{"_id":"69cd5718dfbc7f75b302d762","slug":"beas-will-be-free-from-debristhe-scene-of-devastation-will-stop-kullu-news-c-89-1-klu1002-172776-2026-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: मलबे से आजाद होगी ब्यास...थमेगा तबाही का मंजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: मलबे से आजाद होगी ब्यास...थमेगा तबाही का मंजर
विज्ञापन
विज्ञापन
कुल्लू। बरसों से मलबे में कैद ब्यास नदी अब तबाही नहीं मचाएगी। नदी को फिर से खुलकर बहने का रास्ता देने के लिए प्रशासन ने ड्रेजिंग योजना पर काम तेज कर दिया है। मनाली से बजौरा तक नदी के बीच जमा मलबे को हटाने के लिए 41 साइटों को चिह्नित किया जा रहा है। इन स्थानों पर ड्रेजिंग कर नदी का बहाव सुचारु किया जाएगा, जिससे बाढ़ के दौरान किनारे की बस्तियों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इन साइटों को अंतिम रूप देने के लिए जल्द संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। संबंधित उपमंडलाधिकारी की अध्यक्षता में खनन और वन विभाग के अधिकारी मौके का जायजा लेंगे। निरीक्षण के बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस एक्ट (एफसीए) के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि इससे पहले तीन साइटों के लिए एफसीए के प्रथम चरण की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि नई 41 साइटों का प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार नदी में अनियंत्रित मलबा जल प्रवाह को बाधित करता है। इससे जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और किनारों पर कटाव तेज हो जाता है। यही कारण है कि हर साल ब्यास किनारे बसे गांव और बस्तियां खतरे की जद में आ जाती हैं। वर्ष 1995 से अब तक कई बार ब्यास का रौद्र रूप कुल्लू घाटी में भारी तबाही मचा चुका है।
-- कब कब मचाई तबाही
तीन दशक में ब्यास नदी ने कई बार तबाही मचाई है। वर्ष 1995 में ब्यास ने रौद्र रूप धारण किया था जिसमें 96 दुकानें, 102 घराट तबाह हो गए थे जबकि 19 हजार 300 हेक्टेयर निजी भूमि तहस-नहस हो गई थी। इसके बाद 2005, 2023, 2024 और 2025 में भी बड़े स्तर पर तबाही मचाई।
-- ये स्थान संवेदनशील
मनाली के बाहंग से लेकर बजौरा तक ऐसे कई स्थल हैं, जहां ब्यास नदी ने बाढ़ के दौरान बार-बार नुकसान पहुंचाया है। नुकसान की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों में बाहंग, भुंतर का सब्जी मंडी इलाका, भुंतर ब्रिज, छरुडू, लुगाड भट्टी आदि शामिल हैं। यहां 1995 में नुकसान हुआ था और उसके बाद जब भी नदी में बाढ़ आई, इन स्थानों को क्षति पहुंची है।
ब्यास नदी में जहां-जहां खतरा बना हुआ है, इसके लिए प्रशासन ने ड्रेजिंग की योजना बनाई है। अब तक तीन ड्रेजिंग साइट स्वीकृति के अंतिम चरण में हैं जबकि 41 और साइटों को ड्रेजिंग के लिए चिह्नित किया गया है और इनको अंतिम रूप देने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। इससे काफी हद तक खतरे को कम किया जा सकेगा।
अनुराग चंद्र शर्मा, उपायुक्त कुल्लू।
Trending Videos
विशेषज्ञों के अनुसार नदी में अनियंत्रित मलबा जल प्रवाह को बाधित करता है। इससे जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और किनारों पर कटाव तेज हो जाता है। यही कारण है कि हर साल ब्यास किनारे बसे गांव और बस्तियां खतरे की जद में आ जाती हैं। वर्ष 1995 से अब तक कई बार ब्यास का रौद्र रूप कुल्लू घाटी में भारी तबाही मचा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तीन दशक में ब्यास नदी ने कई बार तबाही मचाई है। वर्ष 1995 में ब्यास ने रौद्र रूप धारण किया था जिसमें 96 दुकानें, 102 घराट तबाह हो गए थे जबकि 19 हजार 300 हेक्टेयर निजी भूमि तहस-नहस हो गई थी। इसके बाद 2005, 2023, 2024 और 2025 में भी बड़े स्तर पर तबाही मचाई।
मनाली के बाहंग से लेकर बजौरा तक ऐसे कई स्थल हैं, जहां ब्यास नदी ने बाढ़ के दौरान बार-बार नुकसान पहुंचाया है। नुकसान की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों में बाहंग, भुंतर का सब्जी मंडी इलाका, भुंतर ब्रिज, छरुडू, लुगाड भट्टी आदि शामिल हैं। यहां 1995 में नुकसान हुआ था और उसके बाद जब भी नदी में बाढ़ आई, इन स्थानों को क्षति पहुंची है।
ब्यास नदी में जहां-जहां खतरा बना हुआ है, इसके लिए प्रशासन ने ड्रेजिंग की योजना बनाई है। अब तक तीन ड्रेजिंग साइट स्वीकृति के अंतिम चरण में हैं जबकि 41 और साइटों को ड्रेजिंग के लिए चिह्नित किया गया है और इनको अंतिम रूप देने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। इससे काफी हद तक खतरे को कम किया जा सकेगा।
अनुराग चंद्र शर्मा, उपायुक्त कुल्लू।