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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court Verdict: Land Acquisition Notification for Bhanupalli-Bilaspur-Bairi Railway Line Quashed

हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना रद्द

Thu, 01 Oct 2026 05:45 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला/बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला/बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 01 Oct 2026 05:45 AM IST
सार

 हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-लेह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए बध्यात से बरमाणा तक 11.1 किलोमीटर हिस्से में करीब 538 बीघा निजी भूमि के अधिग्रहण को लेकर जारी प्रारंभिक अधिसूचना रद्द कर दी है। 

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Himachal High Court Verdict: Land Acquisition Notification for Bhanupalli-Bilaspur-Bairi Railway Line Quashed
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-लेह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए बध्यात से बरमाणा तक 11.1 किलोमीटर हिस्से में करीब 538 बीघा निजी भूमि के अधिग्रहण को लेकर जारी प्रारंभिक अधिसूचना रद्द कर दी है। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार ने निर्धारित समय सीमा में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं की। समय बढ़ाने के लिए बार-बार अधिसूचनाएं जारी कीं, लेकिन इनके लिए ठोस कारण नहीं बताए गए। अदालत ने पाया कि सरकार ने बिना ठोस कारण बताए सीमा बढ़ाई, जो भूमि अधिग्रहण कानून का सीधा उल्लंघन है।

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कोर्ट ने तीनों अधिसूचनाओं को भी गैरकानूनी और बदनीयती से जारी माना
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर व अन्य ग्रामीणों की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 29 मार्च 2023 को जारी प्रारंभिक अधिसूचना को भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 19(7) के प्रावधानों के तहत रद्द माना। अदालत ने समय बढ़ाने के लिए 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को जारी तीनों अधिसूचनाओं को भी गैर-कानूनी और बदनीयती से जारी माना और उन्हें रद्द कर दिया।

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यह है पूरा मामला
यह मामला बिलासपुर जिले की सदर तहसील के अपरली भटेड़, बरमाणा और खतेड़ क्षेत्रों में रेलवे लाइन के लिए निजी भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 29 मार्च 2023 को भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अनुसार प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के 12 महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से संबंधित अंतिम घोषणा की जानी थी। हालांकि, निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी करने के बजाय सरकार ने तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के माध्यम से समय बढ़ाया। पहली अधिसूचना 16 मार्च 2024, दूसरी 24 मार्च 2025 और तीसरी 25 मार्च 2026 को जारी की गई। इन अधिसूचनाओं में देरी का कारण केवल इतना बताया गया कि प्रशासनिक परिस्थितियों के कारण पुनर्वास योजना को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल प्रशासनिक कारणों का उल्लेख कर समय सीमा बढ़ाना कानून की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता। सरकार को यह स्पष्ट करना जरूरी था कि पुनर्वास योजना तैयार करने में कौन-सी बाधाएं सामने आईं और किन ठोस कारणों से निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सरकारी रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान पीठ को ऐसे कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। ऐसे में समय बढ़ाने के लिए जारी की गई अधिसूचनाओं को अदालत ने कानून के अनुरूप नहीं माना।

4,200 करोड़ से बढ़कर 13 हजार करोड़ पहुंची लागत
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 4,200 करोड़ रुपये थी। परियोजना में देरी और निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह लागत बढ़कर करीब 7,200 करोड़ रुपये हो गई। अब परियोजना की संशोधित अनुमानित लागत करीब 13 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

11.1 किमी हिस्से का काम और खिंचेगा
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन की कुल लंबाई 63.1 किलोमीटर है। इसमें करीब 50 किलोमीटर लंबी लाइन का काम बिलासपुर तक पूरा हो चुका है। बिलासपुर से बैरी तक 11.1 किलोमीटर हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी थी। हाईकोर्ट की ओर से प्रारंभिक अधिसूचना रद्द किए जाने के बाद इस हिस्से के निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होगी। परियोजना से जुड़े अनुमान के अनुसार निर्माण दो साल और आगे खिसकने पर लागत में करीब एक हजार करोड़ रुपये तक की वृद्धि हो सकती है और काम पूरा होने में कम से कम दो से तीन वर्ष अतिरिक्त लग सकते हैं।

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