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Kullu News: देव शांगड़ी नाग ने सरयोलसर में किया शाही स्नान
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माता बूढ़ी नागिन से किया मिलन, शक्तियां अर्जित करने की मान्यता
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। रघुपुर घाटी के देवता शांगड़ी नाग ने धार्मिक स्थली एवं माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर का दौरा किया। उन्होंने शुक्रवार सुबह सरयोलसर झील में शाही स्नान किया और शक्तियां अर्जित की।
देवता का नया रथ पिछले वर्ष मई-जून में तैयार हुआ था। इसके बाद यह विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर रघुपुर घाटी की फनौटी, लगौटी और करशैईगाड़ पंचायतों से करीब 300 श्रद्धालु मौजूद रहे। देवता 30 अप्रैल को अपने देवालय बलेहड़ से ढोल-नगाड़ों की थाप पर सरयोलसर के लिए रवाना हुए थे। शाम को देवता माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली पहुंचे, जहां भव्य मिलन हुआ। रात्रि विश्राम मंदिर परिसर में किया गया और कारकूनों, हारियानों और देवलुओं ने रातभर भजन-कीर्तन किया।
शुक्रवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद देवता ने पवित्र झील में शाही स्नान किया। देवलू प्रताप सिंह, सनी कुमार, धर्म सिंह और सेस राम ने बताया कि बलेहड़, फनौटी, दरकू, दांधार, कलारला और क्वाटन सहित कई गांवों के श्रद्धालु इस यात्रा के साक्षी बने। उन्होंने कहा कि देवता शांगड़ी नाग कई वर्षों के बाद सरयोलसर पहुंचे और शाही स्नान के साथ शक्तियां अर्जित कीं। शाम को देवता अपने देवालय बलेहड़ लौट गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। रघुपुर घाटी के देवता शांगड़ी नाग ने धार्मिक स्थली एवं माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर का दौरा किया। उन्होंने शुक्रवार सुबह सरयोलसर झील में शाही स्नान किया और शक्तियां अर्जित की।
देवता का नया रथ पिछले वर्ष मई-जून में तैयार हुआ था। इसके बाद यह विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर रघुपुर घाटी की फनौटी, लगौटी और करशैईगाड़ पंचायतों से करीब 300 श्रद्धालु मौजूद रहे। देवता 30 अप्रैल को अपने देवालय बलेहड़ से ढोल-नगाड़ों की थाप पर सरयोलसर के लिए रवाना हुए थे। शाम को देवता माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली पहुंचे, जहां भव्य मिलन हुआ। रात्रि विश्राम मंदिर परिसर में किया गया और कारकूनों, हारियानों और देवलुओं ने रातभर भजन-कीर्तन किया।
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शुक्रवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद देवता ने पवित्र झील में शाही स्नान किया। देवलू प्रताप सिंह, सनी कुमार, धर्म सिंह और सेस राम ने बताया कि बलेहड़, फनौटी, दरकू, दांधार, कलारला और क्वाटन सहित कई गांवों के श्रद्धालु इस यात्रा के साक्षी बने। उन्होंने कहा कि देवता शांगड़ी नाग कई वर्षों के बाद सरयोलसर पहुंचे और शाही स्नान के साथ शक्तियां अर्जित कीं। शाम को देवता अपने देवालय बलेहड़ लौट गए।
