{"_id":"6a0b1d3c71f15a55ff0fea77","slug":"congress-loses-its-post-bjp-backed-babita-set-to-become-president-kangra-news-c-95-1-ssml1021-235287-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"शाहपुर नगर पंचायत : कांग्रेस के हाथ से छिटका पद, भाजपा समर्थित बबिता का अध्यक्ष बनना तय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाहपुर नगर पंचायत : कांग्रेस के हाथ से छिटका पद, भाजपा समर्थित बबिता का अध्यक्ष बनना तय
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 19 May 2026 07:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शाहपुर (कांगड़ा)। उपमुख्य सचेतक एवं विधायक केवल सिंह पठानिया के गृह क्षेत्र शाहपुर की नगर पंचायत के त्रिशंकु नतीजों ने स्थानीय सियासत को नया मोड़ दे दिया है। सात वार्डों वाली नगर पंचायत में जनता ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। चुनाव में सबसे अधिक चार सीटों पर आजाद प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को दो और भाजपा को महज एक सीट मिली।
परिणाम के तुरंत बाद पांच पार्षदों ने विधायक केवल सिंह पठानिया से मुलाकात की। इसके दम पर कांग्रेस ने बहुमत का दावा किया है। बहुमत का दावा करने के बावजूद कांग्रेस नगर पंचायत के अध्यक्ष का पद हासिल नहीं कर पाएगी। दरअसल, अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला के लिए आरक्षित है और पूरे सदन में इस वर्ग से जीतने वाली एकमात्र पार्षद भाजपा की बबिता हैं।
ऐसे में संख्या बल कम होने के बावजूद कानूनी रूप से बबिता का अध्यक्ष बनना तय है और कांग्रेस गुट को भी उनके नाम पर सहमति देनी होगी। अध्यक्ष पद की स्थिति साफ होने के बाद अब असली सियासी लड़ाई उपाध्यक्ष पद पर टिक गई है। बहुमत के आंकड़े को देखते हुए आजाद और कांग्रेस समर्थित पार्षद इस कुर्सी के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। पिछले कार्यकाल में शाहपुर में तीन अध्यक्ष बदले गए थे, लेकिन कांग्रेस समर्थित विजय गुलेरिया पूरे पांच साल उपाध्यक्ष रहे थे। ऐसे में इस बार भी इस पद के लिए जोड़-तोड़ तेज होने के आसार हैं।
विज्ञापन
Trending Videos
परिणाम के तुरंत बाद पांच पार्षदों ने विधायक केवल सिंह पठानिया से मुलाकात की। इसके दम पर कांग्रेस ने बहुमत का दावा किया है। बहुमत का दावा करने के बावजूद कांग्रेस नगर पंचायत के अध्यक्ष का पद हासिल नहीं कर पाएगी। दरअसल, अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला के लिए आरक्षित है और पूरे सदन में इस वर्ग से जीतने वाली एकमात्र पार्षद भाजपा की बबिता हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे में संख्या बल कम होने के बावजूद कानूनी रूप से बबिता का अध्यक्ष बनना तय है और कांग्रेस गुट को भी उनके नाम पर सहमति देनी होगी। अध्यक्ष पद की स्थिति साफ होने के बाद अब असली सियासी लड़ाई उपाध्यक्ष पद पर टिक गई है। बहुमत के आंकड़े को देखते हुए आजाद और कांग्रेस समर्थित पार्षद इस कुर्सी के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। पिछले कार्यकाल में शाहपुर में तीन अध्यक्ष बदले गए थे, लेकिन कांग्रेस समर्थित विजय गुलेरिया पूरे पांच साल उपाध्यक्ष रहे थे। ऐसे में इस बार भी इस पद के लिए जोड़-तोड़ तेज होने के आसार हैं।