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Kullu News: हरिपुर दशहरे की कमान नई पीढ़ी के हाथ
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हरिपुर (कुल्लू)। इस बार हरिपुर दशहरा उत्सव में क्षेत्र के लोगों ने नई परंपरा शुरू की है। खासकर पुरानी परंपरागत संस्कृति के संरक्षण करने के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ठाकुर माधोराय कमेटी की ओर से नई पीढ़ी को चंदावली और होर्न नृत्य करने के लिए दशहरे की पहली सांस्कृतिक संध्या में मौका दिया गया। माधोराय कमेटी के प्रधान चंद्र प्रकाश नेगी ने बताया कि दशहरा में आने वाले समय में हमारी पुरानी परंपरागत संस्कृति को संजोए रखने के लिए कमेटी की ओर से यह पहल की गई है, जिससे नई पीढ़ी को भी हमारी पुरानी संस्कृति को बचाए रखने के लिए तैयार किया जा सके।
गौरतलब है कि चंद्रावली और होर्न नृत्य परंपरागत प्राचीन नृत्य है। यह नृत्य अब घाटी में कुछ ही स्थानों में सिमटकर रह गया है। इसको बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जाने लगी है। लिहाजा, माधोराय कमेटी ने आने वाली पीढ़ी को इस नृत्य से अवगत करवाने के लिए उनकी भागीदारी को तय किया है। इसी कड़ी के तहत हरिपुर दशहरा उत्सव में छोटे-छोट बच्चों ने इन नृत्यों की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी। बच्चों की यह प्रस्तुति लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी।
हरिपुर दशहरा में जहां चंद्रावली और होर्न नृत्य के अलावा छोटा वाणू, बड़ा वाणू, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, देवी रूप, माडू भाई आदि परंपरागत रीति रिवाजों के अनुसार ठाकुर माधोराय दशहरा मैदान में स्थानीय ग्रामीणों की ओर से प्रस्तुत किया जाता है। चंद्रावली नृत्य पहले बड़े लोग ही करते थे लेकिन अब नई पीढ़ी इस परंपरा को निभाने के लिए आगे आ रही है। होर्न नृत्य दशहरे के पहले दिन किया जाता है।
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क्या कहते हैं जानकार
लेखक डॉ. सूरत ठाकुर का कहना है कि हरिपुर दशहरा उत्सव में नई पीढ़ी को जो चंद्रावली और होर्न नृत्य करने का जो मौका दिया जा रहा है, वह सराहनीय कदम है। यह सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए आने वाले समय में कारगर कदम साबित होगा। ठाकुर माधोराय कमेटी का यह कदम आने वाले समय में युवा पीढ़ी को इस ओर आकर्षित करेगा।
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गौरतलब है कि चंद्रावली और होर्न नृत्य परंपरागत प्राचीन नृत्य है। यह नृत्य अब घाटी में कुछ ही स्थानों में सिमटकर रह गया है। इसको बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जाने लगी है। लिहाजा, माधोराय कमेटी ने आने वाली पीढ़ी को इस नृत्य से अवगत करवाने के लिए उनकी भागीदारी को तय किया है। इसी कड़ी के तहत हरिपुर दशहरा उत्सव में छोटे-छोट बच्चों ने इन नृत्यों की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी। बच्चों की यह प्रस्तुति लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी।
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हरिपुर दशहरा में जहां चंद्रावली और होर्न नृत्य के अलावा छोटा वाणू, बड़ा वाणू, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, देवी रूप, माडू भाई आदि परंपरागत रीति रिवाजों के अनुसार ठाकुर माधोराय दशहरा मैदान में स्थानीय ग्रामीणों की ओर से प्रस्तुत किया जाता है। चंद्रावली नृत्य पहले बड़े लोग ही करते थे लेकिन अब नई पीढ़ी इस परंपरा को निभाने के लिए आगे आ रही है। होर्न नृत्य दशहरे के पहले दिन किया जाता है।
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क्या कहते हैं जानकार
लेखक डॉ. सूरत ठाकुर का कहना है कि हरिपुर दशहरा उत्सव में नई पीढ़ी को जो चंद्रावली और होर्न नृत्य करने का जो मौका दिया जा रहा है, वह सराहनीय कदम है। यह सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए आने वाले समय में कारगर कदम साबित होगा। ठाकुर माधोराय कमेटी का यह कदम आने वाले समय में युवा पीढ़ी को इस ओर आकर्षित करेगा।