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सुख आश्रय योजना : कांगड़ा में 878 लाभार्थियों को बांटे 2.24 करोड़ रुपये
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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 878 लाभार्थियों को अब 2.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह जानकारी अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा विनय कुमार ने सोमवार को योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक दी।
अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कांगड़ा विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा की गई और नए लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की मंजूरी दी गई। एडीसी विनय कुमार ने बताया कि जिला कांगड़ा में अब तक योजना के तहत 878 लाभार्थियों को 2.24 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य अनाथ और निराश्रित बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन देना है। बैठक में समिति ने विभिन्न श्रेणियों के तहत 28.75 लाख रुपये के मामलों को अनुमोदन प्रदान किया। इनमें गृह निर्माण के 21 मामले, स्टार्टअप के पांंच मामले, जबकि उच्च शिक्षा के 23, व्यावसायिक शिक्षा के तीन और विवाह अनुदान के 12 मामले शामिल हैं।
एडीसी ने बताया कि योजना के तहत वे बच्चे पात्र हैं जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जिनके माता-पिता 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं। एडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर तक इस योजना का प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने सभी आवेदनों को समयबद्ध तरीके से निपटाने पर जोर दिया।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार, जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, डीएसपी निशा कुमारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कांगड़ा विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा की गई और नए लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की मंजूरी दी गई। एडीसी विनय कुमार ने बताया कि जिला कांगड़ा में अब तक योजना के तहत 878 लाभार्थियों को 2.24 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की जा चुकी है।
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उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य अनाथ और निराश्रित बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन देना है। बैठक में समिति ने विभिन्न श्रेणियों के तहत 28.75 लाख रुपये के मामलों को अनुमोदन प्रदान किया। इनमें गृह निर्माण के 21 मामले, स्टार्टअप के पांंच मामले, जबकि उच्च शिक्षा के 23, व्यावसायिक शिक्षा के तीन और विवाह अनुदान के 12 मामले शामिल हैं।
एडीसी ने बताया कि योजना के तहत वे बच्चे पात्र हैं जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जिनके माता-पिता 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं। एडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर तक इस योजना का प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने सभी आवेदनों को समयबद्ध तरीके से निपटाने पर जोर दिया।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार, जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, डीएसपी निशा कुमारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।