Himachal: कैबिनेट रैंक के साथ इन सात ओहदेदारों की लग्जरी गाड़ियां और अन्य सुविधाएं भी होंगी वापस
सरकार की ओर से कैबिनेट रैंक को वापस लेने के बाद सात सरकारी ओहदेदारों से लग्जरी गाड़ियां और अन्य सुविधाएं भी वापस ली जाएंगी।
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हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से कैबिनेट रैंक को वापस लेने के बाद सात सरकारी ओहदेदारों से लग्जरी गाड़ियां और अन्य सुविधाएं भी वापस ली जाएंगी। इनमें से ज्यादातर को करीब ढाई लाख रुपये वेतन मिलता रहा है। इन्हें कैबिनेट मंत्री स्तर के आवास, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, वाहन, स्टाफ आदि की सुविधाएं दी जाती रही हैं। इसके अलावा अलग से स्टाफ भी दिया गया। इनसे अतिरिक्त स्टाफ वापस लेने की प्रक्रिया अधिसूचना जारी होते ही शुरू हो गई।
वेतन में 20 प्रतिशत कटौती होगी
वेतन में 20 प्रतिशत कटौती होगी तो ढाई लाख वेतन लेने वालों से 50-50 हजार रुपये कम दिए जाएंगे। इससे सालाना करीब 50 लाख रुपये से एक करोड़ की बचत संभावित है। बेशक बड़ी बचत नहीं होगी, मगर आर्थिक बदहाली के बीच सरकार ने एक संदेश देने का प्रयास किया है। भविष्य में और कड़े फैसले लेने की भी बात की है। कैबिनेट रैंक प्राप्त इन पदाधिकारियों की बात करें तो मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान को 2.50 लाख रुपये मासिक वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती रही हैं।
सुनील कुमार बिट्टू को मिलते हैं 2.50 लाख प्रति माह
सीएम के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू को 2.50 लाख रुपये प्रति माह और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष नंदलाल और योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया को भी 2.50 लाख रुपये महीना से अधिक मिलता रहा है। विधायक के रूप में भी ये सुविधाएं लेते हैं। राज्य वन निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची 1.50 लाख रुपये महीना और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष आरएस बाली विधायक का ही वेतन लेते हैं।
फॉर्च्यूनर वाहन वापस लिए जा सकते हैं
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार डिजिटल टेक्नोलाजी गोकुल बुटेल एक रुपये वेतन लेते हैं। अब इनके पास महज दो या तीन कर्मियों का ही स्टाफ रहेगा। सचिवालय सेवाएं अधिकारियों में से निजी सचिव या अनुभाग अधिकारी स्तर के अफसर भी इन्हें नहीं मिलेंगे। कैबिनेट रैंक देने के बाद इन्हें दिए गए फॉर्च्यूनर वाहन वापस लिए जा सकते हैं। दो ओहदेदारों को सरकार ने हाल ही में नई फॉर्च्यूनर गाड़ियां खरीदकर दी हैं। नियमानुसार अब ये वापस ली जाएंगी। अब यात्रा के दौरान इन्हें कैबिनेट मंत्री के स्तर के टीए और डीए भी नहीं मिलेंगे।
विधानसभा परिसर में हुई विधायक दल की बैठक बनी राय, हम सब सहमत : भवानी पठानिया
हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में मार्च के शुरू में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस संबंध में राय बन गई थी। यह जानकारी देते हुए योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि इस बारे में सभी विधायक भी सहमत थे कि अगर प्रदेश में आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना है तो इसकी शुरुआत खुद से ही करनी होगी। पठानिया बोले कि इससे जनता में भी अच्छा संदेश जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के बाद इस तरह का फैसला लिया गया है। यह वक्त की जरूरत भी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें विधायक के बराबर वेतन ही मिलता था, लेकिन अब यह घट जाएगा, जबकि वह विधायक भी हैं। आने वाले समय में और भी कड़े फैसले देखने को मिलेंगे।