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Mandi News: बगस्याड़ क्षेत्र में बेकाबू पीलिया, सात और मरीज मिले, 99 पहुंचा पीडितों का आंकड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 08 Feb 2026 07:29 AM IST
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गोहर (मंडी)। जनपद के स्वास्थ्य खंड बगस्याड़ में पीलिया का प्रकोप अब बेकाबू होने लगा है। शनिवार को सात नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 99 तक पहुंच गई है। पीलिया के इस हॉटस्पॉट में वर्तमान में 37 एक्टिव केस हैं, जिनमें से तीन मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। शेष मरीज होम आइसोलेशन में हैं।
एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। प्रारंभिक जांच में पीलिया फैलने का मुख्य कारण पेयजल स्रोतों का दूषित होना माना जा रहा है। आरोप है कि कई स्थानों पर पेयजल लाइनें गंदे नालों के समीप से गुजर रही हैं, जिससे संक्रमण फैल रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने अब आनन-फानन में स्रोतों की सफाई और क्लोरीनेशन का कार्य तेज किया है। विभाग की टीमें उन क्षेत्रों में पाइपलाइनों के रिसाव (लीकेज) की जांच कर रही हैं, जहां संक्रमण का स्तर सर्वाधिक है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि प्रशासन ने स्थिति बिगड़ने से पहले निवारक कदम क्यों नहीं उठाए।
उबला पानी ही एकमात्र बचाव
खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. राकेश रोशन ने कहा कि मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। विभाग प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और संदिग्धों के सैंपल लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग बिना उबाले पानी का सेवन बिल्कुल न करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि किसी को भी आंखों में पीलापन, अत्यधिक थकान, बुखार या उल्टी जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करें।
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एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। प्रारंभिक जांच में पीलिया फैलने का मुख्य कारण पेयजल स्रोतों का दूषित होना माना जा रहा है। आरोप है कि कई स्थानों पर पेयजल लाइनें गंदे नालों के समीप से गुजर रही हैं, जिससे संक्रमण फैल रहा है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने अब आनन-फानन में स्रोतों की सफाई और क्लोरीनेशन का कार्य तेज किया है। विभाग की टीमें उन क्षेत्रों में पाइपलाइनों के रिसाव (लीकेज) की जांच कर रही हैं, जहां संक्रमण का स्तर सर्वाधिक है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि प्रशासन ने स्थिति बिगड़ने से पहले निवारक कदम क्यों नहीं उठाए।
उबला पानी ही एकमात्र बचाव
खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. राकेश रोशन ने कहा कि मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। विभाग प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और संदिग्धों के सैंपल लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग बिना उबाले पानी का सेवन बिल्कुल न करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि किसी को भी आंखों में पीलापन, अत्यधिक थकान, बुखार या उल्टी जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करें।