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Kangra News: एक क्लिक से मिलेगी मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी
Tue, 21 Jul 2026 01:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 21 Jul 2026 01:40 AM IST
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के चारों शक्तिपीठों, सिद्धपीठ व ऐतिहासिक स्मारकों की जानकारी अब पर्यटकों को मोबाइल पर एक क्लिक में मिल सकेगी। इसके लिए पर्यटन विभाग और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) के बीच क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली विकसित करने पर पत्राचार चल रहा है।
योजना के तहत श्री बज्रेश्वरी माता मंदिर कांगड़ा, ज्वालामुखी मंदिर, चिंतपूर्णी धाम और श्रीनयनादेवी शक्तिपीठ और हमीरपुर के दियोटसिद्ध स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर के अलावा अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। इन्हें स्कैन करते ही पर्यटकों के मोबाइल पर उस स्थल का पूरा विवरण उपलब्ध हो जाएगा। क्यूआर कोड में संबंधित मंदिर या स्मारक का इतिहास, धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व, स्थापत्य कला, निर्माण काल और प्रमुख आकर्षणों की जानकारियां होंगी।
इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को गाइड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें प्रामाणिक व विश्वसनीय जानकारी आसानी से मिल सकेगी। यह पहल डिजिटल माध्यम से पर्यटन अनुभव को रोचक बनाने के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी। फिलहाल दोनों विभागों के बीच विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श जारी है। प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद चयनित शक्तिपीठों, मंदिरों और स्मारकों पर चरणबद्ध तरीके से क्यूआर कोड लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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प्रदेश के चारों शक्तिपीठों, सिद्धपीठ व ऐतिहासिक स्मारकों को क्यूआर कोड से जोड़ने के लिए पर्यटन विभाग व इंटैक के बीच पत्राचार चल रहा है। योजना धरातल पर उतरने से पर्यटकों को एक क्लिक पर डिजिटल माध्यम से प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। -विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी, कांगड़ा
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योजना के तहत श्री बज्रेश्वरी माता मंदिर कांगड़ा, ज्वालामुखी मंदिर, चिंतपूर्णी धाम और श्रीनयनादेवी शक्तिपीठ और हमीरपुर के दियोटसिद्ध स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर के अलावा अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। इन्हें स्कैन करते ही पर्यटकों के मोबाइल पर उस स्थल का पूरा विवरण उपलब्ध हो जाएगा। क्यूआर कोड में संबंधित मंदिर या स्मारक का इतिहास, धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व, स्थापत्य कला, निर्माण काल और प्रमुख आकर्षणों की जानकारियां होंगी।
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इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को गाइड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें प्रामाणिक व विश्वसनीय जानकारी आसानी से मिल सकेगी। यह पहल डिजिटल माध्यम से पर्यटन अनुभव को रोचक बनाने के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी। फिलहाल दोनों विभागों के बीच विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श जारी है। प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद चयनित शक्तिपीठों, मंदिरों और स्मारकों पर चरणबद्ध तरीके से क्यूआर कोड लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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प्रदेश के चारों शक्तिपीठों, सिद्धपीठ व ऐतिहासिक स्मारकों को क्यूआर कोड से जोड़ने के लिए पर्यटन विभाग व इंटैक के बीच पत्राचार चल रहा है। योजना धरातल पर उतरने से पर्यटकों को एक क्लिक पर डिजिटल माध्यम से प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। -विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी, कांगड़ा