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संस्कृति को जीवंत करते हैं मेले : यमुना
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बंदरोल जन्माष्टमी मेले का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। बंदरोल में आयोजित दो दिवसीय जन्माष्टमी (ब्रोती) मेले का समापन सोमवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। समापन समारोह में कुल्लू ब्लॉक समिति की अध्यक्ष यमुना ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस दौरान बाबा वीर नाथ के कारदार गोवर्धन ठाकुर, सचिव नंद लाल नेगी सहित मेला कमेटी के अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि को सम्मानित किया।
मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि बंदरोल जन्माष्टमी (ब्रोती) मेले का क्षेत्र में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। मेले के माध्यम से स्थानीय देवी-देवताओं की परंपराओं और संस्कृति को जीवंत रखने के साथ लोगों को आपसी मेल-जोल और भाईचारे का संदेश भी मिलता है। मुख्यातिथि यमुना ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समृद्ध लोक परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। बंदरोल में आयोजित दो दिवसीय जन्माष्टमी (ब्रोती) मेले का समापन सोमवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। समापन समारोह में कुल्लू ब्लॉक समिति की अध्यक्ष यमुना ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस दौरान बाबा वीर नाथ के कारदार गोवर्धन ठाकुर, सचिव नंद लाल नेगी सहित मेला कमेटी के अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि को सम्मानित किया।
मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि बंदरोल जन्माष्टमी (ब्रोती) मेले का क्षेत्र में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। मेले के माध्यम से स्थानीय देवी-देवताओं की परंपराओं और संस्कृति को जीवंत रखने के साथ लोगों को आपसी मेल-जोल और भाईचारे का संदेश भी मिलता है। मुख्यातिथि यमुना ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समृद्ध लोक परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। संवाद
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