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Mandi News: एनएच प्रभावितों ने किया प्रदर्शन, रियूर-बनाल में दो घंटे चक्का जाम
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प्रशासन की मौजूदगी में पहुंची कंपनी
बरसात से पहले सुरक्षा दीवारें और रास्ते बनाने का हुआ लिखित समझौता
18 रिहायशी मकानों पर मंडरा रहा है खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। नेशनल हाईवे निर्माण में लापरवाही के खिलाफ वीरवार को रियूर और बनाल क्षेत्र में ग्रामीणों ने किसान सभा के बैनर और पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। प्रभावित ग्रामीणों ने लगभग दो घंटे तक सड़क जाम कर विरोध जताया। इस दौरान कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने 17 जून तक सभी लंबित कार्य पूरे करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद यातायात बहाल किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एनएच निर्माण कार्य के चलते रियूर की अनुसूचित जाति एवं ओबीसी बस्ती तथा बनाल गांव के लगभग 18 रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार कंपनी की ओर से जगह-जगह अवैज्ञानिक तरीके से डंपिंग की गई है, जिससे पारंपरिक रास्ते और पेयजल स्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आरोप यह भी है कि छह महीने पहले उच्च स्तरीय जांच टीम के निर्देशों के बावजूद कंपनी ने अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कार्य नहीं किया है। मौके पर कंपनी प्रबंधन, पुलिस और नागरिक प्रशासन की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत 17 जून की समय सीमा तय की गई। इस अवधि में बरसात से पहले सभी सुरक्षा दीवारों और डंगों का निर्माण पूरा करने पर सहमति बनी। साथ ही क्षतिग्रस्त रास्तों, बावड़ियों और हैंडपंपों का पुनर्निर्माण तथा बेतरतीब तरीके से फेंके गए मलबे को हटाने पर भी सहमति बनी। किसान सभा के पदाधिकारियों जयगोपाल कटवाल, ज्ञान चंद और चंपा देवी ने स्थानीय विधायक और प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन कंपनी के आगे असहाय नजर आ रहा है। प्रदर्शन में ज्ञान चंद, रूप लाल, पवन कुमार, हंसराज, देश राज, सुनील कुमार, शशिकांत, कृष्ण देव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बरसात से पहले सुरक्षा दीवारें और रास्ते बनाने का हुआ लिखित समझौता
18 रिहायशी मकानों पर मंडरा रहा है खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। नेशनल हाईवे निर्माण में लापरवाही के खिलाफ वीरवार को रियूर और बनाल क्षेत्र में ग्रामीणों ने किसान सभा के बैनर और पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। प्रभावित ग्रामीणों ने लगभग दो घंटे तक सड़क जाम कर विरोध जताया। इस दौरान कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने 17 जून तक सभी लंबित कार्य पूरे करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद यातायात बहाल किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एनएच निर्माण कार्य के चलते रियूर की अनुसूचित जाति एवं ओबीसी बस्ती तथा बनाल गांव के लगभग 18 रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार कंपनी की ओर से जगह-जगह अवैज्ञानिक तरीके से डंपिंग की गई है, जिससे पारंपरिक रास्ते और पेयजल स्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आरोप यह भी है कि छह महीने पहले उच्च स्तरीय जांच टीम के निर्देशों के बावजूद कंपनी ने अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कार्य नहीं किया है। मौके पर कंपनी प्रबंधन, पुलिस और नागरिक प्रशासन की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत 17 जून की समय सीमा तय की गई। इस अवधि में बरसात से पहले सभी सुरक्षा दीवारों और डंगों का निर्माण पूरा करने पर सहमति बनी। साथ ही क्षतिग्रस्त रास्तों, बावड़ियों और हैंडपंपों का पुनर्निर्माण तथा बेतरतीब तरीके से फेंके गए मलबे को हटाने पर भी सहमति बनी। किसान सभा के पदाधिकारियों जयगोपाल कटवाल, ज्ञान चंद और चंपा देवी ने स्थानीय विधायक और प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन कंपनी के आगे असहाय नजर आ रहा है। प्रदर्शन में ज्ञान चंद, रूप लाल, पवन कुमार, हंसराज, देश राज, सुनील कुमार, शशिकांत, कृष्ण देव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।