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Kullu News: जाहलमा पुल 15 जुलाई तक होगा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 18 Jun 2026 10:30 AM IST
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जाहलमा नाले पर क्षतिग्रस्त पुल की जगह नए बैली ब्रिज के निर्माण की दिशा में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने काम तेज कर दिया है। बीआरओ ने 15 जुलाई तक 140 फीट लंबे बैली ब्रिज को तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
बुधवार से पुल के आधार (एबटमेंट) निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। 26 मई की रात जाहलमा पुल के समीप पहाड़ी से भारी चट्टानें और मलबा गिरने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्र के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
बीआरओ की 94 आरसी के ओसी मेजर पारस ने बताया कि निर्धारित समय में पुल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। जाहलमा पुल लाहौल घाटी की 14 पंचायतों और पांगी घाटी के लोगों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
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इन दिनों किसानों की सब्जियां तैयार होने वाली हैं, ऐसे में लोगों को पुल के जल्द निर्माण का इंतजार है। हालांकि बीआरओ ने अस्थायी राहत के तौर पर नाले से होकर वैकल्पिक सड़क तैयार कर वाहनों की आवाजाही बहाल की है लेकिन नाले की स्थिति को लेकर लोग चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से जून से अगस्त के बीच जाहलमा नाले में बार-बार बाढ़ आने से कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में यदि फसल तैयार होने के दौरान नाले में बाढ़ आती है तो किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जाहलमा, जुंडा, नालडा, मूरिंग, थिरोट, किशोरी, त्रिलोकनाथ, शकोली, उदयपुर, चिमरेट, तिंगरेट, मडग्रां, सलग्रां और तिंदी सहित समूची पांगी घाटी के लोगों की निगाहें अब 15 जुलाई तक प्रस्तावित नए पुल के निर्माण पर टिकी हैं।
बुधवार से पुल के आधार (एबटमेंट) निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। 26 मई की रात जाहलमा पुल के समीप पहाड़ी से भारी चट्टानें और मलबा गिरने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्र के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
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बीआरओ की 94 आरसी के ओसी मेजर पारस ने बताया कि निर्धारित समय में पुल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। जाहलमा पुल लाहौल घाटी की 14 पंचायतों और पांगी घाटी के लोगों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
इन दिनों किसानों की सब्जियां तैयार होने वाली हैं, ऐसे में लोगों को पुल के जल्द निर्माण का इंतजार है। हालांकि बीआरओ ने अस्थायी राहत के तौर पर नाले से होकर वैकल्पिक सड़क तैयार कर वाहनों की आवाजाही बहाल की है लेकिन नाले की स्थिति को लेकर लोग चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से जून से अगस्त के बीच जाहलमा नाले में बार-बार बाढ़ आने से कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में यदि फसल तैयार होने के दौरान नाले में बाढ़ आती है तो किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जाहलमा, जुंडा, नालडा, मूरिंग, थिरोट, किशोरी, त्रिलोकनाथ, शकोली, उदयपुर, चिमरेट, तिंगरेट, मडग्रां, सलग्रां और तिंदी सहित समूची पांगी घाटी के लोगों की निगाहें अब 15 जुलाई तक प्रस्तावित नए पुल के निर्माण पर टिकी हैं।