व उपकरणों के अभाव से यह अस्पताल रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। अस्पताल में डॉक्टरों के सात पद स्वीकृत हैं। इनमें से चार पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्त्री रोग, शिशु रोग, त्वचा रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञ का कोई पद ही आज तक सृजित नहीं किए गए हैं। वर्तमान में केवल एक सर्जन ही अपनी सेवाएं दे रहा है। एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी मरीजों को सबसे अधिक खल रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त चल रहा है। प्रतिदिन 100 से 150 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ न होने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है।
डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी
फार्मासिस्ट के तीन स्वीकृत पदों में से एक रिक्त है, जबकि एक फार्मासिस्ट लंबे अवकाश पर है। उपलब्ध स्टाफ को भी कई बार अन्य अस्पतालों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है, जिससे दूसरे अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी लंबे समय से बंद पड़ी है और मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने सोलन या निजी क्लीनिकों में जाना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मरीजों को भटकना पड़ रहा दूर
लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। अकसर इलाज के लिए मरीजों को करीब 40 किलोमीटर दूर सोलन और 42 किलोमीटर दूर शिमला जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें समय और धन दोनों की अतिरिक्त मार झेलनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से भी मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। अस्पताल में स्थायी सफाई कर्मचारियों का अभाव भी स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
केस स्टडी-1
15 जून को मीना के सिर में चोट लगने के कारण परिजन उन्हें कुनिहार अस्पताल में उपचार के लिए लेकर पहुंचे। उनका एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाना था, लेकिन अस्पताल में उन्हें दोनों ही सुविधाएं नहीं मिल पाई। अस्पताल से केवल प्राथमिक उपचार देकर उन्हें शिमला आईजीएमसी रेफर करना पड़ा।
केस स्टडी-2
20 जून को निकी कुमारी को छाती में तेज दर्द हुई, ऐसे में परिजन उन्हें उपचार के लिए कुनिहार अस्पताल में लेकर आए। डॉक्टरों ने जांच के बाद हार्ट अटैक बताया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें भी उपचार के लिए शिमला भेजना पड़ा।
कोट
रिक्त पदों का मामला सरकार व विभाग के समक्ष उठाया जाता रहा है। जैसे ही चिकित्सकों के पद भरे जाएंगे यहां पर कमी दूर कर दी जाएगी। फार्मासिस्ट के पद भरने के लिए भी सरकार को लिखा गया है।
डॉ. अजय पाठक,मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन