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रोमांच बना जानलेवा: कुल्लू की नदियां 12 साल में निगल चुकीं 155 जिंदगियां, फिर भी नहीं रुक रही लापरवाही

संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 11 Jun 2026 12:00 PM IST
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सार

कुल्लू जिले की ब्यास और पार्वती नदियां पिछले 12 वर्षों में 155 से अधिक लोगों की जान ले चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद पर्यटक और स्थानीय लोग नदी किनारों पर उतरने से बाज नहीं आ रहे। बरसात के मौसम और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी तटों से दूर रहने की अपील की है। पढ़ें पूरी खबर...

Adventure Turns Deadly: Kullu Rivers Claim 155 Lives in 12 Years, Tourists Still Ignoring Warnings
रोमांच की धारा में बह रही समझदारी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

इन दिनों जिले में पहुंचे पर्यटक नदियों के किनारे रोमांच की धारा में इस कदर डूबे हैं कि समझदारी बहती नजर आ रही है। इसे अज्ञानता और लापरवाही कहें या फिर मौत को खुला न्योता देने की जिद। ब्यास और पार्वती नदी हर साल कई जिंदगियां निगल रही हैं लेकिन न पर्यटक सबक लेने को तैयार हैं और न ही जिम्मेदार तंत्र अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है।



हादसे होने के बाद कुछ दिन शोर मचता है, चेतावनियां जारी होती हैं और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है। बरसात शुरू होते ही नदियां और खतरनाक हो जाती हैं। बांधों से छोड़ा गया पानी कुछ ही मिनटों में नदी का रौद्र रूप दिखा देता है लेकिन इसके बावजूद लोग सेल्फी और रोमांच के लिए नदी किनारों पर उतरने से बाज नहीं आते।
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यही कारण है कि 12 वर्षों में कुल्लू जिले की नदियां 155 से अधिक पर्यटक और स्थानीय लोगों की जान ले चुकी है परंतु इसके बाद भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। इन दिनों भी ब्यास नदी में मनाली, पलचान से लेकर बजौरा और पार्वती नदी में बरशैणी, मणिकर्ण से लेकर भुंतर जिया तक कई स्थानों में पर्यटक नदी के किनारे उतर रहे हैं। चार दिन पहले मणिकर्ण में पंजाब के पति-पत्नी और बेटे के नदी में बह जाने का वीडियो साफ तौर पर लापरवाही की गवाही दे रहा है।
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पर्यटकों के साथ स्थानीय युवा भी नदी में जान गवां रहे हैं। 29 मई को लगवैली में नदी में नहाने उतरे निखिल नाम के युवक ने अपने दोस्त को बचाने के चक्कर में अपनी जान गवां दी। 5 जून को भुंतर पुराना पुल के पास पंजाब के एक युवक को डूबता देख दोस्त ने छलांग लगा दी और जान गवां दी। ऐसे कई घटनाक्रम है, जो लापरवाही की गवाही दे रहे हैं।

10 से 12 पर्यटकों की हर साल नदी में डूबने से मौत
आंकड़ों के मुताबिक हर साल जिले में औसतन 10 से 12 पर्यटकों की नदी में डूबने से मौत हो रही है। नदी के किनारे सेल्फी लेते समय पर्यटक फिसल रहे हैं और नदी के बहाव में बह रहे हैं।

नदी के किनारे पर्यटक और लोग न उतर सकें, इसको लेकर विभागों को उचित दिशा-निर्देश दिए गए हैं। खासकर बिजली परियोजनाओं के बांध प्रबंधकों को पानी छोड़ने से संबंधित जानकारी आम जन तक पहुंचाने को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खासकर बरसात को लेकर प्रशासन ने तैयारियां कर ली हैं।- अनुराग चंद्र, उपायुक्त कुल्लू

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