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Mandi News: चुंजवाला धार में उमड़े भक्त, हुम उत्सव शुरू
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रातभर चलीं प्राचीन देव रस्में, बच्चों का मुंडन संस्कार भी हुआ
वाद्य यंत्रों और देव शक्तियों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आराध्य देवता चुंजवाला की तपोस्थली चुंजवाला धार में पारंपरिक हुम उत्सव प्राचीन देव रस्मों के साथ शुरू हो गया। उत्सव में शामिल होने और देवता के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने जहां चुंजवाला धार पहुंचकर आराध्य देवता का आशीर्वाद लिया, वहीं प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक वादियों का भी भरपूर आनंद उठाया।
चुंजवाला मंदिर क्षेत्र का एक प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। आराध्य देवता चुंजवाला का देवरथ कांढा कोठी से रवाना होकर रस्सियों के सहारे दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए चुंजवाला धार पहुंचा। देवता अपने हारियानों, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक शृंगार के साथ देर शाम रवाना हुए और लगभग दो घंटे बाद अपने मूल स्थान पहुंचे। इस दौरान देव रथ को बड़े पहाड़ों पर रस्सियों के सहारे ले जाते समय वाद्य यंत्रों और देव शक्तियों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। देवरथ का चुंजवाला धार पहुंचने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मूल मंदिर पहुंचने के बाद पारंपरिक देव रस्मों का निर्वहन शुरू हुआ। पूरी रात विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इस वर्ष भी चुंजवाला धार और शालागाड़ दोनों स्थानों पर सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर और आसपास के जंगलों में लकड़ियों के कुंड जलाकर पूरे क्षेत्र को प्रकाशमय कर दिया। देव कार्रवाई के दौरान देव कारिंदों की ओर से पारंपरिक नृत्यों का भी आयोजन किया गया। अंतिम देव रस्मों के बाद देवता के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, जिसके साथ ही मुंडन संस्कार भी शुरू हो गया। क्षेत्र के लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार संपन्न कराया। देवता कमेटी के अध्यक्ष देवराज ने बताया कि इस वर्ष आराध्य देवता चुंजवाला का देवरथ कांढा कोठी से रवाना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि परिसर में शराब के सेवन और वाहनों को मंदिर तक ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
वाद्य यंत्रों और देव शक्तियों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आराध्य देवता चुंजवाला की तपोस्थली चुंजवाला धार में पारंपरिक हुम उत्सव प्राचीन देव रस्मों के साथ शुरू हो गया। उत्सव में शामिल होने और देवता के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने जहां चुंजवाला धार पहुंचकर आराध्य देवता का आशीर्वाद लिया, वहीं प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक वादियों का भी भरपूर आनंद उठाया।
चुंजवाला मंदिर क्षेत्र का एक प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। आराध्य देवता चुंजवाला का देवरथ कांढा कोठी से रवाना होकर रस्सियों के सहारे दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए चुंजवाला धार पहुंचा। देवता अपने हारियानों, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक शृंगार के साथ देर शाम रवाना हुए और लगभग दो घंटे बाद अपने मूल स्थान पहुंचे। इस दौरान देव रथ को बड़े पहाड़ों पर रस्सियों के सहारे ले जाते समय वाद्य यंत्रों और देव शक्तियों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। देवरथ का चुंजवाला धार पहुंचने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मूल मंदिर पहुंचने के बाद पारंपरिक देव रस्मों का निर्वहन शुरू हुआ। पूरी रात विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इस वर्ष भी चुंजवाला धार और शालागाड़ दोनों स्थानों पर सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर और आसपास के जंगलों में लकड़ियों के कुंड जलाकर पूरे क्षेत्र को प्रकाशमय कर दिया। देव कार्रवाई के दौरान देव कारिंदों की ओर से पारंपरिक नृत्यों का भी आयोजन किया गया। अंतिम देव रस्मों के बाद देवता के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, जिसके साथ ही मुंडन संस्कार भी शुरू हो गया। क्षेत्र के लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार संपन्न कराया। देवता कमेटी के अध्यक्ष देवराज ने बताया कि इस वर्ष आराध्य देवता चुंजवाला का देवरथ कांढा कोठी से रवाना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि परिसर में शराब के सेवन और वाहनों को मंदिर तक ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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