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हिमाचल: देश की मंडियों में पहुंचा लाहौल का लाल रसीला सेब, गुणवत्ता और स्वाद ने बढ़ाई मांग; मिल रहे अच्छे दाम
Thu, 22 Oct 2026 09:19 AM IST
Ankesh Dogra
दिनेश जस्पा, उदयपुर/लाहौल स्पीति।
दिनेश जस्पा, उदयपुर/लाहौल स्पीति।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 22 Oct 2026 09:19 AM IST
सार
लाहौल घाटी में सेब सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है और बागवानों को पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर दाम मिल रहे हैं। कुल्लू और शिमला में कम पैदावार के चलते लाहौली सेब की मांग बढ़ी है तथा 20 किलो की पेटी 1300 से 1500 रुपये तक बिक रही है। घाटी में करीब 1150 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब उत्पादन हो रहा है।
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लाहौल में सेब से लदे पेड़।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
लाहौल घाटी का लाल रसीला सेब अब देश की मंडियों में पहुंचने लगा है। इस बार सेब के बेहतर दाम मिलने से बागवानों के चेहरे खिले हुए हैं। घाटी में सेब सीजन ने जोर पकड़ लिया है और दूसरे राज्यों के बड़े व्यापारी खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। व्यापारियों की बढ़ती आवाजाही से लाहौली सेब की मांग में भी तेजी आई है।
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जानकारी के अनुसार, इस बार घाटी के 70 फीसदी से अधिक बागवानों ने अपने बगीचे ठेके पर दे रखे हैं। प्रदेश में सेब की कम पैदावार के कारण लाहौल के सेब को बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। कुल्लू और शिमला में इस बार फसल कम होने से लाहौली सेब की मांग बढ़ी है। वर्तमान में घाटी में 20 किलो सेब की पेटी 1300 से 1500 रुपये तक बिक रही है। यह भाव पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर बताए जा रहे हैं।
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1150 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रहा सेब उत्पादन
बागवानी विभाग लाहौल से मिली जानकारी के अनुसार, घाटी में पिछले दो दशकों से सेब उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में लाहौल घाटी के लगभग 1150 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है। बागवानी क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय किसानों और बागवानों के लिए सेब एक महत्वपूर्ण आय का साधन बन रहा है।
बागवानी विभाग लाहौल से मिली जानकारी के अनुसार, घाटी में पिछले दो दशकों से सेब उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में लाहौल घाटी के लगभग 1150 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है। बागवानी क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय किसानों और बागवानों के लिए सेब एक महत्वपूर्ण आय का साधन बन रहा है।
मोटा छिलका और बेहतर स्वाद है लाहौली सेब की खासियत
लाहौल के सेब की प्रमुख विशेषताओं में इसका मोटा छिलका शामिल है। इसके कारण सेब को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा, यह सेब रसीला और स्वादिष्ट होने के कारण देश की मंडियों में अपनी अलग पहचान रखता है। इसकी बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता व्यापारियों को आकर्षित करती है।
लाहौल के सेब की प्रमुख विशेषताओं में इसका मोटा छिलका शामिल है। इसके कारण सेब को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा, यह सेब रसीला और स्वादिष्ट होने के कारण देश की मंडियों में अपनी अलग पहचान रखता है। इसकी बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता व्यापारियों को आकर्षित करती है।
कम पैदावार से बढ़ी मांग, बागवानों को बेहतर कीमत
बागवानी विकास अधिकारी उदयपुर प्यारे लाल ने बताया कि इस बार प्रदेश में सेब का उत्पादन कम होने के कारण लाहौल के सेब की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि घाटी का सेब गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर है और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ के कारण व्यापारी इसे पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग बागवानों को उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों के बारे में लगातार जागरूक कर रहा है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
बागवानी विकास अधिकारी उदयपुर प्यारे लाल ने बताया कि इस बार प्रदेश में सेब का उत्पादन कम होने के कारण लाहौल के सेब की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि घाटी का सेब गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर है और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ के कारण व्यापारी इसे पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग बागवानों को उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों के बारे में लगातार जागरूक कर रहा है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
वहीं, स्थानीय बागवानों का कहना है कि इस बार ठेकेदारों ने बगीचों के अच्छे दाम दिए हैं। सीधे मंडियों में सेब बेचने पर भी बेहतर कीमत मिल रही है। इससे बागवानों को इस सीजन में अच्छी आमदनी की उम्मीद है।