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जंतर मंतर प्रदर्शन: संसद मार्च के दौरान हिंसा में घायल पुलिस परिजनों का छलका दर्द, बोले- इंसाफ हमें भी चाहिए

Sat, 01 Aug 2026 06:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली-एनसीआर
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली-एनसीआर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 01 Aug 2026 06:37 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस के चार कर्मचारियों के परिवार शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने आए और दर्द साझा करते हुए इंसाफ मांगा। परिजनों ने दावा किया कि हिंसा में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पीड़ित हम भी हैं। इंसाफ हमें भी चाहिए। 

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Families of police personnel injured in violence during the Parliament march voice their anguish
इनकी भी सुने सरकार... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद मार्च के दौरान 20 जुलाई को हिंसा में घायल पुलिसवालों के परिवारों ने भी मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली पुलिस के चार कर्मचारियों के परिवार शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने आए और दर्द साझा करते हुए इंसाफ मांगा। परिजनों ने दावा किया कि हिंसा में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पीड़ित हम भी हैं। इंसाफ हमें भी चाहिए। 

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चारों परिजनों ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस वार्ता कर पीड़ा साझा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 110 से अधिक बैरिकेड, 350 हेलमेट, 300 बॉडी प्रोटेक्टर, 20 लाउडहेलर, 10 हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर, एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, 25 से अधिक सरकारी वाहन और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उनका कहना था कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था के लिए ड्यूटी पर थे और उनके परिवारों की पीड़ा भी सामने लाई जानी चाहिए। 
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संसद में घुस जाते तो चलानी पड़ती गोली : पुलिस महासंघ
दिल्ली पुलिस महासंघ ने निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की। महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने कहा, यदि हालात और अधिक गंभीर हो जाते और संसद, सांसदों या पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर वास्तविक खतरा पैदा होता, तो जरूरत पड़ने पर गोली भी चलानी पड़ सकती थी। कानून ऐसी स्थतिि में बल प्रयोग की अनुमति देता है। 
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घायल देख बेटी डरी...खून से लाल थी वर्दी

  • घायल एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने कहा, जब मेरे घायल पति घर लौटे, तो हम सब भावुक हो गए। उन्हें इस हालत में देखकर 2 साल की बेटी डर गई। उन्होंने कहा, हर वर्दी के पीछे सिर्फ पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार होता है, जो हर दिन चिंता और तनाव के साथ जीता है।
  • एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया, 20 जुलाई की सुबह पति ने फोन पर कहा कि भीड़ बढ़ रही है। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने वाले हैं। शाम सात बजे फोन किया तो वह अस्पताल में थे। पथराव और हमले में उनका हेलमेट भी टूट चुका था।
  • पुलिसवाले की बेटी गंजर ने कहा-मेरे पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेड के पास तैनात थे। वे कहते थे कि प्रदर्शन में शरारती तत्व भी शामिल हो गए। 20 जुलाई की रात 10 बजे जब पिता को उनके साथी घर लेकर आए, उनकी वर्दी खून से लथपथ थी। 
  • घायल एएसआई के बेटे लक्ष्य सिंह बिस्ट ने कहा कि प्रदर्शन में उपद्रवी भी थे। पिता के सिर में गंभीर चोट लगी है। 

उपद्रवियों ने की हिंसा 
परिजनों ने कहा, हमारा मकसद छात्र को दोषी ठहराना नहीं है। प्रदर्शन में असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाकर हालात बिगाड़े, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

केरल में वापस लिए मामले
केरल सरकार ने पेपर लीक के विरोध में आंदोलन में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इनमें आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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