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Kullu News: स्मार्ट बिजली मीटर के खिलाफ पेंशनर फोरम और महिलाओं का प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 06 Mar 2026 10:55 PM IST
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नियमों को ताक पर रख जबरदस्ती बदले जा रहे बिजली के मीटर : कुलदीप
सरकार से की स्वतंत्र जांच और स्मार्ट मीटर लगाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित स्मार्ट मीटरिंग परियोजना के विरोध में शुक्रवार को कुल्लू जिला मुख्यालय में जनता संघर्ष समिति और विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के संयुक्त तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कुल्लू और मनाली उपमंडल के करीब 55 महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजकर स्मार्ट मीटर योजना के वित्तीय, प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर आपत्ति जताई और इसकी स्वतंत्र जांच करवाने और मीटर लगाने पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।
विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि स्मार्ट मीटर अभियान नियमों को ताक पर रखकर जबरदस्ती चलाया जा रहा है। बोर्ड अधिकारियों की ओर से बताए जा रहे स्मार्ट मीटरों के फायदे वास्तविकता से परे हैं और इससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिजली कानून 2025 के प्रावधानों के तहत विद्युत वितरण क्षेत्र में निजी कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने की आशंका है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटरों की लागत भी किस्तों में करीब नौ वर्षों तक उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी,जबकि इससे मुख्य लाभ निजी कंपनियों को होगा।
कहा कि प्रदेश में लगभग 13 लाख उपभोक्ताओं की बिजली खपत 125 यूनिट से कम है, जिनका बिजली बिल शून्य आता है। ऐसे में करीब 9 से 10 हजार रुपये कीमत के स्मार्ट मीटर लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि स्मार्ट मीटर लगने से करीब 1,500 आउटसोर्स कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है और विद्युत उपमंडलों में कार्यरत नियमित कर्मचारी भी प्रभावित हो सकते हैं।
जनता संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष हुकम चंद नेगी और महिला मंडल प्रतिनिधि रीना और विमला देवी ने भी सरकार से इस परियोजना को लागू करने से पहले व्यापक जन परामर्श कराने और इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में पहले से लगे इलेक्ट्रॉनिक मीटर सुचारु रूप से काम कर रहे हैं, तो उन्हें बदलना जनता के पैसे की बर्बादी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश भर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित स्मार्ट मीटरिंग परियोजना के विरोध में शुक्रवार को कुल्लू जिला मुख्यालय में जनता संघर्ष समिति और विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के संयुक्त तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कुल्लू और मनाली उपमंडल के करीब 55 महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजकर स्मार्ट मीटर योजना के वित्तीय, प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर आपत्ति जताई और इसकी स्वतंत्र जांच करवाने और मीटर लगाने पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।
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विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि स्मार्ट मीटर अभियान नियमों को ताक पर रखकर जबरदस्ती चलाया जा रहा है। बोर्ड अधिकारियों की ओर से बताए जा रहे स्मार्ट मीटरों के फायदे वास्तविकता से परे हैं और इससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिजली कानून 2025 के प्रावधानों के तहत विद्युत वितरण क्षेत्र में निजी कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने की आशंका है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटरों की लागत भी किस्तों में करीब नौ वर्षों तक उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी,जबकि इससे मुख्य लाभ निजी कंपनियों को होगा।
कहा कि प्रदेश में लगभग 13 लाख उपभोक्ताओं की बिजली खपत 125 यूनिट से कम है, जिनका बिजली बिल शून्य आता है। ऐसे में करीब 9 से 10 हजार रुपये कीमत के स्मार्ट मीटर लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि स्मार्ट मीटर लगने से करीब 1,500 आउटसोर्स कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है और विद्युत उपमंडलों में कार्यरत नियमित कर्मचारी भी प्रभावित हो सकते हैं।
जनता संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष हुकम चंद नेगी और महिला मंडल प्रतिनिधि रीना और विमला देवी ने भी सरकार से इस परियोजना को लागू करने से पहले व्यापक जन परामर्श कराने और इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में पहले से लगे इलेक्ट्रॉनिक मीटर सुचारु रूप से काम कर रहे हैं, तो उन्हें बदलना जनता के पैसे की बर्बादी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश भर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।