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पुस्तकालय ज्ञान, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र : संजीव
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वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी में लगाई पुस्तक प्रदर्शनी
लाइब्रेरियन डे पर डॉ. रंगनाथन को किया याद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी के डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय में महान पुस्तकालय विज्ञानी डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती पर लाइब्रेरियन डे का आयोजन किया गया। इस दौरान पुस्तकालय में पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। तत्पश्चात डॉ. एसआर रंगनाथन को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धांजलि एवं सम्मान व्यक्त किया गया। सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष चंद्र चौहान, रूमा देवी और भगवती भारद्वाज ने डॉ. एसआर रंगनाथन के जीवन, व्यक्तित्व, उपलब्धियों एवं पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार प्राचार्य ने डॉ. रंगनाथन के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने तथा नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने का आह्वान किया।
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लाइब्रेरियन डे पर डॉ. रंगनाथन को किया याद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी के डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय में महान पुस्तकालय विज्ञानी डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती पर लाइब्रेरियन डे का आयोजन किया गया। इस दौरान पुस्तकालय में पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। तत्पश्चात डॉ. एसआर रंगनाथन को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धांजलि एवं सम्मान व्यक्त किया गया। सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष चंद्र चौहान, रूमा देवी और भगवती भारद्वाज ने डॉ. एसआर रंगनाथन के जीवन, व्यक्तित्व, उपलब्धियों एवं पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार प्राचार्य ने डॉ. रंगनाथन के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने तथा नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने का आह्वान किया।