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हिमाचल: मंडी में ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र की भूमिकाओं वाले पोस्टर पर विवाद, संस्थान बोला- समर्थन नहीं
Mon, 07 Sep 2026 11:20 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:20 AM IST
सार
आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक भगवद्गीता आधारित पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों की भूमिकाओं का उल्लेख किया गया था। संस्थान ने मामले की जांच के लिए फैकल्टी सदस्यों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों वाली कमेटी गठित की है। आईआईटी मंडी ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम संस्थान का आधिकारिक रूप से प्रायोजित या समर्थित कार्यक्रम नहीं था।
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आईआईटी मंडी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी समारोह के दौरान जातिगत टिप्पणी वाला भगवद्गीता आधारित पोस्टर लगाए जाने से विवाद खड़ा हो गया। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों में बांटते हुए शूद्रों की भूमिका ‘उच्च वर्गों की सेवा करना’ बताई गई थी। मामला सामने आने पर संस्थान ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।
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संस्थान का दावा है कि जन्माष्टमी का कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था। यह संस्थान का आधिकारिक रूप से प्रायोजित या समर्थित कार्यक्रम नहीं था। कमेटी पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि विवादित पोस्टर किसने लगाया, क्यों लगाया और इसके पीछे क्या वजह थी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर संस्थान आगे की कार्रवाई करेगा। मामले की जांच के लिए गठित समिति में फैकल्टी सदस्यों के साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
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उधर, आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डॉ. केएस पांडेय ने कहा कि इस तरह के पोस्टर या गतिविधियों को संस्थान किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करता। कहा कि संस्थान अपनी नीतियों के अनुरूप ही पूरे मामले में कार्रवाई करेगा। वहीं, आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पोस्टर छात्रों के एक कार्यक्रम का हिस्सा था और कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है। कुछ छात्रों ने गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है।बेहरा ने कहा कि आईआईटी मंडी समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और संविधान में निहित अन्य मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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यह लिखा है पोस्टर में
विवादित पोस्टर का शीर्षक ‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था। इसे संस्थान के ऑडिटोरियम के बाहर लगाया गया था। पोस्टर में ब्राह्मणों की भूमिका ‘ईश्वर का संदेश फैलाना’, क्षत्रियों की ‘समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना’, वैश्यों की ‘अर्थव्यवस्था चलाना और दूसरों की मदद करना’ तथा शूद्रों की भूमिका ‘उच्च वर्गों की सेवा करना’ बताई गई थी।
पोस्टर में भगवद्गीता का एक श्लोक भी दिया गया था, जिसमें मानव समाज के चार विभाजनों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कर्मों के आधार पर बनाए जाने की बात कही गई है।
पहले भी विवादों में रहे हैं बेहरा
प्रोफेसर बेहरा की विशेषज्ञता रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में है। वह इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। 2023 में उन्होंने छात्रों से मांस न खाने का संकल्प लेने को कहा था। उन्होंने दावा किया था कि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों के प्रति क्रूरता के कारण हो रही हैं।
आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर नियुक्ति के कुछ समय बाद एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें बेहरा ने दावा किया था कि उन्होंने पवित्र मंत्रों का जाप कर एक मित्र के परिवार को बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाने में मदद की। प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा का इस्कान और भगवद्गीता से पुराना जुड़ाव है। वे करीब 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के माध्यम से शांति के सिद्धांतों की शिक्षा दे रहे हैं और संस्थान में तीन क्रेडिट का भगवद्गीता पाठ्यक्रम भी पढ़ाते हैं।
विवादित पोस्टर का शीर्षक ‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था। इसे संस्थान के ऑडिटोरियम के बाहर लगाया गया था। पोस्टर में ब्राह्मणों की भूमिका ‘ईश्वर का संदेश फैलाना’, क्षत्रियों की ‘समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना’, वैश्यों की ‘अर्थव्यवस्था चलाना और दूसरों की मदद करना’ तथा शूद्रों की भूमिका ‘उच्च वर्गों की सेवा करना’ बताई गई थी।
पोस्टर में भगवद्गीता का एक श्लोक भी दिया गया था, जिसमें मानव समाज के चार विभाजनों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कर्मों के आधार पर बनाए जाने की बात कही गई है।
पहले भी विवादों में रहे हैं बेहरा
प्रोफेसर बेहरा की विशेषज्ञता रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में है। वह इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। 2023 में उन्होंने छात्रों से मांस न खाने का संकल्प लेने को कहा था। उन्होंने दावा किया था कि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों के प्रति क्रूरता के कारण हो रही हैं।
आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर नियुक्ति के कुछ समय बाद एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें बेहरा ने दावा किया था कि उन्होंने पवित्र मंत्रों का जाप कर एक मित्र के परिवार को बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाने में मदद की। प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा का इस्कान और भगवद्गीता से पुराना जुड़ाव है। वे करीब 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के माध्यम से शांति के सिद्धांतों की शिक्षा दे रहे हैं और संस्थान में तीन क्रेडिट का भगवद्गीता पाठ्यक्रम भी पढ़ाते हैं।