{"_id":"6a4bfcdaac06bca32c0933c7","slug":"claim-of-land-purchase-for-10000-based-on-a-verbal-agreement-dismissed-kangra-news-c-95-1-kng1004-243255-2026-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: जुबानी समझौते पर 10 हजार रुपये में जमीन खरीद का दावा खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: जुबानी समझौते पर 10 हजार रुपये में जमीन खरीद का दावा खारिज
Wed, 08 Jul 2026 12:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 08 Jul 2026 12:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। महज 10 हजार रुपये में 10 मरला जमीन खरीदने के कथित मौखिक समझौते को लेकर दायर दीवानी अपील को देहरा की अदालत ने खारिज कर दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में केवल प्रतिवादी के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई हो जाने मात्र से ही वादी का दावा स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता।
दावा करने वाले पक्ष को अपने आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होता है, जिसमें अपीलकर्ता पूरी तरह असफल रहा। इसके साथ ही अदालत ने सिविल जज देहरा के वर्ष 2020 के निर्णय को बरकरार रखा है। खुंडियां तहसील के एक अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वर्ष 2016 में एक व्यक्ति ने पैसों की जरूरत बताकर उससे 10 हजार रुपये लिए थे और बदले में 10 मरला जमीन बेचने का मौखिक समझौता किया था।
राशि देने के बावजूद प्रतिवादी ने न तो सेल डीड की और न ही जमीन नाम करवाई। अदालत ने पाया कि वादी दावे के समर्थन में कोई लिखित समझौता, दस्तावेज या लेनदेन का प्रमाण पेश नहीं कर सका। गवाहों के बयान भी मेल नहीं खा रहे थे। अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई लेनदेन हुआ होता, तो वादी पंचायत या राजस्व अधिकारियों के पास शिकायत कर सकता था, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दावा करने वाले पक्ष को अपने आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होता है, जिसमें अपीलकर्ता पूरी तरह असफल रहा। इसके साथ ही अदालत ने सिविल जज देहरा के वर्ष 2020 के निर्णय को बरकरार रखा है। खुंडियां तहसील के एक अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वर्ष 2016 में एक व्यक्ति ने पैसों की जरूरत बताकर उससे 10 हजार रुपये लिए थे और बदले में 10 मरला जमीन बेचने का मौखिक समझौता किया था।
विज्ञापन
राशि देने के बावजूद प्रतिवादी ने न तो सेल डीड की और न ही जमीन नाम करवाई। अदालत ने पाया कि वादी दावे के समर्थन में कोई लिखित समझौता, दस्तावेज या लेनदेन का प्रमाण पेश नहीं कर सका। गवाहों के बयान भी मेल नहीं खा रहे थे। अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई लेनदेन हुआ होता, तो वादी पंचायत या राजस्व अधिकारियों के पास शिकायत कर सकता था, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है।
विज्ञापन