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Kangra News: एंजियोग्राफी मशीन 22 दिन के बाद भी नहीं हुई ठीक
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धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में एंजियोग्राफी मशीन 22 दिन से खराब पड़ी है। यह मशीन अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी वार्ड में स्थापित है।
मशीन ठीक न होने से कार्डियोलॉजी विभाग में पहुंचने वाले मरीज परेशान हैं। इसका असर कांगड़ा सहित आसपास के छह जिलों के मरीजों पर पड़ रहा है।
टांडा मेडिकल कॉलेज क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां हृदय रोग के उपचार के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
एंजियोग्राफी मशीन लंबे समय से बंद रहने से मरीजों की जांच अटक गई है। हृदय रोगियों को समय पर जांच और इलाज नहीं मिल पा रहा है।
एंजियोग्राफी हृदय की धमनियों में रुकावट का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण जांच है। इसके आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति का आकलन करते हैं।
डॉक्टर इसी जांच से आगे के उपचार की योजना बनाते हैं। मशीन के खराब रहने से कार्डियोलॉजी विभाग की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को मशीन ठीक होने का इंतजार करना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में यह जांच बहुत महंगी होती है। टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा के अलावा आसपास के जिलों से भी मरीज पहुंचते हैं।
22 दिनों से मशीन बंद होने से सैकड़ों मरीज प्रभावित हो चुके हैं। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्डियोलॉजी ओपीडी में हर साल 40,000 से अधिक मरीज आते हैं।
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इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन 110 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इसके अलावा विभाग में हर साल 7,000 से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच होती हैं। यहां हर साल 1,000 से अधिक एंजियोप्लास्टी की जाती हैं। संवाद
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मशीन ठीक न होने से कार्डियोलॉजी विभाग में पहुंचने वाले मरीज परेशान हैं। इसका असर कांगड़ा सहित आसपास के छह जिलों के मरीजों पर पड़ रहा है।
टांडा मेडिकल कॉलेज क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां हृदय रोग के उपचार के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
एंजियोग्राफी मशीन लंबे समय से बंद रहने से मरीजों की जांच अटक गई है। हृदय रोगियों को समय पर जांच और इलाज नहीं मिल पा रहा है।
एंजियोग्राफी हृदय की धमनियों में रुकावट का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण जांच है। इसके आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति का आकलन करते हैं।
डॉक्टर इसी जांच से आगे के उपचार की योजना बनाते हैं। मशीन के खराब रहने से कार्डियोलॉजी विभाग की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को मशीन ठीक होने का इंतजार करना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में यह जांच बहुत महंगी होती है। टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा के अलावा आसपास के जिलों से भी मरीज पहुंचते हैं।
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22 दिनों से मशीन बंद होने से सैकड़ों मरीज प्रभावित हो चुके हैं। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्डियोलॉजी ओपीडी में हर साल 40,000 से अधिक मरीज आते हैं।
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इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन 110 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इसके अलावा विभाग में हर साल 7,000 से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच होती हैं। यहां हर साल 1,000 से अधिक एंजियोप्लास्टी की जाती हैं। संवाद