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Mandi News: लडभड़ोल अस्पताल खुद बीमार, मरीज मुश्किल में

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2026 12:55 AM IST
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Ladbhadol hospital itself is sick, patients are in trouble
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3 में से 2 डॉक्टर गए, अब 9 से 4 बजे तक ही मिल रहा इलाज
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न विशेषज्ञ, न अल्ट्रासाउंड, रात और छुट्टी के दिन स्टाफ नर्सों के सहारे चल रही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
लडभड़ोल (मंडी)। लडभड़ोल तहसील क्षेत्र की डेढ़ दर्जन से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला सिविल अस्पताल लडभड़ोल इन दिनों खुद ही बीमार नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि इतने बड़े क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे और मात्र एक डॉक्टर के सहारे चल रही है। अलग-अलग सरकारों ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए अस्पताल का दर्जा तो बढ़ा दिया, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं और मूलभूत ढांचे की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

पहले इस अस्पताल में तीन डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे थे, जिनमें से दो डॉक्टर आगे की पढ़ाई के लिए यहां से जा चुके हैं। अब क्षेत्र की जनता के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि एकमात्र डॉक्टर दिन में सेवाएं देगा या रात में। स्थिति यह है कि छुट्टी वाले दिन यहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं रहता और अस्पताल पूरी तरह से स्टाफ नर्सों के भरोसे चलता है।
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सिविल अस्पताल का दर्जा होने के बावजूद यहां न तो अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है और न ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात है। नियमानुसार इस स्तर के अस्पताल में कम से कम चार विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित 8 से 10 डॉक्टर होने चाहिए। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते यहां केवल एक डॉक्टर ही सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक सेवाएं दे पाते हैं। इसके बाद या किसी आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को स्टाफ नर्सों के सहारे ही उपचार करवाना पड़ता है।
उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों पल्लवी, सोनिया, सपना, उर्मिला, सुनील, नीतू और धर्म सिंह ने लचर स्वास्थ्य सुविधाओं पर रोष जताते हुए कहा कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-छोटी बीमारियों और जांच के लिए भी उन्हें दूर-दराज के अन्य अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कोट्स
विभाग की ओर से समय-समय पर अस्पताल की सभी समस्याओं के बारे में उच्च अधिकारियों और सरकार को अवगत कराया जाता है। जहां तक स्टाफ और डॉक्टरों की कमी का सवाल है, यह नियुक्तियों से जुड़ा मामला है, जो सीधे तौर पर सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। -डॉ. दिपाली शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडी।
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