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Kullu News: सूरज ढलते ही सीएचसी सैंज में नहीं मिलता इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:07 PM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज, जहां पर लोगों को रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही है। संवा
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रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने से क्षेत्र के हजारों लोगों झेलनी पड़ रहीं परेशानियां
रात को तबीयत बिगड़ने पर लगानी पड़ती है 50 से 60 किमी दूर कुल्लू की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सैंज में रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं बंद हैं। इस वजह से क्षेत्र के हजारों लोगों को उपचार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीएचसी में शाम पांच बजते ही ताला लटक जाता है। रात के समय अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को 50 से 60 किलोमीटर दूर कुल्लू अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। कागजों में सीएचसी का दर्जा तो बढ़ा है, लेकिन हकीकत में सुविधा नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि सैंज घाटी के दर्जनों गांव इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं लेकिन चिकित्सकों और स्टाफ की कमी के चलते वहां रात की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सीएचसी में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाएं। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की जाए और एंबुलेंस सुविधा को भी मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सैंज क्षेत्र की 15 पंचायतों की हजारों की आबादी इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है। सीएचसी सैंज में रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से मरीजों को मजबूरी में कुल्लू की दौड़ लगानी पड़ रही है।
-- सरकार ने कागजों में सीएचसी को अपग्रेड कर दिया लेकिन धरातल पर लोगों को अभी भी उपचार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रात के समय अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसे कई किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय कुल्लू पहुंचाना पड़ता है। -डूर सिंह, निवासी रैला
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सीएचसी सैंज में रात्रि उपचार सेवाएं मरीजों को नहीं मिल रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के लिए तीमारदारों को मरीजों को उपचार के लिए मजबूरन कुल्लू ले जाना पड़ता है। इससे मरीज का मर्ज तो बढ़ता है। तीमारदार भी परेशान अधिक होते हैं। -सीता राम, निवासी दुशाहड़ पंचायत
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क्या कहते हैं अधिकारी
डॉॅक्टर और स्टाफ नर्स की कमी है। इसके लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। ऑन कॉल डॉक्टर रात्रि में मरीजों का उपचार भी करते हैं। - डॉ. नीलम शर्मा, बीएमओ बंजार
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अपग्रेड कर सीएचसी में 50 बिस्तरों की दी सुविधा
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में पीएचसी सैंज को अपग्रेड कर सीएचसी बनाने की घोषणा की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज को अपग्रेड कर 50 बिस्तरों की सुविधा वाला बनाया गया है लेकिन सीएचसी सैंज के हालात जस के तस बने हुए हैं। सीएचसी में चिकित्सकों के तीन रिक्त चल रहे हैं। फार्मासिस्ट के दो, स्टाफ नर्स के तीन, अधीक्षक, एक्स-रे तकनीशियन, स्वच्छता निरीक्षक, वार्डन, ड्रेसर और चौकीदार के एक-एक पद खाली हैं।
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रात को तबीयत बिगड़ने पर लगानी पड़ती है 50 से 60 किमी दूर कुल्लू की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सैंज में रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं बंद हैं। इस वजह से क्षेत्र के हजारों लोगों को उपचार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीएचसी में शाम पांच बजते ही ताला लटक जाता है। रात के समय अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को 50 से 60 किलोमीटर दूर कुल्लू अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। कागजों में सीएचसी का दर्जा तो बढ़ा है, लेकिन हकीकत में सुविधा नहीं है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सैंज घाटी के दर्जनों गांव इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं लेकिन चिकित्सकों और स्टाफ की कमी के चलते वहां रात की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सीएचसी में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाएं। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की जाए और एंबुलेंस सुविधा को भी मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सैंज क्षेत्र की 15 पंचायतों की हजारों की आबादी इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है। सीएचसी सैंज में रात्रि स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से मरीजों को मजबूरी में कुल्लू की दौड़ लगानी पड़ रही है।
सीएचसी सैंज में रात्रि उपचार सेवाएं मरीजों को नहीं मिल रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के लिए तीमारदारों को मरीजों को उपचार के लिए मजबूरन कुल्लू ले जाना पड़ता है। इससे मरीज का मर्ज तो बढ़ता है। तीमारदार भी परेशान अधिक होते हैं। -सीता राम, निवासी दुशाहड़ पंचायत
क्या कहते हैं अधिकारी
डॉॅक्टर और स्टाफ नर्स की कमी है। इसके लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। ऑन कॉल डॉक्टर रात्रि में मरीजों का उपचार भी करते हैं। - डॉ. नीलम शर्मा, बीएमओ बंजार
अपग्रेड कर सीएचसी में 50 बिस्तरों की दी सुविधा
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में पीएचसी सैंज को अपग्रेड कर सीएचसी बनाने की घोषणा की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज को अपग्रेड कर 50 बिस्तरों की सुविधा वाला बनाया गया है लेकिन सीएचसी सैंज के हालात जस के तस बने हुए हैं। सीएचसी में चिकित्सकों के तीन रिक्त चल रहे हैं। फार्मासिस्ट के दो, स्टाफ नर्स के तीन, अधीक्षक, एक्स-रे तकनीशियन, स्वच्छता निरीक्षक, वार्डन, ड्रेसर और चौकीदार के एक-एक पद खाली हैं।