{"_id":"69b805ee17d956bbc7032876","slug":"the-issue-of-low-credit-deposit-ratio-in-hamirpur-resonated-in-the-lok-sabha-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1004-186835-2026-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: लोकसभा में गूंजा हमीरपुर में कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: लोकसभा में गूंजा हमीरपुर में कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 17 Mar 2026 06:59 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रश्नकाल में बैंकों के कम ऋण वितरण के मुद्दे को उठाया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया और उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हमीरपुर जिले के कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में गूंजा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान जिले में बैंकों की ओर से कम ऋण वितरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने देश में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति, क्षेत्रीय असंतुलन और ऋण वसूली न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
इस पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तर देते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर जिले की एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात मात्र 23.39 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम अनुपातों में से एक है। इसका अर्थ यह है कि जिले के लोग बैंकों में पर्याप्त जमा करते हैं, लेकिन उसी अनुपात में उन्हें ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे स्थानीय किसानों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को वित्तीय अवसरों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
उन्होंने वित्त मंत्री से यह जानना चाहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है, विशेषकर हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में क्षेत्रीय असंतुलन एक वास्तविक चुनौती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से केंद्र सरकार और बैंक मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बैंकों को विभिन्न क्षेत्रों में जमा और ऋण वितरण के बीच संतुलन बनाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन और निगरानी की जा रही है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ राज्यों में स्थिति इसके विपरीत है, जहां जमा अधिक है लेकिन ऋण उठाव कम है। ऐसे क्षेत्रों में बैंकों को उद्योग संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं के साथ जोड़कर संवाद बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां जमा की आवश्यकता है वहां पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों और जिन लोगों को ऋण की आवश्यकता है उन्हें समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
Trending Videos
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया और उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हमीरपुर जिले के कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में गूंजा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान जिले में बैंकों की ओर से कम ऋण वितरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने देश में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति, क्षेत्रीय असंतुलन और ऋण वसूली न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
इस पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तर देते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर जिले की एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात मात्र 23.39 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम अनुपातों में से एक है। इसका अर्थ यह है कि जिले के लोग बैंकों में पर्याप्त जमा करते हैं, लेकिन उसी अनुपात में उन्हें ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे स्थानीय किसानों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को वित्तीय अवसरों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने वित्त मंत्री से यह जानना चाहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है, विशेषकर हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में क्षेत्रीय असंतुलन एक वास्तविक चुनौती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से केंद्र सरकार और बैंक मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बैंकों को विभिन्न क्षेत्रों में जमा और ऋण वितरण के बीच संतुलन बनाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन और निगरानी की जा रही है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ राज्यों में स्थिति इसके विपरीत है, जहां जमा अधिक है लेकिन ऋण उठाव कम है। ऐसे क्षेत्रों में बैंकों को उद्योग संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं के साथ जोड़कर संवाद बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां जमा की आवश्यकता है वहां पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों और जिन लोगों को ऋण की आवश्यकता है उन्हें समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।