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Mandi News: पत्नी को 4500 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने के आदेश
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मुकदमे के लिए 4000 रुपये भी देने होंगे
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुंदरनगर की अदालत ने याचिका की मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुंदरनगर की अदालत ने पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक मामले में पत्नी के पक्ष में अंतरिम भरण-पोषण देने के आदेश पारित किए हैं। अदालत ने पति को निर्देश दिए हैं कि वह 1 मार्च 2026 से पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण दे। साथ ही मुकदमे के खर्च के रूप में 4000 रुपये एकमुश्त देने के भी आदेश दिए गए हैं।
मामले के तथ्यों के अनुसार पति द्वारा दायर तलाक याचिका विचाराधीन है, जिसमें उसने पत्नी पर क्रूरता और परित्याग के आरोप लगाए हैं। इसके जवाब में पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 24 के तहत आवेदन दायर कर भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग की थी।
पत्नी ने अदालत को बताया कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है और वह किराए के मकान में रह रही है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने दूसरी शादी कर ली, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा। वहीं, पति ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि पत्नी ब्यूटी पार्लर में कार्यरत है, लेकिन इसके समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। साथ ही उसने अपनी आय का भी स्पष्ट विवरण अदालत के समक्ष नहीं रखा।
अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि पत्नी की आय का कोई प्रमाण नहीं है। वहीं, पति द्वारा आय स्पष्ट न करने पर अदालत ने उसे सामान्य मजदूर मानते हुए उसकी आय 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह आंकी। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया।
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अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुंदरनगर की अदालत ने याचिका की मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुंदरनगर की अदालत ने पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक मामले में पत्नी के पक्ष में अंतरिम भरण-पोषण देने के आदेश पारित किए हैं। अदालत ने पति को निर्देश दिए हैं कि वह 1 मार्च 2026 से पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण दे। साथ ही मुकदमे के खर्च के रूप में 4000 रुपये एकमुश्त देने के भी आदेश दिए गए हैं।
मामले के तथ्यों के अनुसार पति द्वारा दायर तलाक याचिका विचाराधीन है, जिसमें उसने पत्नी पर क्रूरता और परित्याग के आरोप लगाए हैं। इसके जवाब में पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 24 के तहत आवेदन दायर कर भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग की थी।
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पत्नी ने अदालत को बताया कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है और वह किराए के मकान में रह रही है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने दूसरी शादी कर ली, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा। वहीं, पति ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि पत्नी ब्यूटी पार्लर में कार्यरत है, लेकिन इसके समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। साथ ही उसने अपनी आय का भी स्पष्ट विवरण अदालत के समक्ष नहीं रखा।
अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि पत्नी की आय का कोई प्रमाण नहीं है। वहीं, पति द्वारा आय स्पष्ट न करने पर अदालत ने उसे सामान्य मजदूर मानते हुए उसकी आय 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह आंकी। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया।
