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Kullu News: एमपी का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी बनेगा विश्व धरोहर
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यूनेस्को नामांकन को लेकर तीर्थन घाटी में हुई उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान। जागरूक पाठक
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बंजार (कुल्लू)। मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया जा रहा है। इसकी तमाम प्रक्रिया को जानने के लिए बुधवार को तीर्थन घाटी में बैठक हुई।
इसमें ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) कुल्लू और मध्य प्रदेश के वन विभाग एवं पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने भाग लिया। पारंपरिक काष्ठकुणी शैली में बने बुटीक स्टे सनशाइन हिमालयन कॉटेज में हुई बैठक देहरादून के वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से की गई।
मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अधिकारियों से विश्व धरोहर की नामांकन और अन्य प्रक्रियाओं के बारे में जाना।
इस दौरान ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन ने विश्व धरोहर को लेकर अपने अनुभव साझा कर बताया कि किस प्रकार मजबूत संरक्षण व्यवस्था, वैज्ञानिक दस्तावेज और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी इस उपलब्धि को हासिल करने में अहम साबित होती है।
पार्क के निदेशक संदीप शर्मा और डीएफओ सचिन शर्मा ने मध्य प्रदेश की टीम को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक संपदा का संरक्षण, स्पष्ट दस्तावेज़ और सतत पर्यटन मॉडल बेहद जरूरी होते हैं।
इस मौके पर एल कृष्णमूर्ति, राखी नंदा, प्रशांत सिंह बघेल, दिलीप कुमार यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के डॉ. भूमेश सिंह भदौरिया, डॉ. गौतम तालुकदार और उनकी टीम मौजूद रही। प्रतिभागियों ने यहां की पारंपरिक वास्तुकला की सराहना की और जलोड़ी दर्रा की ताजा बर्फबारी का आनंद भी लिया। टीम ने तीर्थन घाटी में बर्ड वाचिंग, फिशिंग और स्थानीय ट्राउट मछली फार्म का निरीक्षण किया और क्षेत्र में चल रही सामुदायिक आधारित ईको-टूरिज्म पहलुओं को भी जाना। ईको टूरिज्म विशेषज्ञ अंकित सूद ने भी अपने सुझाव साझा किए।
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इसमें ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) कुल्लू और मध्य प्रदेश के वन विभाग एवं पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने भाग लिया। पारंपरिक काष्ठकुणी शैली में बने बुटीक स्टे सनशाइन हिमालयन कॉटेज में हुई बैठक देहरादून के वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से की गई।
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मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अधिकारियों से विश्व धरोहर की नामांकन और अन्य प्रक्रियाओं के बारे में जाना।
इस दौरान ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन ने विश्व धरोहर को लेकर अपने अनुभव साझा कर बताया कि किस प्रकार मजबूत संरक्षण व्यवस्था, वैज्ञानिक दस्तावेज और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी इस उपलब्धि को हासिल करने में अहम साबित होती है।
पार्क के निदेशक संदीप शर्मा और डीएफओ सचिन शर्मा ने मध्य प्रदेश की टीम को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक संपदा का संरक्षण, स्पष्ट दस्तावेज़ और सतत पर्यटन मॉडल बेहद जरूरी होते हैं।
इस मौके पर एल कृष्णमूर्ति, राखी नंदा, प्रशांत सिंह बघेल, दिलीप कुमार यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के डॉ. भूमेश सिंह भदौरिया, डॉ. गौतम तालुकदार और उनकी टीम मौजूद रही। प्रतिभागियों ने यहां की पारंपरिक वास्तुकला की सराहना की और जलोड़ी दर्रा की ताजा बर्फबारी का आनंद भी लिया। टीम ने तीर्थन घाटी में बर्ड वाचिंग, फिशिंग और स्थानीय ट्राउट मछली फार्म का निरीक्षण किया और क्षेत्र में चल रही सामुदायिक आधारित ईको-टूरिज्म पहलुओं को भी जाना। ईको टूरिज्म विशेषज्ञ अंकित सूद ने भी अपने सुझाव साझा किए।