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Kangra News: धान की बालियां, फूल निकलते समय बनाए रखें पर्याप्त नमी
Fri, 18 Sep 2026 04:28 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 18 Sep 2026 04:28 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। सितंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि कार्यों को लेकर सलाह जारी की है।
विशेषज्ञों ने किसानों को धान में बालियां और फूल निकलने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करने को कहा है। साथ ही नाइट्रोजन की अंतिम ऊपरी खुराक बाली बनने की प्रारंभिक अवस्था में निर्धारित मात्रा में डालने की सलाह दी है।
कृषि विवि के निदेशक प्रसार डॉ. जनार्दन सिंह ने बताया कि खेत में दो से तीन सेंटीमीटर से अधिक पानी नहीं होना चाहिए। मक्का में नर मंजरी निकलने और दाने की दूधिया अवस्था में नमी की कमी होने पर सिंचाई करें। भुट्टे की ऊपर की पत्तियां सूखने और दाना सख्त होने पर कटाई करें। कटाई के बाद तोरिया की तैयारी शुरू कर दें।
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सोयाबीन और सूरजमुखी में फूल व फली बनने के समय बारिश न होने पर हल्की सिंचाई करें। तिल की पत्तियां पीली होकर गिरने और फलियां पीली पड़ने पर कटाई करें। ज्वार, बाजरा और मक्का की चारे वाली फसलों में भी नमी की कमी होने पर हल्की सिंचाई करें। इस समय बरसीम की बिजाई की जा सकती है।
फूलगोभी की पालम उपहार, इम्प्रूवड जापानीज और मेघा की तैयार पौध लगाएं
वैज्ञानिकों के अनुसार निचले पर्वतीय क्षेत्रों में फूलगोभी की पालम उपहार, इम्प्रूवड जापानीज और मेघा की तैयार पौध लगाएं। फूलगोभी की पछेती किस्म पूसा स्नोवॉल-16, पूसा स्नोवॉल के-एक, पूसा स्नोवॉल के-25 और पूसा शुभ्रा की नर्सरी तैयार करें। बंदगोभी, गांठ गोभी, ब्रोकली और चीनी बंदगोभी की अनुशंसित किस्मों की भी नर्सरी तैयार की जा सकती है। निचले क्षेत्रों में पालक और मेथी तथा निचले एवं मध्यवर्ती क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्मों की बिजाई का भी समय है।
खीरा, घीया, तोरई की करें तुड़ाई
खीरा, घीया, तोरई, करेला और कद्दू के कच्चे और मुलायम फलों की तुड़ाई कर बाजार भेजें। बैंगन में तना एवं फल छेदक तथा करेला में हड्डा बीटल का प्रकोप होने पर अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करें। गोभी वर्गीय सब्जियों की नर्सरी में कमरतोड़ बीमारी से बचाव के लिए बिजाई से पहले क्यारी की मिट्टी को फार्मलीन के घोल से शोधित करें और पौध पर मैनकोजेब व कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें।
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विशेषज्ञों ने किसानों को धान में बालियां और फूल निकलने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करने को कहा है। साथ ही नाइट्रोजन की अंतिम ऊपरी खुराक बाली बनने की प्रारंभिक अवस्था में निर्धारित मात्रा में डालने की सलाह दी है।
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कृषि विवि के निदेशक प्रसार डॉ. जनार्दन सिंह ने बताया कि खेत में दो से तीन सेंटीमीटर से अधिक पानी नहीं होना चाहिए। मक्का में नर मंजरी निकलने और दाने की दूधिया अवस्था में नमी की कमी होने पर सिंचाई करें। भुट्टे की ऊपर की पत्तियां सूखने और दाना सख्त होने पर कटाई करें। कटाई के बाद तोरिया की तैयारी शुरू कर दें।
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सोयाबीन और सूरजमुखी में फूल व फली बनने के समय बारिश न होने पर हल्की सिंचाई करें। तिल की पत्तियां पीली होकर गिरने और फलियां पीली पड़ने पर कटाई करें। ज्वार, बाजरा और मक्का की चारे वाली फसलों में भी नमी की कमी होने पर हल्की सिंचाई करें। इस समय बरसीम की बिजाई की जा सकती है।
फूलगोभी की पालम उपहार, इम्प्रूवड जापानीज और मेघा की तैयार पौध लगाएं
वैज्ञानिकों के अनुसार निचले पर्वतीय क्षेत्रों में फूलगोभी की पालम उपहार, इम्प्रूवड जापानीज और मेघा की तैयार पौध लगाएं। फूलगोभी की पछेती किस्म पूसा स्नोवॉल-16, पूसा स्नोवॉल के-एक, पूसा स्नोवॉल के-25 और पूसा शुभ्रा की नर्सरी तैयार करें। बंदगोभी, गांठ गोभी, ब्रोकली और चीनी बंदगोभी की अनुशंसित किस्मों की भी नर्सरी तैयार की जा सकती है। निचले क्षेत्रों में पालक और मेथी तथा निचले एवं मध्यवर्ती क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्मों की बिजाई का भी समय है।
खीरा, घीया, तोरई की करें तुड़ाई
खीरा, घीया, तोरई, करेला और कद्दू के कच्चे और मुलायम फलों की तुड़ाई कर बाजार भेजें। बैंगन में तना एवं फल छेदक तथा करेला में हड्डा बीटल का प्रकोप होने पर अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करें। गोभी वर्गीय सब्जियों की नर्सरी में कमरतोड़ बीमारी से बचाव के लिए बिजाई से पहले क्यारी की मिट्टी को फार्मलीन के घोल से शोधित करें और पौध पर मैनकोजेब व कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें।