Himachal News: पति की शहादत के बाद कल्पना धीमान ने रचा इतिहास, वीर नारी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक-1
कांगड़ा की वीर नारी कल्पना धीमान ने एसएसबी परीक्षा में वीर नारी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। पति मेजर अंकित धीमान की शहादत के बाद उन्होंने देशसेवा का संकल्प लिया और कड़ी मेहनत से यह मुकाम पाया। अक्तूबर से उनका सैन्य प्रशिक्षण शुरू होगा। पढ़ें पूरी खबर...
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पति की शहादत के बाद भी हौसला नहीं हारने वाली वीर नारी कल्पना धीमान ने अपने अदम्य साहस और मेहनत से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उपतहसील राजा का तालाब की ग्राम पंचायत कुटलाहड़ की कल्पना धीमान ने एसएससी (महिला) नॉन टेक्निकल-124 में प्रवेश के लिए एसएसबी परीक्षा सफलतापूर्वक पास की है। उन्होंने वीर नारी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर इतिहास रच दिया है। कल्पना ने इस परीक्षा के लिए मई 2026 में परीक्षा दी थी। अब अक्तूबर में उनका सैन्य प्रशिक्षण शुरू होगा। इसके साथ ही वह सैन्य वर्दी पहनकर देशसेवा की नई पारी शुरू करेंगी।
पति की शहादत बनी देशसेवा की प्रेरणा
कल्पना के पति मेजर अंकित धीमान अप्रैल 2025 में कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात रहते हुए देश की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। पति की शहादत के बाद कल्पना के सामने जीवन का बेहद कठिन दौर आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
उन्होंने अपने पति के पदचिह्नों पर चलकर देशसेवा करने का संकल्प लिया। कल्पना के अनुसार, मेजर अंकित धीमान हमेशा उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और अपने विजन के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करते थे। पति की यही प्रेरणा उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनी।
एक साल में हासिल किया मुकाम
पति की शहादत के बाद कल्पना ने कठिन परिस्थितियों से उबरते हुए एसएसबी की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर महज एक साल के भीतर उन्होंने एसएसबी परीक्षा में वीर नारी श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया। कल्पना इससे पहले आर्मी स्कूल में शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। अब सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह देशसेवा के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालेंगी।
ससुर ने हर कदम पर बढ़ाया हौसला
कल्पना अपनी सफलता का श्रेय अपने दिवंगत पति मेजर अंकित धीमान की प्रेरणा के साथ-साथ अपने ससुर जनवेद कुमार को भी देती हैं। उन्होंने बताया कि कठिन समय में उनके ससुर ने उनका साथ दिया और हर कदम पर हौसला बढ़ाया। कल्पना का कहना है कि वह अपनी इस उपलब्धि के माध्यम से देश की अन्य वीर नारियों को भी आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। कल्पना धीमान की यह उपलब्धि व्यक्तिगत साहस, संकल्प और मेहनत की मिसाल है। पति को खोने के बेहद कठिन दौर के बाद उन्होंने खुद को संभाला और देशसेवा के उसी रास्ते को चुना, जिस पर उनके पति चलते थे।