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Himachal: हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान, शिलाई में अवैध पेड़ कटान पर सरकार से जवाब तलब

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 18 Mar 2026 06:00 AM IST
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सार

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

High Court Takes Strict Cognizance; Seeks Response from Govt on Illegal Felling in Shillai
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में पेड़ों के अवैध कटान पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक अपना जवाब दाखिल करे। जवाब में कोर्ट को बताया जाए कि शिलाई क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान क्यों किया गया है।

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इसके साथ ही क्या इस कटान के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं। इस पूरी कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण क्या थे। इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। तब तक सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने यह कार्रवाई शिलाई के विद्यार्थियों से प्राप्त एक पत्र के आधार पर शुरू की है। विद्यार्थियों ने अपने संचार में इलाके में हो रहे बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान की जानकारी दी थी। याचिका के साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं, जो स्पष्ट रूप से क्षेत्र में हुई वनों की कटाई को दर्शाती हैं।

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हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सरकार
वहीं हाईकोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) और परिवहन निदेशक को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के आदेश को हिमाचल सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। सरकार के स्तर पर इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिवक्ताओं को इस मामले में वर्कआउट करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 29 मई 2023 को जारी उस अधिसूचना को रद कर दिया था, जिसके तहत इन नियुक्तियों को वैध बताया गया था। अदालत ने प्रदेश सरकार को ये भी आदेश दिए हैं कि 31 मार्च तक एसटीए और आरटीए का पुनर्गठन कानून के अनुसार कर पात्र व निष्पक्ष व्यक्तियों को अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाए।

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