HP Panchayat Election: सरकारी बाबू ने भरा प्रधान पद का पर्चा, पोल खुली तो नामांकन किया रद्द
प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार के नियमित सरकारी कर्मचारी होने का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड सुरानी की ग्राम पंचायत कोपड़ा में प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार के नियमित सरकारी कर्मचारी होने का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। संबंधित व्यक्ति जल शक्ति विभाग में वरिष्ठ सहायक (सीनियर असिस्टेंट) के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। बीडीओ सुरानी अंशु चंदेल ने कहा कि नामांकन रद्द कर दिया गया है। चुनावी नियमों के मुताबिक कोई भी नियमित सरकारी कर्मचारी पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकता है।
आयोग ने दोबारा स्क्रूटनी कराने के निर्देश जारी किए
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन जांच प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है और दोबारा स्क्रूटनी कराने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार जल शक्ति विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत अनिल कुमार ने पंचायत कोपड़ा के प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। सहायक अभियंता जल शक्ति विभाग ने रिटर्निंग अधिकारी को सूचित किया कि संबंधित कर्मचारी सरकारी सेवा में कार्यरत है और कार्यालय में उपस्थित भी नहीं हो रहा है। इसके बावजूद उसका नाम उम्मीदवारों की सूची में शामिल कर चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिया गया।
दलगांव में उम्मीदवारों के क्रम, चुनाव चिह्न को आयोग ने दी मान्यता
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान रोहडू विकास खंड की पंचायत दलगांव में उम्मीदवारों की सूची और चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े मामले में विशेष आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्याशियों के क्रम और उन्हें आवंटित चुनाव चिह्नों को यथावत रखा जाएगा, जिससे मतदाताओं में किसी प्रकार का भ्रम न फैले।
अनियमितता पर एआरओ को किया है सस्पेंड
आयोग ने दलगांव में प्रधान पद के लिए सहायक रिटर्निंग अधिकारी की ओर से प्रत्याशियों की सूची वर्णानुक्रम के अनुसार तैयार नहीं की गई थी। इसके चलते सहायक रिटर्निंग अधिकारी को निलंबित किया है। आयोग के संज्ञान में यह मामला आने के बाद इसकी समीक्षा की गई। आयोग ने माना कि संबंधित प्रत्याशी पहले ही आवंटित चुनाव चिह्नों के आधार पर चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं। ऐसे में यदि अब चुनाव चिह्न या उम्मीदवारों के क्रम में बदलाव किया जाता है तो मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने न्यायसंगत और निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से जारी फॉर्म-24 में दर्ज प्रत्याशियों के क्रम और चुनाव चिह्नों को वैध घोषित कर दिया है।