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Kangra News: क्लीयरेंस मिलने के बाद शुरू होगा सिंचाई योजना का काम
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धर्मशाला। ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के लिए स्वीकृत मध्यम सिंचाई योजना का कार्य वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। इसके लिए जलशक्ति विभाग को करीब एक करोड़ रुपये जमा करवाने हैं। राशि जमा होने के बाद योजना का निर्माण शुरू हो जाएगा। प्रदेश सरकार पहले ही ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के लिए 353 करोड़ रुपये की इस सिंचाई योजना को मंजूरी दे चुकी है। योजना के लागू होने से क्षेत्र के 116 गांवों की करीब 2590 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
वर्तमान में ज्वालामुखी क्षेत्र के कई इलाकों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती है। समय पर बारिश होने पर फसल अच्छी होती है, लेकिन बारिश में देरी या कमी होने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। फसलों के खराब होने से किसानों को कई तरह की आर्थिक और व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने 353 करोड़ रुपये की मध्यम सिंचाई योजना को मंजूरी दी है। सिंचाई सुविधा मिलने से क्षेत्र में फसलों की अच्छी पैदावार होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होने की उम्मीद है। हालांकि योजना के निर्माण के दौरान वन और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की संभावना को देखते हुए वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस आवश्यक है। इसके लिए जलशक्ति विभाग ने संबंधित मंत्रालय को फाइल भेजी है। वन क्लीयरेंस के लिए 80 लाख रुपये और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए 20 लाख रुपये जमा किए जाने हैं। फिलहाल मंत्रालय की एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
उधर, जलशक्ति विभाग के एक्सईएन अनीश ठाकुर ने बताया कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस मिलते ही संबंधित सिंचाई योजना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को काफी लाभ मिलेगा।
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वर्तमान में ज्वालामुखी क्षेत्र के कई इलाकों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती है। समय पर बारिश होने पर फसल अच्छी होती है, लेकिन बारिश में देरी या कमी होने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। फसलों के खराब होने से किसानों को कई तरह की आर्थिक और व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने 353 करोड़ रुपये की मध्यम सिंचाई योजना को मंजूरी दी है। सिंचाई सुविधा मिलने से क्षेत्र में फसलों की अच्छी पैदावार होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होने की उम्मीद है। हालांकि योजना के निर्माण के दौरान वन और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की संभावना को देखते हुए वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस आवश्यक है। इसके लिए जलशक्ति विभाग ने संबंधित मंत्रालय को फाइल भेजी है। वन क्लीयरेंस के लिए 80 लाख रुपये और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए 20 लाख रुपये जमा किए जाने हैं। फिलहाल मंत्रालय की एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
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उधर, जलशक्ति विभाग के एक्सईएन अनीश ठाकुर ने बताया कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस मिलते ही संबंधित सिंचाई योजना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को काफी लाभ मिलेगा।