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Mandi News: महाशिवरात्रि मेला एक माह बाद भी जारी, कारोबारियों ने जताई आपत्ति
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पड्डल मैदान में सज रहा मेला, बाजार के कारोबारियों पर मंदी की मार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। शहर के पड्डल मैदान में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव संपन्न होने के एक माह बाद भी मेला सजा हुआ है। इससे स्थानीय कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोग शहर की दुकानों के बजाय मेला मैदान में ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे मंडी शहर के बाजार खाली नजर आ रहे हैं। दुकानों पर सामान्य भीड़ नहीं लग रही है। मेलों के आयोजन से पूर्व व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन के साथ बैठक कर मेला निर्धारित समय सीमा तक आयोजित करने पर चर्चा की थी। लेकिन, एक माह बीतने के बाद भी मेला समाप्त नहीं हुआ, जिससे दुकानदारों को किराया, कर्मचारियों का वेतन और बिजली-पानी के बिल अदा करना मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मेला मैदान से दुकानों को शीघ्र हटाया जाए, ताकि वे मंदी से उबर सकें।
मेले की वजह से बाजारों से रौनक गायब हो गई है। लोग केवल मेले में ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। -सिमरत पाल सिंह, कॉस्मेटिक कारोबारी, गांधी चौक मंडी
मंडी शहर में उच्च गुणवत्ता और ब्रांडेड कपड़ों की दुकानें हैं, लेकिन लोग केवल मेले में खरीदारी करते हैं। उनका सुझाव है कि प्रशासन महोत्सव के 10–12 दिनों की अवधि तक ही मेलों का आयोजन करे। -हरीश चंद्र, रेडिमेड गारमेंट व्यापारी, महाजन बाजार मंडी
सबसे अधिक नुकसान क्रॉकरी कारोबारियों का हो रहा है। लोग मेलों में सस्ती क्रॉकरी और प्लास्टिक का सामान खरीद लेते हैं, जो कुछ दिनों में क्षतिग्रस्त हो जाता है। शहर के व्यापारी टैक्स और जीएसटी अदा करते हैं, जबकि मेला आयोजकों से कोई टैक्स नहीं लिया जाता। -सुरेंद्र कुमार, क्रॉकरी विक्रेता
शिवरात्रि मेले को समाप्त हुए 23 दिन हो चुके हैं, लेकिन मेला अभी भी जारी है। व्यापारी वर्ग शिवरात्रि मेले की गरिमा का सम्मान करता है, तो प्रशासन को भी उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए। -हरमीत सिंह बिट्टू, प्रधान, थोक अनाज किराना विक्रेता संघ
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। शहर के पड्डल मैदान में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव संपन्न होने के एक माह बाद भी मेला सजा हुआ है। इससे स्थानीय कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोग शहर की दुकानों के बजाय मेला मैदान में ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे मंडी शहर के बाजार खाली नजर आ रहे हैं। दुकानों पर सामान्य भीड़ नहीं लग रही है। मेलों के आयोजन से पूर्व व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन के साथ बैठक कर मेला निर्धारित समय सीमा तक आयोजित करने पर चर्चा की थी। लेकिन, एक माह बीतने के बाद भी मेला समाप्त नहीं हुआ, जिससे दुकानदारों को किराया, कर्मचारियों का वेतन और बिजली-पानी के बिल अदा करना मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मेला मैदान से दुकानों को शीघ्र हटाया जाए, ताकि वे मंदी से उबर सकें।
मेले की वजह से बाजारों से रौनक गायब हो गई है। लोग केवल मेले में ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। -सिमरत पाल सिंह, कॉस्मेटिक कारोबारी, गांधी चौक मंडी
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मंडी शहर में उच्च गुणवत्ता और ब्रांडेड कपड़ों की दुकानें हैं, लेकिन लोग केवल मेले में खरीदारी करते हैं। उनका सुझाव है कि प्रशासन महोत्सव के 10–12 दिनों की अवधि तक ही मेलों का आयोजन करे। -हरीश चंद्र, रेडिमेड गारमेंट व्यापारी, महाजन बाजार मंडी
सबसे अधिक नुकसान क्रॉकरी कारोबारियों का हो रहा है। लोग मेलों में सस्ती क्रॉकरी और प्लास्टिक का सामान खरीद लेते हैं, जो कुछ दिनों में क्षतिग्रस्त हो जाता है। शहर के व्यापारी टैक्स और जीएसटी अदा करते हैं, जबकि मेला आयोजकों से कोई टैक्स नहीं लिया जाता। -सुरेंद्र कुमार, क्रॉकरी विक्रेता
शिवरात्रि मेले को समाप्त हुए 23 दिन हो चुके हैं, लेकिन मेला अभी भी जारी है। व्यापारी वर्ग शिवरात्रि मेले की गरिमा का सम्मान करता है, तो प्रशासन को भी उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए। -हरमीत सिंह बिट्टू, प्रधान, थोक अनाज किराना विक्रेता संघ