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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   IIAS: 'Vande Mataram' echoes in rare 1928 gramophone record; Vice President addresses virtual event.

आईआईएएस: 1928 के दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड में गूंजा वंदे मातरम, उपराष्ट्रपति ने वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित

Fri, 10 Jul 2026 09:07 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Jul 2026 09:07 PM IST
सार

 उद्घाटन के बाद हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड पर सुरक्षित वंदे मातरम की ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग भी सुनी। 

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IIAS: 'Vande Mataram' echoes in rare 1928 gramophone record; Vice President addresses virtual event.
आईआईएएस में रखा दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने किया प्रदर्शनी का शुभारंभ। - फोटो : संवाद

विस्तार

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में शुक्रवार से शुरू हुई 'वंदे मातरम : एक यात्रा' स्थायी प्रदर्शनी में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड, ऐतिहासिक दस्तावेज और अभिलेख पहली बार एक साथ प्रदर्शित किए गए हैं। उद्घाटन के बाद हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड पर सुरक्षित वंदे मातरम की ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग भी सुनी। प्रदर्शनी में 1928 के दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड, शुरुआती रिकॉर्डिंग, विभिन्न रिकॉर्ड लेबल और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं। 27 विषयगत पैनलों के माध्यम से वंदे मातरम की यात्रा को क्रमवार दर्शाया गया है। प्रदर्शनी में ऐसे दस्तावेज भी रखे गए हैं, जो उस दौर की रिकॉर्डिंग तकनीक और गीत के व्यापक प्रसार की जानकारी देते हैं।

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इन रिकॉर्डों और दस्तावेजों को लंबे समय तक एकत्र और संरक्षित करने के बाद पहली बार इस रूप में प्रदर्शित किया गया है। सेंटर फॉर ग्रामोफोन एंड एलाइड स्टडीज के संस्थापक अखिलेश झा ने बताया कि प्रदर्शनी में वंदे मातरम की शुरुआती और अत्यंत दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग भी प्रदर्शित की गई है। एक शताब्दी से अधिक पुराने ये रिकॉर्ड उस दौर के मूल ऑडियो प्रमाण के रूप में आज भी सुरक्षित हैं। आईआईएएस के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदर्शनी अगले छह माह तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी। इसके साथ आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहासकार, शोधकर्ता और शिक्षाविद वंदे मातरम्, दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पक्षों पर चर्चा करेंगे।

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प्रदेश की संस्कृति को दर्शातीं 14 कांगड़ा कलम की पेंटिंग्स
प्रदर्शनी में दुर्लभ कांगड़ा कलम शैली की 14 विशेष पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की गई हैं। इन चित्रों में प्रदेश की संस्कृति और गांवों के जीवन के विभिन्न चरणों को कलात्मक रूप में दर्शाया गया है। पेंटिंग्स में गीत की रचना, राष्ट्रीय चेतना के प्रसार और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को दृश्य रूप दिया गया है। पारंपरिक कांगड़ा चित्रकला शैली में तैयार ये कृतियां प्रदर्शनी को ऐतिहासिक होने के साथ कलात्मक आयाम भी देती हैं और दर्शकों को इतिहास को चित्रों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

पटेल ने सैकड़ों रियासतों को एक संगठित गणराज्य में परिवर्तित किया : उपराष्ट्रपति
 खराब मौसम के कारण उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शिमला नहीं पहुंच सके। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। कहा कि देश इस वर्ष वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। ऐसे अवसर केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि उसके मूल्यों और आदर्शों से दोबारा जुड़ने का अवसर भी हैं। उन्होंने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की सराहना की। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय चिंतन को नई दिशा देते हैं। कहा कि नवाचार किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन किसी महान राष्ट्र की वास्तविक नींव उसके विचारों पर टिकी होती है। स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम ने विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ा। सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वंदे मातरम ने राष्ट्र के जन्म को प्रेरित किया, जबकि सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों को एक संगठित गणराज्य में परिवर्तित किया।

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भारतीय संघवाद के मजबूत प्रवक्ता थे पटेल : राज्यपाल
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार नहीं थे, बल्कि भारतीय संघवाद के मजबूत प्रवक्ता भी थे। कहा कि भारत की भाषायी, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता ही उसके संघीय ढांचे की सबसे बड़ी शक्ति है। सरदार पटेल का योगदान केवल 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक मजबूत और संगठित भारत की आधारशिला रखी। आईआईएएस के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सरदार पटेल ने आधुनिक भारत की प्रशासनिक और संघीय व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। आईआईएएस की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने संस्कृत श्लोक के साथ स्वागत भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत की एकता हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा की देन है। कार्यक्रम में वंदे मातरम् पर आधारित कॉफी टेबल बुक और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर आधारित बहुभाषी काव्य संग्रह का विमोचन भी किया गया। समारोह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी, देशभर से आए शिक्षाविद, राष्ट्रीय अध्येता और विभिन्न क्षेत्रों की अनेक गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।

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